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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  

स्वर्ग की रानी प्रार्थना : येसु का स्वर्गारोहण हमें आनन्द प्रदान करता

रविवार को स्वर्ग की रानी प्रार्थना के पूर्व संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि येसु का एक सच्चे ईश्वर एवं सच्चे मानव के रूप में स्वर्गारोहण तथा पवित्र आत्मा की प्रतिज्ञा हमारे लिए आननद का स्रोत है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, रविवार, 16 मई 2021 (रेई)- वाटिकन स्थित संत पेत्रुस  महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार, 16 मई को संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया जिसके पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

आज, इटली और अन्य देशों में प्रभु के स्वर्गारोहण का महापर्व मनाया जाता है। सुसमाचार पाठ (मार.16,15-20) – मारकुस रचित सुसमाचार का अंतिम भाग- पुनर्जीवित प्रभु के, पिता की दाहिनी ओर विराजमान होने से पहले, शिष्यों के साथ मुलाकात को प्रस्तुत करता है। सामान्यतः विदाई का दृश्य उदासी भरा होता है। यह उन लोगों में खोने, छूट जाने की भावना लाती है, जो रह जाते हैं जबकि शिष्यों के लिए ऐसा कुछ नहीं हुआ। प्रभु से अलग होने के बावजूद वे शोकित नहीं हुए बल्कि आनन्दित थे और पृथ्वी पर मिशन में जाने के लिए तैयार थे।

संत पापा ने कहा, “शिष्य क्यों उदास नहीं हैं? प्रभु को स्वर्ग में आरोहित होते देखकर क्यों हमें भी आनन्दित होना चाहिए?”

आनन्द का कारण

उन्होंने कहा, “स्वर्गारोहण येसु के मिशन को हमारे बीच पूर्ण करता है। निश्चय ही, यह हमारे लिए था कि येसु स्वर्ग से उतरे थे, और हमारे लिए ही वे स्वर्ग चले गये। हमारी मानवता में आने और मुक्ति देने के बाद, हमारे हाड़-मांस को अपने साथ लेते हुए अब वे स्वर्ग चले गये। वे पहले मानव हैं जिन्होंने स्वर्ग में प्रवेश किया है क्योंकि येसु मानव हैं, एक सच्चा मानव, और एक सच्चा ईश्वर। हमारा हाड़-मांस स्वर्ग में है और यही हमें आनन्द प्रदान करता है। अब पिता की दाहिनी ओर एक मानव शरीर, पहली बार, येसु का शरीर बैठा है, इस रहस्य में हम प्रत्येक जन हमारे भावी लक्ष्य को देखते हैं। यह बिलकुल ही छोड़ दिया जाना नहीं है क्योंकि येसु शिष्यों के साथ, हमारे साथ नये रूप में हमेशा रहते हैं, वे प्रार्थना में हमारे साथ रहते हैं क्योंकि वे एक मनुष्य के रूप में पिता से प्रार्थना करते हैं तथा ईश्वर के रूप में घावों को दिखाते हैं, जिनसे उन्होंने मुक्ति प्रदान की है। येसु की प्रार्थना वहीं हमारे हाड़-मांस के साथ है। वे हममें से एक हैं, ईश-मानव, हमारे लिए प्रार्थना करते हैं।"

येसु की प्रतिज्ञा

यह हमें एक सुरक्षा प्रदान करता है सबसे बढ़कर एक आनन्द, एक महान आनन्द।  आनन्द का दूसरा कारण है उनकी प्रतिज्ञा। उन्होंने कहा है, मैं तुम्हें पवित्र आत्मा प्रदान करूँगा। और पवित्र आत्मा के साथ, ठीक विदाई के समय आदेश देते हैं। “संसार के कोने-कोने में जाकर, सारी सृष्टि को सुसमाचार सुनाओ” (15) पवित्र आत्मा ही संसार में सुसमाचार प्रचार करने के लिए प्रेरित करते हैं। उस दिन येसु ने जिस पवित्र आत्मा की प्रतिज्ञा की, नौ दिनों बाद पेंतेकोस्त में उतर आयेगा। पवित्र आत्मा ने ही संभव बनाया है कि आज हम इस स्थिति में हैं। यह एक महान आनन्द है कि येसु प्रथम मानव हैं जो ईश्वर के पास गये हैं। वे घावों के साथ गये जो हमारी मुक्ति की कीमत है और हमारे लिए प्रार्थना करते हैं। उसके बाद पवित्र आत्मा भेजते हैं। सुसमाचार प्रचार करने हेतु वे पवित्र आत्मा प्रदान करने की प्रतिज्ञा करते हैं। यही कारण है कि आज का आनन्द, स्वर्गारोहण का आनन्द बहुत बड़ा है।"

पुनर्जीवित प्रभु का साहसपूर्वक साक्ष्य देने में मदद

भाइयो एवं बहनो, स्वर्गारोहण के इस पर्व में जब हम स्वर्ग पर चिंतन कर रहे हैं जहाँ येसु चढ़े एवं पिता की दाहिनी ओर बैठे हैं माता मरियम स्वर्ग की रानी से प्रार्थना करें कि वे हमें इस दुनिया में ठोस जीवन द्वारा पुनर्जीवित प्रभु का साहस पूर्वक साक्ष्य देने में सहायता दे।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया। 

स्वर्ग की रानी प्रार्थना के पूर्व संत पापा का संदेश
16 May 2021, 15:55

दूत-संवाद की प्रार्थना एक ऐसी प्रार्थना है जिसको शरीरधारण के रहस्य की स्मृति में दिन में तीन बार की जाती है : सुबह 6.00 बजे, मध्याह्न एवं संध्या 6.00 बजे, और इस समय देवदूत प्रार्थना की घंटी बजायी जाती है। दूत-संवाद शब्द "प्रभु के दूत ने मरियम को संदेश दिया" से आता है जिसमें तीन छोटे पाठ होते हैं जो प्रभु येसु के शरीरधारण पर प्रकाश डालते हैं और साथ ही साथ तीन प्रणाम मरियम की विन्ती दुहरायी जाती है।

यह प्रार्थना संत पापा द्वारा रविवारों एवं महापर्वों के अवसरों पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में किया जाता है। देवदूत प्रार्थना के पूर्व संत पापा एक छोटा संदेश प्रस्तुत करते हैं जो उस दिन के पाठ पर आधारित होता है, जिसके बाद वे तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हैं। पास्का से लेकर पेंतेकोस्त तक देवदूत प्रार्थना के स्थान पर "स्वर्ग की रानी" प्रार्थना की जाती है जो येसु ख्रीस्त के पुनरूत्थान की यादगारी में की जाने वाली प्रार्थना है। इसके अंत में "पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा की महिमा हो..." तीन बार की जाती है।

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