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माइक ए. मेयर स्टेडियम में 200 मीटर की दौड़ लगाते एथलीट माइक ए. मेयर स्टेडियम में 200 मीटर की दौड़ लगाते एथलीट  (USA TODAY Sports)

वाटिकन एथलीट खेलजगत में बंधुत्व संस्कृति को जारी रखें, संत पापा

संत पापा फ्राँसिस ने अंतर्राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर वाटिकन एथलीटों को खेल की दुनिया में एक बंधुत्व संस्कृति को फैलाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार 7 अप्रैल 2021 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्रांसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर वाटिकन के प्रेरितिक निवास की पुस्तकालय से सभी लोगों को संबोधित कर कहा, ʺकल, संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्थापित विकास और शांति का अंतर्राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया गया। मुझे उम्मीद है कि यह विभिन्न संस्कृतियों और लोगों के माध्यम से संवाद को बढ़ावा देने के लिए एक टीम प्रोग्राम के रूप में खेल के अनुभव को एक बार फिर से प्रस्ताव में स्थापित कर सकेगा।ʺ

आगे संत पापा ने कहा, ʺइस परिप्रेक्ष्य में, मैं खुशी से वाटिकन एथलीटों को खेल की दुनिया में एक बंधुत्व संस्कृति को फैलाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करता हूँ। जो सबसे कमजोर हैं, उन पर ध्यान दें, इस प्रकार आप शांति का गवाह बनेंगे।ʺ

वाटिकन एथलीट टीम

परमधर्मपीठ ने इतालवी ओलम्पिक समिति (सीओएनआई) द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद जनवरी 2019 में अपनी आधिकारिक एथलीट टीम लॉन्च की। एथलीटों की टीम में धर्मबहनें, पुरोहित, स्विस गार्ड, संग्रहालय कार्यकर्ता, बढ़ई और रख-रखाव कार्यकर्ता शामिल हैं।

अंतर्राष्ट्रीय खेल दिवस

विदित हो कि समाज में खेल की महत्ता को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा ने 2013 में एक प्रस्ताव पारित करके 2014 से 6 अप्रैल (जिस दिन आधुनिक ओलंपिक खेलों का आरंभ हुआ) को खेलों के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस घोषित कर दिया है। इसका उद्देश्य खेल के माध्यम से विकास और शांति को बढ़ावा देना  है।

खेल एक ऐसा माध्यम है जो किसी भी तरह के भेदभाव को दूर करता है। 1958-1960 के दौरान रंगभेद की नीति का विरोध खेलकूद ने सबसे प्रभावी तरीके से ऐसी नीति अपनाने वालों के विरुद्ध किया। इसकी वजह से 1960 से लेकर 1991 तक ऐसे कई देश, कई खिलाड़ी हुए जिनको विभिन्न देशों, समुदायों के लोगों ने स्वीकार नहीं किया। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला को करीब 28 वर्षों तक जेल में ही रहना पड़ा। इस तरह की समस्या से जूझने की ताकत दुनियां के कई लोगों को खेल और खिलाडिय़ों ने दिया। आज के समय में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक परिषद रंग, वर्ण, शारीरिक बनावट आदि के भेदभाव को दूर करने में सफल रही है।

 

07 April 2021, 14:58