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फिलीपींनी कलीसिया के 500 साल पूरा होने के उपलक्ष्य में धन्यवादी ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा फ्रांसिस फिलीपींनी कलीसिया के 500 साल पूरा होने के उपलक्ष्य में धन्यवादी ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा फ्रांसिस  (ANSA)

फिलीपीनी कलीसिया की 500वीं सालगिराह पर संत पापा का ख्रीस्तीयाग

संत पापा फ्रांसिस ने फिलीपीन्स में ख्रीस्तीयता की 500वीं वर्षगाँठ के अवसर पर रोम में फिलीपीनी समुदाय के संग धन्यावदी मिस्सा का अनुष्ठान करते हुए उन्हें येसु ख्रीस्त के शिष्यों की भांति अपने कार्यों को जारी रखने के लिए निष्ठा को नवीकृत करने का आहृवान किया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन रेडियो, रविवार, 14 मार्च 2021(रेई)  संत पापा ने संत पेत्रुस के महागिरजाघर में मनिला के पूर्व महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल अंतोनियो ताग्ले और फिलीपीनी प्रतिनिधियों के संग दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र में ईसाई धर्म के प्रचार की 500वीं वर्षगाँठ के अवसर पर यूखरिस्तीय बलिदान अर्पित किया।

प्रेरितिक शिष्य

संत पापा ने अपने मिस्सा प्रवचन में कहा कि फिलीपीन्स के लोगों ने सदियों पहले ईश्वर के सुसमाचार की खुशी को अपने में स्वीकार किया। “यह खुशी लोगों में स्पष्ट रुप से देखी जा सकती है।” उन्होंने कहा, “हम इस खुशी को उनकी आंखों, चेहरों, उनके गीतों और प्रार्थनाओँ में देखते हैं। मैं आप को इस खुशी को सारे ख्रीस्तीय समुदाय में प्रसारित करने के लिए धन्यावाद देता हूँ।”

फिलीपीनी लोगों के विश्वास और मेहनती जीवन की प्रशंसा करते हुए संत पापा ने उन्हें उसे अपने सुसमाचार प्रचार के कार्यों में और अधिक पुख्ता बनाये रखने को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि ईश्वर की निकटता को हमें दूसरों के लिए सदैव घोषित करने की जरुरत है जिससे कोई न खोये।

फिलीपीन्स में कलीसिया की 500वीं वर्षगाँठ की यादगारी मनाते हुए संत पापा ने सभी फिलीपीनों से आग्रह किया कि वे येसु ख्रीस्त के प्रेरितिक शिष्यों के रुप में साहस से साथ अपने जीवन में आगे बढ़ें। “आप अपने जीवन के द्वारा प्रेम और सेवा के माध्यम से सुसमाचार का साक्ष्य देने से न डरें। अपनी खुशी के द्वारा आप लोगों को यह घोषित करने में मदद करें कि माता कलीसिया विश्व को कितना प्रेम करती है।”

येसु हमारी खुशी के स्रोत

चालीसा के चौथे रविवार हेतु लिए गये सुसमाचार पर अपने चिंतन व्यक्त करते हुए संत पापा फ्रांसिस ने कहा,“ ईश्वर ने संसार को इतना प्यार किया कि उन्होंने अपने एकलौटे पुत्र को अर्पित कर दिया, (यो.3.16) यह हमारे लिए सुसमाचार का केंन्द्र-विन्दु है।” यह सुसमाचार का संदेश कोई विचार या सिद्धांत नहीं बल्कि स्वयं येसु ख्रीस्त हैं।

“हमारी खुशी का स्रोत कोई एक सुन्दर सिद्धांत में निहित नहीं है लेकिन यह अपने पूरे जीवन में प्रेम किया जाने और उस प्रेम में आगे बढ़ने की अनुभूति है।” संत पापा ने सुसमाचार के आधार पर दो बातों पर जोर दिया, “ईश्वर का अतुल्य प्रेम” और “ईश्वर ने दिया”

ईश्वर का अतुल्य प्रेम

संत पापा ने कहा कि ईश्वर हमें अतुल्य प्रेम के कारण हमें खोजने आये, जब हम अपने में खोये हुए थे, इस भांति वे हमें अपने गिरे हुए पापमय स्थिति से ऊपर उठाते हैं। “वे हमें सदा अपनी प्रेमभरी निगाहों से देखते हैं और अपने प्रेम के कारण वे शरीरधारण कर बेटे के रुप में हमारे बीच रहते हैं।” येसु ख्रीस्त में ईश्वर हमारे जीवन में रहते हैं, वे हमें कहते हैं कि तुम नहीं खोये हो, तुम प्रेम किये जाते हो, सदैव प्रेम किये जाते हो।

उन्होंने कहा कि कभी-कभी हम अपने में उदास, गुमसुम और अपने ही सोच में खोये रहते हैं यद्यपि ऐसी परिस्थिति में भी सुसमाचार हमारे हृदय को बड़ा करता और हमें ईश्वर के तथ्य को समझने में मदद करता है कि ईश्वर हमें बेइंतहा प्रेम करते हैं।

ईश्वर देते हैं

संत पापा ने ईश्वर के प्रेमपूर्ण कार्य पर चिंतन करते हुए कहा, “ईश्वर ने अपने पुत्र को हमारी मुक्ति के लिए दिया।” प्रेम हमें अपने आप से बाहर जाने हेतु मदद करता है और अपने को पूरी तरह देने की सोचता है। उन्होंने कहा, “यह प्रेम की शक्ति है।” यह हमारे स्वार्थ के कवच को तोड़ता, हमारे सुरक्षित ढ़ाचें को तोड़ता, दीवारों को गिराता और भय पर विजय होता है जिसे यह स्वतंत्र रूप में अपने को दे सके। येसु ख्रीस्त में ईश्वर का प्रेम हमारे लिए अति महान है जहां वे अपने को हमें दिये बिना नहीं रह सकते हैं।

स्वयं को देने में आनंद 

संत पापा ने कहा कि हम प्रेम करनेवालों में देखते हैं कि जितना वे एक-दूसरे से प्रेम करते, उतना ही वे अपने को दूसरों के लिए देने को तैयार रहते हैं। उन्होंने कहा कि कभी-कभी हम अपनी महिमा में खुशी को खोजने की कोशिश करते हैं या भौतिक वस्तुओं की सुरक्षा में झूठी खुशी को पाना चाहे हैं।

सच्ची खुशी हमें अपने को निस्वार्थ रुप में देने में मिलती है जैसे कि ईश्वर ने इसे अपने बेटे को हमारे देते हुए साक्ष्य दिया है। “जीवन हमें इस बात की शिक्षा देता है कि हम अपने में निःस्वार्थ रुप में प्रेम किये जाने का अनुभव करते हैं।” अपने प्रवचन के अंत में संत पापा ने कहा कि यह हमें इस बात का एहसास दिलाता है कि हम अकेले नहीं हैं, हमारे साथ कोई है जो हमारे सपनों को साझा करता है, जब हमारे जीवन के टूटे क्षणों से हो कर गुजरते तो वे हमारी सहायता के लिए आते और हमें तट तक सुरक्षित लेकर जाते हैं।

15 March 2021, 09:59