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बगदाद के सिरो काथलिक महागिरजाघर, आवर लेडी ऑफ साल्वेशन में धर्मसमाजियों से मुलाकात करते संत पापा फ्राँसिस बगदाद के सिरो काथलिक महागिरजाघर, आवर लेडी ऑफ साल्वेशन में धर्मसमाजियों से मुलाकात करते संत पापा फ्राँसिस 

इराक के धर्माध्यक्षों, पुरोहितों, धर्मसमाजियों, गुरूकुल छात्रों व प्रचारकों को संदेश

संत पापा फ्राँसिस ने इराक की प्रेरितिक यात्रा में 5 मार्च को बगदाद के मुक्ति की हमारी माता मरियम के महागिरजाघर में इराक के धर्माध्यक्षों, पुरोहितों, धर्मसमाजियों, गुरूकुल छात्रों एवं प्रचारकों से मुलाकात की तथा उन्हें इराक की प्रेरिताई में धीर बने रहने का प्रोत्साहन दिया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

इराक, शुक्रवार, 5 मार्च 2021 (रेई)- संत पापा ने उन्हें सम्बोधित कर कहा, "मैं पितातुल्य स्नेह से आप सभी का आलिंगन करता हूँ। मैं प्रभु के प्रति कृतज्ञ हूँ जिन्होंने अपनी कृपा से आज हमारी मुलाकात को संभव बनाया है।"

उन्होंने कहा, "धर्माध्यक्षों और पुरोहितों, धर्मसमाजियों, प्रचारकों एवं लोकधर्मियों के रूप में आप सभी, ख्रीस्त के विश्वासियों के आनन्द और दुःख, आशाओं एवं चिंताओं में सहभागी होते हैं। ईश प्रजा की आवश्यकताएँ और कठिन प्रेरितिक चुनौतियाँ जिनका आप प्रतिदिन सामना करते हैं, इस समय की महामारी से बढ़ गईं हैं।" संत पापा ने कहा कि फिर भी यह उनके प्रेरितिक उत्साह को रोक नहीं सकता जिसका मूल इस भूमि की कलीसिया में शुरू समय से ही है।

निरूत्साह के वायरस के लिए आशा की वैक्सिन

निरूत्साह के वायरस से संक्रमित होना कितना आसान है जो कभी-कभी हमारे चारों ओर फैला हुआ प्रतीत होता है। किन्तु प्रभु हमें उस वायरस से मुक्त करने के लिए प्रभावशाली वैक्सिन देते हैं। यह आशा की वैक्सिन है जो दृढ़ प्रार्थना और हमारी प्रेरिताई के प्रति प्रतिदिन की निष्ठा से उत्पन्न होती है। इस वैक्सिन के द्वारा हम नवीकृत शक्ति से आगे बढ़ सकते हैं जिससे कि हम पवित्रता, न्याय और शांति रूपी ईश्वर के राज्य की उपस्थिति के जीवित चिन्ह एवं मिशनरी शिष्य के रूप में सुसमाचार के आनन्द को बांट सकें। संत पापा ने सुसमाचार प्रचार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि हमारे आसपास की दुनिया को यह संदेश सुनना कितना आवश्यक है। हम कभी न भूलें कि ख्रीस्त की घोषणा सबसे बढ़कर सुसमाचार के आनन्द से परिवर्तित जीवन के द्वारा किया जा सकता है।

कलीसिया की दयनीय स्थिति

देश की कलीसिया के इतिहास पर नजर डालते हुए संत पापा ने कहा कि इस भूमि की कलीसिया का येसु में जीवित विश्वास अत्यन्त प्रभावशाली है जो दुनिया को बदल सकता है। कठिनाइयाँ इराक के विश्वासियों के दैनिक अनुभव का हिस्सा है। पिछले दशकों में आप और आपके सह नागरिकों ने युद्ध और अत्याचार का सामना किया, आधारभूत संरचनाओं की दुर्बलता तथा आर्थिक एवं व्यक्तिगत सुरक्षा की कमी से संघर्ष झेला जिसने उन्हें आंतरिक विस्थापन एवं विभिन्न देशों में पलायन करने के लिए मजबूर किया है।

धर्मसमाजियों की उदारता

संत पापा ने धर्माध्यक्षों एवं पुरोहितों को धन्यवाद दिया जो अपने लोगों के संघर्ष में उनके करीब रहे, उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रयास किया एवं सार्वजनिक भलाई हेतु अपनी भूमिका अदा करने में उनकी मदद की। स्थानीय कलीसियाओं के शैक्षणिक और उदार प्रेरितिक कार्य, कलीसियाई एवं सामाजिक दोनों क्षेत्रों में जीवन के समृद्ध स्रोत को दिखलाते हैं। संत पापा ने उन्हें प्रोत्साहन दिया कि वे इन प्रयासों में प्रयत्नशील रहें ताकि इराकी काथलिक समुदाय छोटा होने पर भी सुदृढ़ रह सके एवं पूरे समाज के जीवन को समृद्ध करता रहे।            

ख्रीस्त का प्रेम हमारा आह्वान करता है कि हम हर प्रकार के आत्म केंद्रीकरण या प्रतियोगिता से दूर रहें, सर्वभौमिक एकता से प्रेरित हों तथा भाइयों एवं बहनों के समुदाय का निर्माण करें, जो एक दूसरे का स्वागत एवं देखभाल करता है।

भ्रातृत्व पूर्ण एकता का साक्ष्य

संत पापा ने विभिन्न कलीसियाओं की तुलना दरी से की, जो अपने विभिन्न ऐतिहासिक, धर्मविधिक एवं आध्यात्मिक विरासत के रंगीन धागों से एक सुन्दर दरी का निर्माण करती हैं। ईश्वर स्वयं एक शिल्पकार हैं जिन्होंने इस कालीन की कल्पना की है, इसे बुना और सावधानी से इसमें धागा भरा है। चाहते है कि हम उनके बेटे बेटियों की तरह  बारीकी से बुने हुए रहें। अंतियोख के संत इग्नासियुस की सलाह की याद दिलाते हुए संत पापा ने कहा, "आप सभी के बीच कोई ऐसी चीज न हो जो आपको विभाजित करे...बल्कि प्रेम और आनन्द में आप एक प्रार्थना, एक मन और एक आशा के साथ रहें।" विभाजन से टूटे और बिखरे विश्व में भ्रातृत्व पूर्ण एकता का साक्ष्य देना कितना महत्वपूर्ण है। कलीसियाई, पल्ली और धर्मप्रांतीय समुदायों एवं संस्थाओं के बीच सेतु के निर्माण का हर प्रयास, इराक की कलीसिया में नबी के कार्य और येसु की प्रार्थना कि वे सब एक हो जाएँ, का फलप्रद जवाब हो।   

गलतफहमी एवं तनाव कैसे दूर करें                

कलीसिया के मिशन में धर्माध्यक्ष, विश्वासी, पुरोहित, धर्मसमाजी एवं प्रचारक अलग अलग तरीके से अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं, जिससे कभी कभी गलतफहमी एवं तनाव उत्पन्न हो सकते हैं, ये ऐसे गाँठ हैं जो भाईचारा के मनोभाव में बाधा उत्पन्न करते हैं। उन गाँठों को हम अपने में ढोकर चलते हैं क्योंकि, आख़िरकार, हम सभी पापी हैं। ये गाँठ कृपा द्वारा खोले जा सकते हैं, एक महान प्रेम द्वारा क्षमाशीलता के मशीन में, भ्रातृत्वपूर्ण वार्तालाप, धीरज पूर्वक एक-दूसरे का भार वहन करने और परीक्षा एवं कठिनाई की घड़ी में एक-दूसरे को सहारा देकर ढीले किये जा सकते हैं।

धर्माध्यक्षीय प्रेरिताई की सलाह

संत पापा ने धर्माध्यक्षों को खास रूप से सम्बोधित कर कहा, "मैं हमारी धर्माध्यक्षीय प्रेरिताई को सामीप्य के रूप में सोचता हूँ, प्रार्थना में ईश्वर से जुड़े रहने, देखभाल की जिम्मेदारी के साथ विश्वासियों के करीब रहने और हमारे पुरोहितों के निकट रहने की आवश्यकता के रूप में, खासकर, अपने पुरोहितों के निकट। हम आपको एक प्रशासक या प्रबंधक के रूप में न देखें बल्कि एक सच्चे पिता, उनके कल्याण के शुभचिंतक, खुले हृदय से अपना समर्थन एवं प्रोत्साहन देने के लिए तैयार रूप में देख सकें। अपनी प्रार्थना, अपने समय, उनके कार्यों के लिए सराहना एवं उनके विकास के लिए अपने प्रयास के द्वारा उनका साथ दें। इस तरह आप अपने पुरोहितों के लिए भले चरवाहे येसु के आदर्श एवं दृश्यमान चिन्ह बनेंगे जो अपनी भेड़ों को जानते एवं उन्हें जीवन देते हैं।(यो. 10:14-15)

धर्मसमाजी ईश वचन के प्रकाश में जीयें

संत पापा ने सभी पुरोहितों, धर्मसमाजियों, प्रचारकों एवं गुरूकुल छात्रों को सम्बोधित कर कहा कि उन्होंने अपने हृदय में प्रभु की आवाज सुनी और युवा सामुएल की तरह उसका प्रत्युत्तर दिया है, उसे हर दिन नवीकृत करें जो साहस और उत्साह के साथ सुसमाचार को बांटने में मदद देगा। हम हमेशा ईश वचन के प्रकाश में जीयें और चलें जो हमारे लिए एक वरदान एवं जिम्मेदारी है कि हम उसका प्रचार करें। यह महत्वपूर्ण है कि हम अपने झुण्ड के बीच जायें और हमारे शहरों एवं गाँवों में विश्वासियों को हमारी उपस्थिति एवं सहचर्य का उपहार दें। मैं उन लोगों की विशेष चिंता करता हूँ जो पीछे छूटने के खतरे में हैं, खासकर, युवा, बुजूर्ग, बीमार एवं गरीब। जब हम समर्पण के साथ हमारे पड़ोसियों की सेवा करते हैं, हम सचमुच येसु की सेवा करते हैं जैसा कि उन्होंने हमें बतलाया है। (मती. 25:40) और दूसरों में येसु की सेवा करते हुए हम सच्चा आनन्द प्राप्त करते हैं, अतः अपनी जन्म भूमि में ईश्वर की पवित्र प्रजा से कभी पीछे न हटें। अपनी माताओं और दादियों की याद करें जैसा कि संत पौलुस कहते हैं उन्होंने आपको विश्वास में बढ़ाया है। (2 तिमथी 1:5) लोगों के चरवाहे, उनके सेवक बनें न कि सिविल अधिकारी। हमेशा ईश प्रजा के अंग बनें, विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग के समान उनसे अलग कभी न हों।

हिंसा या रक्तपात को उकसाना सच्ची धार्मिक शिक्षा नहीं

महागिरजाघर में आतंकी हमला के शिकार भाई बहनों की याद कर संत पापा ने कहा, "मैं उन भाई बहनों की पुनः याद करता हूँ जो करीब 10 साल पहले इस महागिरजाघर में आतंकी हमला के शिकार हुए और जिनकी संत घोषणा की प्रक्रिया जारी है। उनकी मृत्यु जोरदार याद दिलाती है कि युद्ध, घृणा की भावना, हिंसा या रक्तपात को उकसाना सच्ची धार्मिक शिक्षा के असंगत है।"

मैं उन सभी लोगों की याद करता हूँ जो हिंसा एवं अत्याचार के शिकार हुए हैं चाहे वे किसी भी धर्म के क्यों न हों। कल मैं ऊर में, देश के विभिन्न धार्मिक परम्पराओं के धार्मिक नेताओं से मुलाकात करूँगा, ताकि हमारी धारणा को पुनः घोषित किया जा सके कि धर्म को ईश्वर के बच्चों के बीच शांति एवं एकता की सेवा करनी चाहिए। संत पापा ने उनके समुदायों में शांति के उनके प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया।

इराक के युवाओं के लिए संत पापा की चिंता

तब संत पापा ने युवाओं की याद की। उन्होंने कहा, "युवा सभी जगह प्रतिज्ञा एवं आशा के चिन्ह हैं किन्तु खास रूप से इस देश के लिए।" युवा आपके खजाने हैं, उन्हें आपकी देखरेख की जरूरत है, उनके स्वप्नों को पोषित करने की, उनके विकास में साथ देने की और उनकी उम्मीद बढ़ाने की। यद्यपि वे छोटे हैं तथापि उनका धैर्य इन वर्षों के संघर्ष से पक्का हो गया है। हम इसे न भूलें। बुजूर्गों के साथ वे भी देश के हीरे हैं, पेड़ के सर्वोत्तम फल हैं। यह हमारा कर्तव्य है कि हम उन्हें अच्छाई में बढायें एवं आशा के साथ विकसित करें।

प्रभु की महानता की घोषणा

संत पापा ने धर्मसमाजियों से कहा, "सबसे पहले अपने बपतिस्मा और दृढ़ीकरण से और बाद में अपने अभिषेक एवं धर्मसंघी व्रत के द्वारा, आप प्रभु को समर्पित हैं और मिशनरी शिष्य के रूप में इस भूमि में भेजे गये हैं ताकि आप मुक्ति इतिहास से करीबी से जुड़ें। जब आप नये भविष्य के निर्माण की कोशिश कर रहे हैं आप इतिहास के हिस्से हैं और ईश्वर की प्रतिज्ञा के विश्वस्त साक्षी। आपका साक्ष्य, प्रतिकूल परिस्थितियों में और शहीदों के खून से सुदृढ़ हो, इराक में और इससे बाहर एक चमकदार रोशनी बनें और प्रभु की महानता की घोषणा करे और यह लोगों की आत्मा को हमारे उद्धारकर्ता में आनन्दित करे।

संत पापा ने उन्हें धन्यवाद दी तथा मुक्ति की माता मरियम एवं प्रेरित संत थॉमस की मध्यस्थता द्वारा प्रार्थना की कि वे हमेशा उनकी रक्षा करें। संत पापा ने उन्हें तथा उनके समुदायों को अपना आशीर्वाद दिया।

05 March 2021, 15:46