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इराक में संत पापा की प्रेरितिक यात्रा का पोस्टर इराक में संत पापा की प्रेरितिक यात्रा का पोस्टर  (AFP or licensors)

इराक से संत पापा ˸ मैं शांति तीर्थयात्री स्वरुप आ रहा हूँ

संत पापा फ्राँसिस ने इराक की प्रेरितिक यात्रा के पूर्व इराक के लोगों को एक वीडियो संदेश भेजकर, उन्हें शांति, भाईचारा एवं सांत्वना का संदेश दिया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

इराक, बृहस्तिवार, 4 मार्च 2021 (रेई)- जब संत पापा फ्रांसिस की इराक में 5 - 8 मार्च की प्रेरितिक यात्रा की तैयारी अंतिम चरण में है, संत पापा ने बृहस्पतिवार को अपने इराक पहुँचने से पहले एक संदेश भेजा जिसमें उन्होंने अपनी खुशी व्यक्ति की है कि अंततः वे उनके बीच शारीरिक रूप से उपस्थित होने जा रहे हैं।

उन्होंने वीडियो संदेश में कहा, "इराक के प्यारे भाइयो एवं बहनो, आपको शांति मिले" कुछ ही समय बाद, आखिरकार, मैं आपके बीच होऊंगा। मैं आपसे मिलना चाहता हूँ, आपके चेहरों को देखना चाहता हूँ और आपकी भूमि का दौरा करना चाहता हूँ जो पुरानी और सभ्यता की असाधारण पालना है।"

संत पापा फ्रांसिस की यह यात्रा उनके पूर्वाधिकारी संत पापा जॉन पौल द्वितीय के स्वप्न को साकार करना है जिन्होंने 1999 में इराक यात्रा की योजना बनायी थी किन्तु उसे पूरा नहीं कर सके थे। संत पापा की चार दिवसीय यात्रा में कई शहर शामिल हैं, साथ ही साथ, वे वहाँ के ख्रीस्तीय समुदायों एवं विभिन्न धार्मिक नेताओं के साथ कई मुलाकातें करेंगे।

शांति और मेल-मिलाप के पश्चातापी तीर्थयात्री

संत पापा ने संदेश में कहा, "मैं एक तीर्थयात्री के रूप में आ रहा हूँ, एक पश्चातापी तीर्थयात्री के रूप में, प्रभु से क्षमा मांगने और मेल-मिलाप करने, वर्षों तक युद्द एवं आतंकवाद के बाद ईश्वर से हृदयों को सांत्वना और घावों की चंगाई की याचना करने आ रहा हूँ।"  

युद्ध, असुरक्षा और उत्पीड़न से चिह्नित हाल के दशकों में इराक में ख्रीस्तीय समुदायों की संख्या घट कर तीन से चार लाख के करीब  हो गई है जबकि यह संख्या 2003 में 1 से 1.4 मिलियन के बीच थी।

उन्होंने कहा, "मैं आपके बीच एक शांति के तीर्थयात्री के रूप में आ रहा हूँ इस बात को दोहराने के लिए कि आप सभी भाई और बहन हैं।"

"जी हाँ, मैं शांति के तीर्थयात्री स्वरूप भाईचारा की तलाश करने आ रहा हूँ, एक साथ प्रार्थना करने और चलने की प्रेरणा से, बल्कि दूसरे धार्मिक परम्पराओं के भाई-बहनों के साथ मिलने से प्रेरित होकर, जो हमारे पिता अब्राहम के चिन्ह से अंकित हैं, जो मुस्लिम, यहूदी और ख्रीस्तियों को एक परिवार में लाते हैं।"

कठिन परिस्थिति में कलीसिया को सांत्वना 

संत पापा ने उन सभी ख्रीस्तियों की याद की है जिन्होंने कठिन परीक्षा के समय में येसु पर विश्वास का साक्ष्य दिया है, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की तथा उन्हें सांत्वना प्रदान की।    

उन्होंने कहा, "मैं आपको देखना चाहता हूँ। मैं एक शहीद कलीसिया से मिलने के लिए सम्मानित महसूस कर रहा हूँ। आपके साक्ष्य के लिए धन्यवाद।"   

संत पापा ने ध्वस्त किये गये घरों और अपवित्र किये गये गिरजाघरों की भी याद की जिनको कई इराकी समुदाय अपने मन में रखते हैं। उन्होंने प्रार्थना की कि उनके अनेक शहीद उन्हें प्रेम की विनम्र शक्ति में सुदृढ़ रहने में मदद करें। उन्होंने पूरी कलीसिया के प्रति अपना स्नेह प्रकट किया तथा प्रोत्साहन दिया कि वे आगे बढ़ते रहें।  

उन्होंने कहा, "आइये हम उस भयंकर पीड़ा के अनुभव को हावी होने न दें जो मुझे बहुत अधिक दुःख देता है। बुराई के सामने हम इसे न छोड़ दें।"

संत पापा ने इराक के लोगों को प्रोत्साहन देते हुए कहा, "प्यारे भाइयो एवं बहनो, आइये हम तारों को देखें, वहीं हमारे लिए प्रतिज्ञा है।"  

पीड़ा के बावजूद आशा

संत पापा ने उन सभी लोगों को अपना सामीप्य और आशा प्रदान की जिन्होंने वर्षों तक पीड़ा सही है किन्तु विचलित नहीं हुए।

उन्होंने इराक के सभी लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा, "मैं आपके धन्य और घायल भूमि में एक आशा के तीर्थयात्री स्वरूप आ रहा हूँ। आपके द्वारा निन्हवे में, जोना की भविष्यवाणी गूँज रही है, जिन्होंने विनाश को रोका और एक नई आशा, ईश्वर की आशा जगायी है।"  

पोप फ्रांसिस ने सभी को इस आशा से विभूषित होने के लिए प्रेरित किया, "जो हमें पुनर्निर्माण करने और फिर से शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करे" और एक-दूसरे के प्रति हमारे भ्रातृत्व की भावना को मजबूत करे और शांति का भविष्य बनाने में मदद दे, विशेषकर, कोविड-19 महामारी के समय में।"

संत पापा ने अपने संदेश के अंत में सभी लोगों पर ईश्वरीय आशीष की कामना की तथा अपनी यात्रा के लिए प्रार्थना द्वारा साथ देने का आग्रह किया।  

"मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ कि अब्राहम का अनुकरण करें, आशा में चलें और तारों को देखना कभी न छोड़ें।"

04 March 2021, 16:03