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इराक से रोम वापसी के रासते पर विमान में पत्रकारों से बात करते संत पापा फ्रांसिस इराक से रोम वापसी के रासते पर विमान में पत्रकारों से बात करते संत पापा फ्रांसिस 

विमान में पोप ˸ "परोपकार, प्रेम व बंधुत्व ही आगे बढ़ने के मार्ग हैं"

इराक में चार दिवसीय प्रेरितिक यात्रा के उपरांत रोम वापस लौटने समय विमान में संत पापा फ्रांसिस ने पत्रकारों से बातचीत में प्रेरितिक यात्रा की सबसे प्रमुख मील के पत्थर पर गौर किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

विमान, सोमवार, 8 मार्च 21 (रेई)- सोमवार को बगदाद से रोम के रास्ते पर विमान में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए संत पापा ने यात्रा के कुछ महत्वपूर्ण क्षणों की याद की, मोसुल में ध्वस्त गिरजाघरों के सामने अपनी भावनाओं एवं अनुभवों को साझा किया तथा लोबनान के प्राधिधर्माध्यक्ष कार्डिनल बेकारा राई से उनके देश की यात्रा के लिए अपने वादे को प्रकट किया।

अंतरधार्मिक वार्ता

पत्रकारों का पहला सवाल मुस्लिम जगत में विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों से मुलाकात से संबंधित था। दो सालों पहले उन्होंने अल अजहर के ग्रैंड ईमाम अल ताय्येब से मुलाकात की थी और उन्होंने उनके साथ विश्व बंधुत्व पर दस्तावेज में हस्ताक्षर किया। तीन दिन पहले उन्होंने शिया प्रमुख अयातोल्लाह अल सिस्तानी से मुलाकात की। तो क्या वे शिया इस्लाम के प्रतिनिधि से मुलाकात में उसी तरह का पूर्वानुमान देखते हैं?

संत पापा ने प्रकट किया कि अबू धाबी में फरवरी के दस्तावेज की तैयारी उन्होंने गुप्त रूप से, ग्रैंड इमाम अल ताय्यब के साथ 6 महीनों तक गहन चिंतन और प्रार्थना के साथ की थी।

एक तरह से, इराक में अयातोल्लाह के साथ इस मुलाकात को दूसरा चरण कहा जा सकता है। भाईचारा के रास्ते पर आगे बढ़ने के महत्व पर जोर देते हुए संत पापा ने कहा कि इसके दूसरे रास्ते होंगे।

उन्होंने कहा, "अबू धाबी के दस्तावेज को भाईचारा के लिए मुझमें एक बेचैनी के रूप में छोड़ दिया गया है और फ्रातेल्ली तूत्ती प्रकाशित किया गया है गौर करते हुए कि दोनों दस्तावेज एक ही दिशा में आगे बढ़ेंगे।"

शिया अयातोल्लाह द्वारा कहे गये एक वाक्य की याद करते हुए संत पापा ने कहा कि अल सिस्तानी ने धर्म में पुरूषों और महिलाओं को भाई और बहन कहा, सृष्टि में सभी को एक समान कहा और इसमें संस्कृति अपनी भूमिका अदा करती है।   

इस बात पर गौर करते हुए कि गहरी धारणाओं और दृढ़ विश्वासों की मानसिकता को बदलने के लिए सदियों लग गये, संत पापा ने कहा, "हमारा विश्वास हमें खोजने में मदद देता है कि येसु प्रेम और उदारता में प्रकट होते हैं जो मानव भाईचारा की ओर अग्रसर करता है।"

उन्होंने कहा, "यह महत्वपूर्ण है, मानव भाईचारा, कि हम सभी भाई और बहन हैं और हमें दूसरे धर्म मानने वालों के साथ मिलकर आगे बढ़ना है।"    

इस रास्ते पर आनेवाली आलोचनाओं पर प्रकाश डालते हुए संत पापा ने कहा कि "पोप काथलिक सिद्धांत के खिलाफ कदम उठा रहे हैं" कहा जाता है। उन्होंने कहा, "इसमें खतरा है किन्तु ये निर्णय हमेशा प्रार्थना, वार्ता, सलाह लेने और द्वितीय वाटिकन महासभा के अनुरूप लिये जाते हैं।"

लेबनान

पीड़ित देश लेबनान में प्रेरितिक यात्रा की संभावना पर सवाल पूछे जाने पर संत पापा ने प्रकट किया कि कार्डिनल बेकारा राई ने इस यात्रा के अंत में बेरट में पड़ाव डालने का आग्रह किया था। "किन्तु यह एक टुकड़ा के समान लगा...लेबनान जैसे पीड़ित देश की समस्या के सामने एक छोटा टुकड़ा।" उन्होंने कहा कि देश में प्रेरितिक यात्रा के लिए उन्होंने वादा किया है जो अपने संकट के वाबजूद उदारतापूर्वक शरणार्थियों का स्वागत कर रहा है।

अल सिस्तानी के साथ मुलाकात 'एक वैश्विक संदेश'

उसके बाद संत पापा ने उस सवाल का उत्तर दिया जिसमें उनसे अयातोल्लाह अल सिस्तानी से मुलाकात के बारे पूछा गया, और कि क्या यह इरान के धार्मिक नेताओं के लिए संदेश था?

संत पापा ने कहा, "मैं मानता हूँ कि यह एक विश्वव्यापी संदेश था। मैंने महसूस किया कि विश्वास एवं प्रायश्चित की तीर्थयात्रा करना और एक महान, बुद्धिमान एवं ईश्वर के व्यक्ति को देखना मेरा कर्तव्य था।"

संत पापा ने अयातोल्लाह को प्रज्ञा, विवेक, विनम्रता एवं सम्मान के व्यक्ति कहा और बतलाया कि वे उनके द्वारा स्वागत किये जाने पर सम्मानित महसूस किये।

उन्होंने कहा, "वे एक प्रकाश स्तम्भ हैं, और ये बुद्धिमान लोग सभी जगह हैं क्योंकि ईश्वर की प्रज्ञा पूरे विश्व में फैली है। जैसा कि संतों के साथ होता है जो न केवल वेदी पर स्थापित होते बल्कि कई संत हमारे ही बगल में रहते हैं जो किसी भी परिस्थिति में विश्वास को स्थिरता के साथ जीते हैं।" संत पापा ने कहा कि जब कलंक हैं यहाँ तक कि कलीसिया में भी, तब हम ऐसे लोगों का समर्थन करें जो भाईचारा के रास्ते की खोज करते हैं...हम ऐसे व्यक्ति अपने ही परिवार में पा सकते हैं, दादा या दादी के रूप में।    

इराक की यात्रा

इराक में अपनी यात्रा के बारे उन्होंने कहा कि यह कई बीजों से उत्पन्न हुई जिसमें "द लास्ट गर्ल" शीर्षक की किताब भी शामिल थी। जिसको नादिया मौराद ने याजिदियों के बारे लिखा है। यह मेरे निर्णय का बड़ा कारण था। इसने मेरे अंदर काम किया था।"

संत पापा ने स्वीकार किया कि 84 साल की उम्र होने के कारण इराक की यात्रा में उन्होंने बहुत अधिक थकान महसूस किया। उन्होंने यह भी प्रकट किया कि हंगरी में अंतरराष्ट्रीय यूखरिस्तीय कॉन्ग्रेस के समापन ख्रीस्तयाग में भाग लेना, देश की यात्रा नहीं थी, यह सिर्फ ख्रीस्तयाग में सहभाग होना था।

कोविड-19 और इराक की यात्रा

इराक में संत पापा के लिए आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने से कोविड-19 के संक्रमण बढ़ने के डर पर सवाल का उत्तर देते हुए संत पापा ने कहा कि यह निर्णय काफी प्रार्थना एवं चिंतन के बाद लिया गया था।

"हमने इराकी ख्रीस्तियों के साहस, उनकी गतिशीलता को देखा। हमने उन चुनौतियों को भी देखा जिनका सामना उन्होंने किया है, इस्लामिक स्टेट की हिंसा का भय, पलायन एवं विश्वास की गवाही, पूरे क्षेत्र में ख्रीस्तियों की कई चुनौतियाँ आदि।"

पलायन

संत पापा ने कहा कि इराक की यात्रा ने पलायन के मुद्दे पर अतिरिक्त चिंतन करने का अवसर दिया। संत पापा ने जोर दिया कि इराकी लोग जवान हैं और कई युवा इराकियों को अपना देश छोड़ना पड़ा है।

"पलायन एक दोहरा अधिकार है : पलायन नहीं करने का अधिकार और पलायन करने का अधिकार। इन लोगों के पास दोनों नहीं है क्योंकि विश्व ने इस सच्चाई पर ध्यान नहीं दिया है कि पलायन एक मानव अधिकार है और कि अक्सर आप्रवास को "आक्रमण" माना जाता है।"

संत पापा ने रविवार को एरबिल में मिस्सा के उपरांत एलेन कुर्दी के पिता से मुलाकात की। तीन साल के एलेन कुर्दी को 2015 में यूरोप में प्रवेश करने के प्रयास में तुर्की के तट पर मृत पाया गया था।  

उन्होंने कहा, "एलेन कुर्दी एक प्रतीक है। (...) एक ऐसा प्रतीक जो पलायन के दौरान मरनेवाले एक बालक से परे ˸ उस सभ्यता का प्रतीक है जो मर रही है।" उन्होंने गौर किया कि तत्काल उपायों की आवश्यकता है जिससे कि लोग अपने ही देशों में रोजगार पा सकें और उन्हें पलायन करना न पड़े, साथ ही साथ पलायन करने के अधिकार की रक्षा के लिए भी कदम उठाये जाने चाहिए।

संत पापा ने कहा कि राष्ट्रों को चाहिए कि वे विस्थापितों को स्वीकारें, उन्हें अपने साथ एकीकृत करें और बढ़ावा दें। संत पापा ने उन देशों की याद की, खासकर, लेबनान और जॉर्डन की जो लाखों शरणार्थियों के लिए अपनी सीमा के द्वार खोलते हैं।

सीरिया

इराक में अपनी ऐतिहासिक यात्रा के समान सीरिया जैसे अन्य मध्यपूर्वी देशों की प्रेरितिक यात्रा की संभवना के सवाल पर, संत पापा फ्रांसिस ने लेबनान की प्रेरितिक यात्रा का अपना वादा दुहराया किन्तु कहा कि उन्होंने प्यारे देश सीरिया की यात्रा की संभवना पर विचार नहीं किया है।  

कोविड-19 की सीमाएँ

संत पापा ने बतलाया कि महामारी के कारण लगाये गये प्रतिबंध को उन्होंने "कैदखाने" की तरह महसूस किया। उन्होंने जोर दिया कि अधिकारियों द्वारा लागू किये गये नियमों का सम्मान किया जाना चाहिए। पुनः यात्रा कर पाना फिर से जन्म लेने के समान है और उन्होंने कहा कि एक पुरोहित के रूप में उन्हें ईश्वर की प्रजा की सेवा करनी है और उनके करीब रहना है।

उन्होंने कहा, "कभी कभी मुझे डर लगता है कि हम कलीसिया के स्त्री-पुरूष, खासकर, हम पुरोहितों में, ईश्वर की प्रजा के लिए मुक्त उपस्थिति नहीं होती है जबकि वे ही हमें बचाते हैं।" उन्होंने विश्वासियों के साथ सम्पर्क बनाये रखने के महत्व पर जोर दिया।       

मानव पीड़ा

संत पापा ने पत्रकारों से बातचीत का समापन अपनी उस भावना पर चिंतन करते हुए किया, जिसको उन्होंने मोसुल शहर में गिरजाघरों के खंडहरों को देखते हुए महसूस किया था और किस तरह उनके मन में हथियारों की बिक्री एवं युद्ध की जड़ से जुड़ी जिम्मेदारी पर सवाल उठ रहे थे।

अंतरराष्ट्रीय नारी दिवस पर संत पापा ने उन लाखों लड़कियों और महिलाओं पर ध्यान दिया, जिन्हें मानव तस्करी का शिकार होना पड़ता है, जो युद्ध और गरीबी का सीधा परिणाम है। उन्होंने कहा कि विश्व के कुछ हिस्सों में महिलाएँ अब भी गुलाम हैं और हमें उससे लड़ना है, महिलाओं की प्रतिष्ठा के लिए संघर्ष करना है। वे ही हैं जो इतिहास को आगे ले चलती हैं, यह अतिशयोक्ति नहीं है और न ही मुबारकबाद क्योंकि आज विश्व महिला दिवस है।

09 March 2021, 10:50