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तस्करी के बिना अर्थव्यवस्था देखभाल की अर्थव्यवस्था है: संत पापा

मानव तस्करी के खिलाफ 7वें विश्व दिवस की प्रार्थना और चिंतन के लिए वीडियो-संदेश में,संत पापा फ्राँसिस ने देखभाल, साहस और न्याय को बढ़ावा देने के लिए एक ऐसे समाज के निर्माण करने को कहा जो मानव व्यक्ति को केंद्र में रखता है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 8 फरवरी 2021 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने 8 फरवरी मानव तस्करी के खिलाफ 7वें विश्व दिवस के दिन मानव तस्करी के खिलाफ काम करने वालों का अभिवादन करते हुए अपने वीडियो संदेश में कहा कि उन्हें खुशी है कि वे आज प्रार्थना के इस विश्व दिवस पर आध्यात्मिक रूप से एकजुट हैं, जिसका एक विशिष्ट उद्देश्य भी है: "तस्करी के बिना अर्थव्यवस्था।" इस वर्ष कई स्थानों में अंतरधर्मिक प्रार्थना की योजना बनाई गई है, इनमें से एक एशिया में भी है।

तस्करी के बिना अर्थव्यवस्था

संत पापा ने अपना संदेश उन सभी भली इच्छा रखने वाले सभी लोगों को समर्पित किया जो मानव तस्करी के खिलाफ खुद को प्रतिबद्ध करते हैं, अध्ययन करते हैं और मानव तस्करी का मुकाबला करते हैं। संत पापा ने उन सभी को याद किया जो  संत बखिता की तरह अपने जीवन में तस्करी की त्रासदी का अनुभव किया है।

संत पापा ने कहा, ʺयह दिन महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन हम तस्करी का मुकाबला करने वालों के लिए अपनी प्रार्थना करते हैं। हमारी प्रार्थना और जागरूकता हमेशा ठोस इशारों के साथ होनी चाहिए, जो सामाजिक मुक्ति के रास्ते को भी खोलती है। इसका लक्ष्य है कि प्रत्येक गुलाम व्यक्ति अपने स्वयं के जीवन का एक मुक्त नायक बने और आम भलाई के निर्माण का एक सक्रिय योगदान दे।ʺ

संत पापा ने कहा कि आज तस्करी के शिकार लोगों और एकीकरण और सामाजिक पुनर्निवेश की प्रक्रियाओं में साथ देने वाले लोगों का समर्थन करने के लिए प्रार्थना करने की आवश्यकता है। हमें प्रार्थना करने की आवश्यकता है जिससे कि हम मानवता और साहस के साथ उन लोगों से संपर्क करना सीखते हैं जो बहुत दर्द और निराशा में हैं। उन लोगों के लिए हम आशा बन सकें। प्रार्थना दिल को छूती है और ठोस कार्य करने के लिए प्रेरित करती है जो ईश्वर की शक्ति पर भरोसा करना जानते हैं।

संत बखिता

संत पापा ने आगे कहा कि संत बखिता का पर्व दिवस, विश्वास और प्रार्थना के इस आयाम की एक मजबूत याद दिलाती है: उसका साक्ष्य हमेशा जीवित और वर्तमान में रहता है! और यह तस्करी के शिकार लोगों, उनके परिवारों, उनके समुदायों पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान है। वे हमारी प्रार्थना के केंद्र हैं। संत बखिता हमें याद दिलाती हैं कि वे इस दिन के नायक हैं और यह कि हम सभी उनकी सेवा में हैं।

इसके बाद संत पापा ने आज के विषय "तस्करी के बिना अर्थव्यवस्था" पर अपने विचार एवं चिंतन साझा किया। संत पापा ने कहा कि पिछले 21 नवंबर को "फ्रांचेस्को की अर्थव्यवस्था" कार्यक्रम में भाग लेने वालों को संबोधित संदेश में अन्य विचार मिल सकते हैं।

1.देखभाल की अर्थव्यवस्था

देखभाल को लोगों, प्रकृति और जनहित के विकास के लिए उत्पादों और सेवाओं की पेशकश के रूप में समझा जा सकता है। एक अर्थव्यवस्था जो काम का ध्यान रखती है, रोजगार के अवसर पैदा करती है जो काम करने के घंटों को कम करके श्रमिक का शोषण नहीं करती है। कोविद महामारी ने श्रम शोषण की स्थितियों को और बढ़ा दिया है, नौकरियों के नुकसान ने पुनर्वास और सामाजिक सुदृढीकरण की प्रक्रिया में कई लोगों को तस्करी में ढकेल दिया है। "इन क्षणों में, जब सब कुछ खतम होने सा लगता है और निरंतरता खोने लगती है, हमें याद करना चाहिए कि हम दूसरों की नाजुकता के लिए जिम्मेदार हैं, जो एक सामान्य भाग्य की मांग करते हैं।" (सीएफ,फ्रातेल्ली तुत्ती 115) इसलिए देखभाल अर्थव्यवस्था का अर्थ है एकजुटता अर्थव्यवस्था: हम ठोस काम करते हैं जो एकजुटता के साथ संयुक्त है। हम आश्वस्त हैं कि एकजुटता, अच्छी तरह से प्रशासित, एक सुरक्षित और अधिक ठोस सामाजिक निर्माण को जन्म देती है।

2. बाजार नियमों के साथ एक अर्थव्यवस्था

तस्करी के बिना एक अर्थव्यवस्था बाजार नियमों के साथ एक अर्थव्यवस्था है जो कुछ लोगों के हितों को नहीं बल्कि  न्याय को बढ़ावा देती है और व्यक्तियों की तस्करी बाजारों के उदासीनता में नवउदारवादी पूंजीवाद के दृष्टिकोण में उपजाऊ जमीन मिलती है, जिसका उद्देश्य नैतिक सीमाओं के बिना, सामाजिक सीमाओं के बिना और पर्यावरणीय सीमाओं के बिना लाभ को अधिकतम करना है (सीएफ  फ्रातेल्ली तुत्ती, 210)। यदि इस तर्क का पालन किया जाता है, तो केवल फायदे और नुकसान की गणना होती है। विकल्प नैतिक मानदंडों के आधार पर नहीं बनाए जाते हैं। लोगों को देखकर विकल्प नहीं बनाए जाते हैं: लोग संख्याओं में से एक होते हैं और  उनका शोषण भी किया जाता है।

3. एक साहसी अर्थव्यवस्था

मानव तस्करी के बिना अर्थव्यवस्था- एक साहसी अर्थव्यवस्था है। आसान लाभ की तलाश में जोखिम भरे कार्यों की, बेईमानी के अर्थ में नहीं। यह वह साहस है जिसकी आवश्यकता है। यह धीरज के साथ निर्माण का दुस्साहस है, उस प्रोग्रामिंग का जो केवल अल्पकालिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि मध्यम और दीर्घकालिक लाभ के लिए और अधिक से अधिक लोगों का लाभ हो। रोजगार और सभ्य कामकाजी परिस्थितियों को बढ़ावा देने के साथ वैध लाभ को संयोजित करने का साहस। वर्तमान संकट जैसे गंभीर संकट के समय में लोगों को तस्करी से बचाने हेतु  इस साहस की अत्यंत आवश्यकता है।

अपने संदेश को समाप्त करते हुए संत पापा फ्राँसिस ने विश्वासियों को संत बखिता की मध्यस्ता से वर्तमान में तस्करी के शिकार सभी लोगों के लिए प्रार्थना करने हेतु आमंत्रित किया।

08 February 2021, 14:41