उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी
"आज भी महिलाएँ हिंसा की शिकार हो रही हैं। मनोवैज्ञानिक हिंसा, मौखिक हिंसा, शारीरिक हिंसा, यौन हिंसा।
यह हृदय-विदारक है कि कितनी महिलाएँ मार-पीट, अपमान एवं बलात्कार की शिकार हो रही हैं।
विभिन्न प्रकार के दुर्व्यवहार जिनको महिलाएँ सह रही हैं वे कायरतापूर्ण कृत्य हैं और पूरी मानवता का पतन है। सभी लोगों और सारी मानवता का।
पीड़ितों का साक्ष्य जो अपना मौन तोड़ने का साहस करती हैं, मदद की पुकार है जिसको अनदेखा नहीं किया जा सकता है।
हमें मुँह नहीं फेरना चाहिए।
आइये हम उन महिलाओं के लिए प्रार्थना करें जो हिंसा की शिकार हैं जिससे कि समाज उनकी रक्षा कर सके
और उनकी पीड़ाओं पर ध्यान दे सके एवं उन्हें सुन सके।"
