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आमदर्शन समारोह आमदर्शन समारोह  (ANSA)

आमदर्शनः हम सभी लोगों के लिए प्रार्थना करें, पोप

संत पापा फ्रांसिस ने अपने 10 फरवरी के बुधवारीय आमदर्शन समारोह में प्रार्थना की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए हर घड़ी प्रार्थना करने का आह्ववान किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 10 फरवरी 2021 (रेई)- संत पापा फ्रांसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर वाटिकन प्रेरितिक निवास की पुस्तकालय से सभों का अभिवादन करते हुए कहा, “प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात“।

हमने अपनी पिछली धर्मशिक्षा में इस बात को देखा कि कैसे ख्रीस्तीय धर्मविधि की प्रार्थना, हमें स्थिरता प्रदान करती है। आज हम इस बात पर गौर करेंगे कि कैसे धर्मविधि हमारे दैनिक जीवन के लिए सदैव जीवन का स्रोत बनती है, जिसके फलस्वरुप हम जीवन के मार्ग, अपने कार्यस्थलों में, परिवाहनों में भी ईश्वर के संग अपनी वार्ता जारी रखते हैं। वह जो प्रार्थना करता एक प्रेमी की तरह होता है, जो हमेशा अपने हृदय में अपने प्रेमी को धारण किये रहता जिसे वह प्रेम करता है।

ईश्वर की अनंत कृपा का एहसास

वास्तव में, हमारे लिए सारी चीजें ईश्वर से वार्ता का अंग बनती हैं, हमारे जीवन की हर खुशी, उनकी प्रंशसा का कारण बनती है, हर कठिनाई हमारे लिए एक अवसर होती, जहां हम सहायता की मांग करते हैं। प्रार्थना सदैव हमारे जवीन में सजीव बनी रहती है मानो वह अंगारा हो, यद्यपि वह मुंह से उच्चरित न भी हो। हर सोच चाहे वह अपने में स्पष्ट रुप से “अपवित्र” ही क्यों न हो प्रार्थना का स्वरुप हो सकती है। हम मानवीय बुद्धि में भी प्रार्थना की उपस्थित को पाते हैं, जो एक झरोखे स्वरुप रहस्यों की ओर झांक कर देखती, जिन्हें हम अपने जीवन के कदमों के रुप में आलोकित पाते, जो हमें अपने जीवन की सम्पूर्ण सच्चाई को समझने के योग्य बनती और हम उसके अनुरूप जीवनयापन करते हैं। इस रहस्य का चेहरा चिंतित या अशांत करनेवाला नहीं होता बल्कि यह ख्रीस्त का ज्ञान हमें आत्मविश्वासी बनाता यद्यपि हम चीजों को अपनी आखों से नहीं देखते और उन्हें अपनी बुद्धि से नहीं समझते हैं, लेकिन उस कुछ नहीं कि स्थिति में भी हम ईश्वर की अनंत कृपा का एहसास करते हैं। ख्रीस्तीय प्रार्थना मानव के हृदय में एक अजेय आशा उत्पन्न करती है, हम चाहें किसी भी अनुभूति से होकर जीवन में गुजरते हैं, ईश्वर का प्रेम उसे अच्छाई में बदल सकता है।

वर्तमान में प्रार्थना करना

काथलिक कलीसिया की धर्मशिक्षा इसके बारे में कहती है,“हम अपने जीवन के विशेष क्षणों में ईश वचनों को सुनते हुए और पास्का रहस्य में सहभागी होते हुए प्रार्थना करना सीखते हैं, बल्कि हमें अपने जीवन की हर घटना में प्रतिदिन ईश्वर का आत्मा प्राप्त होता है, जो हममें प्रार्थना के भाव जागृति करता है...। समय पिता ईश्वर के हाथों में है, जिनसे हमारी मुलाकात, अतीत या भविष्य में नहीं वरन वर्तमान समय में होती है” (2659)।

आज को छोड़कर हमारे लिए और कोई भी दूसरा समय अतिसुन्दर नहीं हो सकता जहाँ हम अपने को जीवित पाते हैं। संत पापा ने इस बात की ओर इंगित कराया कि बहुत से लोग हैं जो भविष्य को सोचते हुए जीवन व्यतीत करते लेकिन वर्तमान को देखना भूल जाते हैं। लोग सपनों में जीते और सच्चाई को भूल जाते हैं। वर्तमान सत्य है यह हमारे लिए वास्तविक है। हम वर्तमान समय में प्रार्थना करते हुए येसु से मुलाकात करते हैं। यह प्रार्थना है जो हमारे जीवन में परिवर्तन लाता है, हमारे क्रोध को शांत करता, प्रेम में बनाये रखता, हमारी खुशी दोगुनी करता और हमें क्षमा करने की शक्ति प्रदान करता है। कभी-कभी हमें ऐसा लगता है कि हम अपने में जीवित नहीं हैं बल्कि वह कृपा हममें क्रियाशील है जो हमें प्रार्थना द्वारा प्राप्त होती है। हम अपने में उस समय की याद करें, संत पापा ने कहा, “जब हम क्रोधित होते हैं, असंतुष्टि का अनुभव हममें कटुता का एहसास लाती है। ऐसे समय में हम कहें, “ईश्वर आप कहाँ हैं”  “मैं कहाँ हूँ”  और ईश्वर आप को सही बातों से भर देंगे और आप बिना नकारात्मक भाव से आगे बढ़ सकेंगे, क्योंकि प्रार्थना सदैव अपने में सकारात्मक होती है जो हमें आगे ले चलती है। प्रार्थना से शुरू किया हुआ दिन हमें अपने जीवन को साहस में जीने हेतु मदद करता है। इस भांति हम जिन मुसीबतों का सामना करते वे हमारी खुशी के मार्ग में चुनौतियाँ नहीं बल्कि ईश्वर से मिलन हेतु अवसर बनती है। वह जो ईश्वर के सानिध्य में रहता वह अपने जीवन में साहस, स्वतंत्रता और अधिक खुशी का अनुभव करता है।

मन-परिवर्तन के लिए प्रार्थना करना

संत पापा ने कहा कि आइए तब हम रोज दिन सबके लिए प्रार्थना करें। अपने शत्रुओं के लिए भी जिनके लिए येसु हमें प्रार्थना करने की सलाह देते हैं जैसे कि हम सुसमाचार में पाते हैं। हम उनके लिए भी प्रार्थना करें जिन्हें हम नहीं जानते हैं। प्रार्थना हमें ईश्वर के अथाह प्रेम से संयुक्त करता है। इससे भी बढ़कर उन लोगों के लिए प्रार्थना करें जो उदास हैं, जो अकेलेपन में रोते औऱ निराशा के शिकार हैं जिससे वे किस के द्वारा प्रेम किये जायें। प्रार्थना के द्वारा चमत्कार होता है और ख्रीस्तीय की प्रार्थना येसु की करूणा को व्यक्त करती है। उन्होंने करूणा भरी नजरों से भीड़ को देखा जो अपने में खोई हुए भेड़ के समान बिना चरवाहे के थे (मरकुस 6.34)। करूणा, कोमलता और निकटता येसु के कार्य करने की शैली है, हम उनके इन तीन गुणों को कभी न भूलें।

हम सभी पापी हैं, ईश्वर द्वारा प्रेम किये गये हैं

प्रार्थना गलतियों और पापों के बावजूद हमें दूसरों को प्रेम करने के योग्य बनाती है। व्यक्ति अपने कार्य से महत्वपूर्ण है और येसु इसे समझते और दुनिया को दोषी नहीं ठहराते वरन् उसे बचाते हैं। व्यक्ति जो दूसरों की निंदा शिकायत करते हुए सदैव दूसरों में दोष खोजने को लगा रहता उसका जीवन अपने में बुरा हो जाता है, वह अपने जीवन में नखुश रहता है। येसु हमें बचाने आते हैं अतः हम अपने हृदय को क्षमा, न्याय, समझ, दूसरों के निकट रहने, दूसरों के लिए करूणा और कोमलता हेतु खोलें, जैसे कि येसु ने किया। हमें यह याद करते हुए कि हम सभी पापी हैं हर किसी को प्रेम करने की आवश्यकता है, साथ ही यह याद करने की जरुरत है कि येसु हमें व्यक्तिगत रूप में प्रेम करते हैं। विश्व को कोमलता के इस रूप में प्रेम करने के द्वारा हम इस बात का अनुभव करेंगे कि हर दिन और हर चीज अपने में ईश्वर के रहस्य को वहन करती है।

ईश्वर का राज्य न्याय एवं शांति का राज्य

काथलिक कलीसिया की धर्मशिक्षा हमें पुनः कहती है, “हर दिन और हर क्षण की प्रार्थना, नन्हें बालकों में ईश्वर के राज्य के रहस्य का उदभेदन है, जो ईश्वर के सेवक हैं, जो ईश्वर के धन्य वचनों के अनुरूप गरीब हैं। यह हमारे लिए उचित और आवश्यक है कि हम प्रार्थना करें जिससे ईश्वरीय न्याय और शांति का राज्य दुनिया में स्थापित हो, साथ ही विनम्रतापूर्वक, प्रतिदिन की स्थितियों में प्रार्थना करना उतना ही महत्वपूर्ण है; वे सभी प्रार्थना के रूप हो सकते हैं जिसकी तुलना प्रभु अपने राज्य से करते हैं” (2660)।

संत पापा ने कहा कि नर और नारी, हम सभी वायु की भांति हैं, घास की धार से समान हैं (स्तो.144.4,103.15)। दर्शनशास्त्री पास्कल ने लिखा, “पूरे ब्रह्मांड को उसे कुचलने हेतु हथियार उठाने की कोई आवश्यकता नहीं है, एक वाष्प, पानी की एक बूंद ही उसे मारने के लिए पर्याप्त है”। हम सभी क्षणभंगुर हैं लेकिन हम जानते हैं कि हमें कैसे प्रार्थना करनी चाहिए, जो हमारे लिए सबसे बड़ा सम्मान और हमारी ताकत है। हम हर क्षण और हर परिस्थिति में प्रार्थना करें क्योंकि येसु हमारे निकट हैं। और जब कभी हम येसु के हृदयानुसार एक प्रार्थना करते हैं तो वह प्रार्थना हमारे लिए चमत्कार करती है।  

 

10 February 2021, 13:21