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ʺसंत पापा फ्राँसिस और ज़ायरे के धर्मप्रांतों के रोमन मिस्सलʺ नई किताब ʺसंत पापा फ्राँसिस और ज़ायरे के धर्मप्रांतों के रोमन मिस्सलʺ नई किताब 

जायरे रीति अमेज़न के लिए एक "आशाजनक मॉडल" है, संत पापा

संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन प्रकाशन भवन द्वारा प्रकाशित एक नई पुस्तक की प्रस्तावना में जायरे रीति की प्रशंसा की।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार 02 दिम्बर 2020 (वाटिकन न्यूज) : पूजन धर्मविधि को स्थानीय कलीसिया के सदस्यों के दिलों को छूना चाहिए, संत पापा फ्राँसिस ने एक पुस्तक की प्रस्तावना में लिखा, जिसे मंगलवार दोपहर को प्रकाशित किया गया। इस पुस्तक का शीर्षक हैः ʺसंत पापा फ्राँसिस और ज़ायरे के धर्मप्रांतों के रोमन मिस्सल।ʺ इस पुस्तक का संपादन रोम में रहने वाली कांगो की धर्मबहन रीता एमबीशू कोंगो ने किया।

जायरे रीति से मिस्सा का अनुष्ठान

संत पापा फ्राँसिस द्वारा रोम में रहने वाले कांगो के विश्वासी समुदाय के लिए एक विशेष पवित्र मिस्सा का अनुष्ठान करने के ठीक एक साल बाद पुस्तक का प्रकाशन किया गया। 1 दिसंबर, 2019 को संत पेत्रुस महागिरजाघर में, प्रजातंत्र गणराज्य कांगो के धर्मप्रांतों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले जायरे रीति के अनुसार पवित्र मिस्सा का अनुष्ठान किया था।  रोम में कांगो काथलिक कलीसिया के गिरजाघर की 25 वीं वर्षगांठ मनाई।

लैटिन कलीसिया का सांस्कृतिक अनुकूलन रीति

नई किताब की प्रस्तावना में में संत पापा फ्राँसिस ने लिखा, ʺजायरे रीति "अब तक लैटिन कलीसिया का एकमात्र सांस्कृतिक अनुकूलन रीति है, जिसे द्वितीय वाटिकन काउंसिल के बाद स्वीकृत किया गया है" और "कांगो में प्रचलित सांस्कृतिक अनुकूलन प्रक्रिया पवित्र आत्मा के विभिन्न उपहारों को बढ़ाने के लिए एक निमंत्रण है, जो सभी मानवता के लिए एक समृद्धि हैं।”

जायरे रीति

जायरे मिस्सा जाइरे के धर्मप्रांतों के लिए रोमन मिस्सल, रोमन काथलिक कलीसिया के मिस्सा का एक रूपांतर है जैसा कि हम जानते हैं। साधारणतः इस मिस्सा को "कांगोलेस मिस्सा" भी कहा जाता है।

यह धर्मविधि संस्कार अफ्रीकी जीवन के तौर तरीके एवं कांगोलेस संस्कृति में फिट बैठता है। पवित्र मिस्सा समारोह में मण्डली की भागीदारी और सहभागिता को प्रोत्साहित किया गया है। गिरजाघर में इकट्ठे हुए विश्वासी, अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के बीच, वाद्य यंत्र, ड्रम एवं धार्मिक नृत्य का भी विशेष स्थान रहता है। गिरजाघऱ में विश्वासी समुदाय अपने विश्वास और आनंद दोनों की अभिव्यक्ति झूमते हुए बड़े शान से करते हैं।

अमेजोनियन रीति के लिए एक मॉडल

नई पुस्तक, "संत पापा फ्राँसिस और ज़ायरे के धर्मप्रांतों के लिए रोमन मिस्सल," का उपशीर्षक है, "-एक अन्य संस्कृतियों के लिए आशाजनक रीति।" संत पापा फ्राँसिस का सुझाव है कि जायरे रीति अमेजन के लिए एक मॉडल रीति हो सकती है।

संत पापा फ्राँसिस ने कहा, "जायरे रीति एक अमेजन रीति के संभावित विस्तार के लिए एक आशाजनक तरीका भी प्रस्तावित करता है।" संत पापा की आशा है कि यह "रोमन मिस्सल की प्रकृति को हस्तक्षेप किए बिना, कलीसिया की प्राचीन और सार्वभौमिक परंपरा के साथ निरंतरता की गारंटी के साथ किया जा सकता है।"

नई किताब की संपादिका सिस्टर कोंगो, द डॉटर्स ऑफ मेरी,द मोस्ट होली,को-रेडेमट्रिक्स धर्मसमाज की धर्मबहन है। वे रोम में परमधर्मपीठीय उर्बान विश्वविद्यालय में आध्यात्मिक धर्मशास्त्र की प्रोफेसर हैं। इस पुस्तक में मॉरीज़ियो ग्रोन्की, जोन-पियरे सिएम लासौल, ओलिवर निडोंडो और सिल्विना पेरेज़ का योगदान है।

02 December 2020, 13:54