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बालक येसु का चुम्बन करते संत पापा फ्राँसिस बालक येसु का चुम्बन करते संत पापा फ्राँसिस   (Vatican Media)

क्रिसमस मिस्सा : येसु एक बालक के रूप में आये ताकि हमें ईश्वर की संतान बनायें

संत पापा फ्राँसिस ने 24 दिसम्बर की शाम संत पेत्रुस महागिरजाघर में ख्रीस्त जयन्ती का समारोही मिस्सा अर्पित किया, जिसमें संचार माध्यमों के जरिये विश्वभर के लाखों लोगों ने भाग लिया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 24 दिसम्बर 20 (रेई)- संत पापा फ्रांसिस ने कोरोना वायरस के कारण लॉकडाऊन के बीच बहुत कम विश्वासियों के साथ, संत पेत्रुस महागिरजाघर में ख्रीस्त जयन्ती का समारोही ख्रीस्तयाग अर्पित किया, जिसमें विभिन्न संचार माध्यमों द्वारा विश्वभर के लाखों विश्वासियों ने भाग लिया।

संत पापा ने उपदेश में कहा कि येसु बालक बन गये ताकि हम भी ईश्वर के बालक बन सकें। उन्होंने कहा, "आज की रात नबी इसायस की महान भविष्यवाणी पूरी हुई- “हमारे लिए एक बालक उत्पन्न हुआ है हमें एक पुत्र मिला है” (इसा.9.5)।

संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण का नजारा 24 दिसम्बर की शाम को
संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण का नजारा 24 दिसम्बर की शाम को

येसु हमारे लिए जन्म हैं

संत पापा ने कहा, "हमारे लिए एक पुत्र मिला है। परिवार में एक बच्चे के जन्म की बड़ी खुशी में हम कई बार इस घोषणा को सुनते हैं। यह हमारे लिए अभूतपूर्व होता और सारी चीजों को परिवर्तित कर देता है। यह हमें उत्तेजित करता, जहाँ हम अपने जीवन की सारी चिंताओं, परेशानियों और निद्राहीन रातों को भूल जाते हैं क्योंकि यह हमें अवर्णनीय और अतुलनीय खुशी से भर देता है। ख्रीस्त जयंती हमारे लिए यही है- येसु का जन्म “नयापन” है जो हर साल हमें नवीन बनाता, जहाँ हम उनमें अपने जीनव की हर कठिनाई का सामना करने हेतु शक्ति पाते हैं। क्योंॽ क्योंकि उनका जन्म हमारे लिए हुआ है, मेरे लिए, आप के लिए, सभी के लिए हुआ है। आज की इस पवित्र रात में “के लिए” वह शब्द है जिसकी पुनरावृत्ति हम बारंबार पाते हैं- “हम सभी के लिए एक बालक का जन्म हुआ है” “हमारे लिए एक मुक्तिदाता का जन्म हुआ है” इसे हम स्त्रोत में दुहराते हैं। संत पौलुस हमें कहते हैं, “उन्होंने हमारे लिए अपने को बलि चढ़ाया” (तीतु.2.14), और सुसमाचार हमें कहता है, “आज तुम्हारे लिए एक मुक्तिदाता का जन्म हुआ है” (लूका. 2.11)।

हमारे लिए एक बालक का जन्म हुआ है

इन शब्दों, हमारे लिए- का वास्तविक अर्थ क्या हैॽ इसका अर्थ है ईश्वर के पुत्र, जो अपने में पवित्र हैं हमें अपनी कृपा से, ईश्वरीय संतान बनाने आते हैं। हाँ, ईश्वर एक बालक की तरह इस दुनिया में हमें ईश्वर की संतान बनाने आये। यह कितना अनमोल उपहार है। आज के दिन ईश्वर हमें आश्चर्यचकित करते और हम प्रत्येक जन से कहते हैं, “तुम कितने अद्भुत हो”। प्रिय भाइयो एवं बहनों, हम कभी निराश न हों। क्या आप अपने में ऐसे अनुभव करते हैं कि आप गलती से दुनिया में आ गयेॽ ईश्वर आप को कहते हैं, “नहीं, तुम मेरे बच्चे हो”। क्या आपको असफल या अयोग्य होने का एहसास होता है, आप को भय लगता है कि आप अपने अंधकार की सुरंग से कभी बाहर नहीं निकल पायेंगेॽ ईश्वर आप से कहते हैं, “साहस रखो, मैं आपके साथ हूँ”। वे इसे शब्दों में घोषित नहीं करते बल्कि हमारे लिए बालक बनते हुए कहते हैं। इस भांति, वे हमें इस बात की याद दिलाते हैं कि सभी पुर्नजन्म का केन्द्रविन्दु इस तथ्य को पहचानने में है कि हम सभी ईश्वर की संतान हैं। हमारे हृदयों की नश्वर आशा हमें जीवन की ऊष्मा प्रदान करती जो हमारे जीवन को अर्थपूर्ण बनाती है। यह महान सत्य कि हम सभी ईश्वर के बेटे और बेटियाँ हैं हमारे जीवन की अन्य शक्तियों और कमजोरियों, हमारे आतीत की असफलताओं और घावों, हमारे भय और भविष्य की चिंता से बड़ी है। ईश्वर का प्रेम हमारे लिए कभी समाप्त नहीं होता और यह हमारे ऊपर निर्भर करता है। उनका शर्तहीन प्रेम है हमें शुद्ध कृपा स्वरुप मिलता है। आज संत पौलुस हमें कहते हैं, “ईश्वर की कृपा सभी मनुष्यों के लिए प्रकट हुई है” (तीतु.2.11) इससे मूल्यवान हमारे लिए और कुछ नहीं हो सकता है।

संत पेत्रुस महागिरजाघर में क्रिसमस का ख्रीस्तयाग
संत पेत्रुस महागिरजाघर में क्रिसमस का ख्रीस्तयाग

येसु ख्रीस्त का प्रेम हमारे जीवन में बदलाव लाता है

हमें एक पुत्र मिला है। ईश्वर पिता ने हमें कोई चीज, वस्तु प्रदान नहीं की, उन्होंने हमें स्वयं अपने एकलौटे पुत्र को दिया है, जो उनकी सारी खुशी हैं। यद्यपि हम कृतज्ञहीन हृदय से ईश्वर की ओर देखें और अन्याय भरी निगाहों से अपने भाइयो एवं बहनों को, तो हममें एक शांका जगेगी। क्या ईश्वर इन सारी चीजों को हमें देने में सही थेॽ क्या हम पर विश्वास करने में वे अब भी सही हैंॽ क्या वे हमसे बहुत अधिक चाह नहीं रखते हैंॽ निश्चिय ही, वे हमसे अधिक आशा करते हैं और वे ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि वे हमारे प्रेम में पागल हैं। वे हमें प्रेम करना नहीं छोड़ सकते हैं। यही कारण है कि वे हमसे एकदम भिन्न हैं। हम अपने को जितना प्रेम नहीं करते ईश्वर सदैव उससे भी अधिक हमें प्रेम करते हैं। हमारे हृदय में निवास करने का यही उनका रहस्य है। ईश्वर जानते हैं कि हम अपने में बेहतर केवल तब हो सकते हैं जब हम उनके शर्तहीन प्रेम का अनुभव करते हैं, एक अपरिवर्तनशील प्रेम जो हमें परिवर्तित करता है। केवल येसु ख्रीस्त का प्रेम हमारे जीवन में बदलाव लाता, हमारे जीवन के गहरे घावों को चंगा करता और हमें निराशा के घेरे से बाहर निकाला, हमारे क्रोध और हममें व्याप्त निरंतर शिकायत से हमें स्वतंत्र करता है।

गरीबी के द्वारा ईश्वर हमारे पास आये

हमें एक पुत्र मिला है। अंधेरे गोशाले की चरनी में ईश्वर का पुत्र सचमुच उपस्थित हैं। लेकिन हमारे लिए पुनः एक सवाल उत्पन्न करता है। वे गरीबी और परित्यक्त परिस्थिति, रात्रि में क्यों जन्मे, जहाँ सफाई नाम की कोई चीज नहीं थी, जबकि वे राजाओं के सबसे शानदार महल में जन्म ले सकते थेॽ ऐसा क्योंॽ वे अपने प्रेम की प्रचुरता में हमें मानवीय परिस्थिति को समझाना चाहते हैं, वे अपने ठोस प्रेम से हमारी गरीबी की गहराई का स्पर्श करते हैं। ईश्वर का पुत्र एक परित्यक्त रुप में जन्म लिया जिससे वे हमें यह बता सकें कि हरएक परित्यक्त भी ईश्वर की संतान है। वे इस दुनिया में हरएक बच्चे की तरह आये जो कमजोर, संवेदनशील होता है जिससे हम अपनी कमजोरियों को करुणामय प्रेम में स्वीकार करना सीखें। हम अपने में महत्वपूर्ण बातों को खोज सकें जैसा कि उन्होंने बेतलेहम में किया। ईश्वर हमारी गरीबी से आश्चर्यजनक कार्य करना पसंद करते हैं। उन्होंने हमारी मुक्ति को गौशाले की चरनी में रखा। वे हमारी गरीबी से भयभीत नहीं होते अतः हम अपने को उनकी करूणा से पूरी तरह परिर्वतित होने दें।

हमारे जीवन को दिशा निर्देशित करते

हमारे लिए एक पुत्र मिला है कहने का अर्थ यही है। हम पुनः “के लिए” शब्द को दूसरे स्थान पर सुनते हैं। स्वर्गदूत गरेड़ियों को संदेश सुनाते हैं, “आप लोगों के लिए पहचान होगी- आप एक बालक को कपड़ों में लपेटा और चरनी में लिटाया हुआ पायेंगे” (लूका.2.12)। वह निशानी, चरनी में बालक, हमारे लिए भी एक चिन्ह है जो हमारे जीवन को दिशा निर्देशित करता है। बेतलेहम का अर्थ “रोटी का घर” है, ईश्वर चरनी में लेटे हैं जो हमें यह याद दिलाती है कि जीने हेतु हमें उनकी जरुरत है जैसे कि हम जीने के लिए रोटी खाते हैं। हमें उनके मुफ्त, शर्तहीन और सशक्त प्रेम से अपने को भरने की जरुरत है। इसके बदले, कितनी बार मनोरंजन की भूख, सफलता और दुनियावी चीजों की खुशी से हम अपने जीवन को पोषित करते हैं जो हमें संतुष्टि प्रदान नहीं करती वरन हम अपने अंदर खालीपन का अनुभव करते हैं। नबी इसायस के माध्यम ईश्वर हमारी शिकायत करते और कहते हैं कि बैल और लद्दू जानवर अपने मालिक के चरनी को जानते लेकिन हम उनके लोग उन्हें नहीं जानते, जो हमारे जीवन के स्रोत हैं (इसा.1.2-3)। यह सत्य है, अपने में अत्यधिक धन-दौलत की चाह में, हम अनगिनत चरनियों की ओर भागते फिरते हैं जहाँ क्षणभंगुर चीजें हैं लेकिन हम बेतलेहम की चरनी को भूल जाते हैं। उस चरनी में सभी तरह की दरिद्रता है फिर भी उसमें प्रेम की प्रचुरता है जो हमें इस बात की शिक्षा देती है कि जीवन का सच्चा पोषण अपने को ईश्वर के द्वारा प्रेम करने देने और उस प्रेम को दूसरे से बाँटने में है। येसु हमें इसका उदाहरण देते हैं। वे शब्द के रुप में हमारे लिए बालक बनें, वे हमें कुछ नहीं कहते लेकिन जीवन देते हैं। वहीं हम शब्दों से भरे होते लेकिन बहुधा हम अपनी अच्छाई को कम ही व्यक्त करते हैं।

संत पेत्रुस महागिरजाघर
संत पेत्रुस महागिरजाघर

हमें प्रेम करना सिखाते हैं

हमें एक पुत्र मिला है। छोटे बच्चों के माता-पिता जानते हैं कि उन्हें कितना प्रेम और धैर्य की जरुरत होती है। हमें उन्हें खिलाना, देखभाल करना, नहलाना और सेवा करना होता है क्योंकि वे संवेदनशील और जरुरत की स्थिति में होते हैं, जिसे हम बहुत बार नहीं समझते हैं। एक बच्चा हमें प्रेम के योग्य बनाता और प्रेम करना भी सिखलाता है। ईश्वर एक बालक के रुप में हमें दूसरों की चिंता करने को प्रेरित करते हैं। उनकी शांतिमय आंसू की धार हमें यह एहसास दिलाती है कि धैर्यहीन हमारी अधीरता अपने में व्यर्थ है। उनकी बाहों में झलकता प्रेम हमें इस बात की याद दिलाती है हमें अपने में गमहीन समय बिताने के बदले दूसरों के आंसू को पोंछना है। गरीबी और जरूरतमंद स्थिति में ईश्वर का हमारे बीच आना हमें यह बतलाता है कि गरीबों की सेवा में हम उन्हें अपना प्रेम दिखलाते हैं। इस रात्रि से जैसे कि कवि ऐमिली डिकइनसन कहते हैं, “ईश्वर का निवास मेरे बगल में है, प्रेम उनका पंगल है (ऐमिली डिकइनसन, कविताएं, XVII)

हमें एक पुत्र मिला है। येसु ख्रीस्त आप एक बालक हैं जो मुझे एक बालक बनाते हैं। मैं जैसे भी हूँ आप मुझे प्रेम करते हैं। चरनी के बालक स्वरुप आप का आलिंगन करने में, मैं अपने जीवन को पुनः आलिंगन करता हूँ। जीवन की रोटी स्वरुप आप का स्वागत करना मुझे भी अपने जीवन को दूसरे के लिए देने हेतु प्रेरित करता है। मेरे मुक्तिदाता मुझे सेवा करने की शिक्षा दीजिए। आप ने मुझे नहीं छोड़ा मेरी सहायता कीजिए कि मैं अपने भाई-बहनों को सांत्वना दे सकूँ क्योंकि इस रात्रि से वे सभी मेरे भाई-बहनें हैं।

24 December 2020, 23:18