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संत पेत्रुस महागिरजाघर का प्राँगण संत पेत्रुस महागिरजाघर का प्राँगण  (Vatican Media)

देवदूत प्रार्थना में पोप: आगमन काल मन-परिवर्तन की यात्रा

वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में रविवार 6 दिसम्बर को, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। जिसके पूर्व उन्होंने आगमन काल के दूसरे सप्ताह का संदेश दिया और विश्वासियों से मन-परिवर्तन या पश्चाताप करने का आह्वान किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, रविवार, 6 दिसम्बर 20 (वाटिकन रेडियो)- संत पापा ने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, "प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।" इस रविवार का सुसमाचार पाठ (मार.1,1-8) योहन बपतिस्ता के व्यक्तित्व एवं कार्य को प्रस्तुत करता है। उन्होंने अपने समय के लोगों के लिए विश्वास की वैसी ही यात्रा प्रस्तुत की जैसा आगमन काल हमारे लिए प्रस्तुत करता है कि हम क्रिसमस में प्रभु का स्वागत करने के लिए अपने आपको तैयार कर सकें। विश्वास की यह यात्रा मन- परिवर्तन की यात्रा है। मन-परिवर्तन का अर्थ क्या है? बाईबिल के अनुसार मन परिवर्तन हेतु सबसे पहले दिशा परिवर्तन करना है, सोचने के तरीके में बदलाव लाना है। नैतिक और अध्यात्मिक जीवन में मन-परिवर्तन का अर्थ है बुराई से अच्छाई की ओर बढ़ना, पाप से ईश्वर के प्रति प्रेम में बढ़ना।

पश्चाताप का बपतिस्मा

यहूदिया के निर्जन प्रदेश में बपतिस्ता इसी का उपदेश दे रहा था। वह पापक्षमा के लिए पश्चाताप के बपतिस्मा का उपदेश दे रहा था।(4) बपतिस्मा ग्रहण करना उन लोगों के हृदय परिवर्तन का बाह्य एवं दृष्यमान चिन्ह था जो उनका उपदेश सुनते एवं पश्चाताप करने का निश्चय करते थे। वह बपतिस्मा यर्दन के जल में डुबकी लगाने से होता था किन्तु पश्चताप नहीं करने एवं जीवन में बदलाव लाने की चाह नहीं रखने पर वह व्यर्थ हो जाता था।

पश्चाताप के लिए त्याग आवश्यक

पश्चाताप में अपने पापों के लिए दुःख महसूस करना है, उससे अपने आपको मुक्त करना, उसे अपने जीवन से हमेशा के लिए दूर करने की चाह रखना। पाप को दूर करने के लिए आवश्यक है कि उन सभी चीजों का त्याग करें जो दुनियादारी मनोभाव, ऐश-आराम, शारीरिक सुख, मौज-मस्ती और सम्पति की बहुत अधिक चाह से जुड़ा हो। इसका उदाहरण फिर एक बार, आज के सुसमाचार पाठ से योहन बपतिस्ता की छवि में मिलता है, एक सीधा-साधा व्यक्ति जो सब कुछ को छोड़कर आवश्यक चीजों की खोज करता है। यह मन-परिवर्तन का पहला आयाम है : पाप और सांसारिकता से अनासक्ति है। मन-परिवर्तन का दूसरा आयाम है : ईश्वर एवं उनके राज्य की खोज करना। आराम एवं दुनियावी मनोभाव का त्याग ही सब कुछ नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य, इससे महान वस्तु प्राप्त करना है, अर्थात् ईश्वर के राज्य, ईश्वर की संगति, ईश्वर की मित्रता प्राप्त करना है।

सच्चा मन-परिवर्तन संभव है

संत पापा ने कहा, "किन्तु यह आसान नहीं है क्योंकि कई बंधन हैं जो हमें पाप के नजदीक लाते हैं जैसे- चंचलता, निराशा, बेकार परिवेश, बुरा उदाहरण आदि। कई बार हम प्रभु की ओर बढ़ने के लिए बहुत कमजोर महसूस करते हैं और कभी-कभी लगता है कि ईश्वर मौन हो गये हैं, सांत्वना की उनकी प्रतिज्ञा हमारे लिए दूर एवं काल्पनिक लगता है। चिंता करने और ध्यान देनेवाले चरवाहे की छवि के रूप में आज हम नबी इसायस के ग्रंथ से लिए गये पाठ (इसा. 40:1,11) में उनके बारे सुनते हैं। अतः व्यक्ति यह कहने के प्रलोभन में पड़ सकता है कि सच्चा मन-परिवर्तन असंभव है। हम कितनी बार इस निराशा के बारे सुनते हैं? नहीं मैं यह नहीं कर सकता, मैं इसे शुरू करता और फिर वापस पीछे लौट जाता हूँ। संत पापा ने कहा कि यह बुरी बात है। यह वास्तव में संभव है। किन्तु निराशा की यह भावना जब आती है वहीँ ठहरी नहीं रहती क्योंकि यह एक दलदल के समान है, एक औसत दर्जे के जीवन का दलदल। जब व्यक्ति जहाँ जाना चाहता वहाँ नहीं जा पाता, ऐसी परिस्थिति में क्या कर सकता है?"

पश्चाताप एक कृपा है

सबसे बढ़कर, हम याद रखें कि पश्चाताप एक कृपा है, कोई भी व्यक्ति अपनी ही शक्ति से मन-परिवर्तन नहीं कर सकता। यह एक कृपा है जिसको प्रभु प्रदान करते हैं। धीरज के साथ प्रभु से याचना करना है कि वे हमारा मन-परिवर्तन कर दें। हम उतना ही मन परिवर्तन कर पायेंगे, जितनी मात्र में ईश्वर की इस सुन्दरता, अच्छाई और कोमलता के लिए अपना हृदय खोलते हैं। हम ईश्वर की कोमलता पर चिंतन करें। ईश्वर कोई बुरे या दुष्ट पिता नहीं हैं। वे प्रेममय हैं, बहुत प्यार करते हैं एक भले चरवाहे की तरह हैं जो अपने खोये हुए अंतिम भेड़ को भी खोजते हैं। प्रेम और पश्चताप यही है कि आप चलना शुरू करते हैं क्योंकि वे ही हमें चलने के लिए प्रेरित करते हैं और तब हम उन्हें अपनी ओर आते हुए देखेंगे। संत पापा ने सलाह की कि हम प्रार्थना करें, चलें और इसके द्वारा हमेशा एक कदम आगे बढ़ेंगे।

माता मरियम से प्रार्थना

अति पवित्र माता मरियम, जिनका पर्व हम एक दिन बाद निष्कलंक रूप में मनायेंगे, हमें पाप एवं सांसारिकता से दूर रहने में मदद दें ,ताकि हम अपने आप को प्रभु के लिए, उनके वचन और उनके प्रेम के लिए खोल सकें, जो पुनर्स्थापित करते और बचाते हैं।

06 December 2020, 15:34