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VATICA BELIEF POPE VATICA BELIEF POPE  (ANSA)

प्रार्थना हमारी आत्मा और आवाज, संत पापा

संत पापा फ्रांसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह में विनयपूर्ण प्रार्थना का मर्म समझाया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

प्रार्थना करने वाले दुनिया से हार नहीं मानते हैं। यदि प्रार्थना मानवता की खुशी और दुःखों, आशाओं और चिंताओं को अपने में जमा नहीं कहती तो यह एक श्रृंगार बन जाती है, एक छिछली मनोभाव। हम सभों को अपनी गरहाई में जाने की जरुरत है जहाँ हम अपने जीवन पर चिंतन करते और ईश्वर के संग एक संबंध स्थापित करते हैं। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हम अपने जीवन की हकीकत से अपने को दूर करते हैं। प्रार्थना में ईश्वर हमें अपने में “लेते, आशीष देते, हमें तोड़े औऱ देते हैं” जिससे हम सभों की भूखा मिटा सकें। हरएक ख्रीस्तीय ईश्वर की हाथों में रोटी बनने के लिए बुलाया गया है जो तोड़ा और दूसरों को बाँटा जाता है। अतः प्रार्थना अपने में सच्चाई है दूर भागना नहीं।

प्रार्थनामय हृदय करुणावान है

इस भांति प्रार्थना करने वाले नर-नारी एकांत और शांति की खोज करते हैं, वे ऐसा इसलिए नहीं करते क्योंकि वे विचलित होना नहीं चाहते बल्कि वे ईश्वर की आवाज को अच्छी तरह सुना चाहते हैं। कभी-कभी वे अपने को दुनिया से दूर गुप्त रुप में अपने को कमरे में बंद कर लेते हैं, जैसे कि येसु कहते हैं (मत्ती. 6.6)। लेकिन वे जहाँ कहीं भी होते सदैव अपने हृदय के द्वार को पूरी तरह खुला रखते हैं, उनके लिए जो प्रार्थना करना नहीं जानते हैं, उनके लिए जो प्रार्थना के रुप में एक घुटन रुपी रूदन को वहन करते हैं, जो अपनी गलती के कारण राह से भटक गये हैं, जहाँ हम एक छुपी पुकार को पाते हैं। यदि कोई प्रार्थना करने वाले व्यक्ति के हृदय को दस्तक देता तो वह उसे करूणा से भर पाता है जो किसी को अपने से अलग नहीं करता है। प्रार्थना हमारी आत्मा और आवाज है यह उनके लिए हृदय और आवाज बनाती है जो नहीं जानते कि कैसे प्रार्थना करनी है, या जो प्रार्थना नहीं करते या प्रार्थना नहीं कर सकते हैं। हम उनके लिए मध्यस्थ बनते और पिता से उनके लिए विनय करते हैं। एकांत में प्रार्थना करने वाला अपने में लम्बे समय और घंटों प्रार्थना कर सकता है। एकांत में हम अपने को सभी चीजों से, सभों से अलग कर सभी चीजों को और सभों को ईश्वर में पाते हैं। ऐसे लोग सारी दुनिया के लिए प्रार्थना करते हैं मानों वे अपने कंधों पर सभी दुःखों और पापों को ढ़ो रहे हों। वे सभों को लिए प्रार्थना करते हैं मानों वे दुनिया में ईश्वर के “ऐनटीना” हों। प्रार्थना करते वाले गरीबों में ईश्वर के चेहरे को देखते हैं जो साऱी चीजों का मूल्य खोकर द्वार खटखटाते हैं। काथलिक कलीसिया की धर्मशिक्षा कहती है, “विनय प्रार्थना जिसे हम दूसरों के लिए करते हैं उस हृदय का गुण है जो ईश्वर की करूणा से पोषित है। कलीसिया में, ख्रीस्तीय विनय प्रार्थना येसु ख्रीस्त की प्रार्थना में संयुक्त होता है जहाँ हम अपने को संतों की एकता में पाते हैं”। प्रार्थना में हम अपने को ईश्वरीय करूणा के सानिध्य में पाते हैं। हम अपने पापों के कारण दया के प्रात्र बनते तथा उन पर दया करते हैं जिन्होंने हम से प्रार्थना की याचना की है। यह सच्ची प्रार्थना है जहाँ हम ईश्वर के करूणामय हृदय के करीब अपने को पाते हैं।

मध्यस्थ प्रार्थना का अर्थ

येसु ख्रीस्त की मध्यस्थ प्रार्थना में सहभागी होने का अर्थ क्या हैॽ संत पापा ने कहा जब मैं किसी के लिए ईश्वर से निवेदन करता या प्रार्थना करता हूँ तो येसु ख्रीस्त हमारे लिए अपने पिता से निवेदन करते हैं, वे अपने शरीर के घावों को पिता को दिखलाते क्योंकि वे शारीरिक रुप में पिता के सम्मुख उपस्थित हैं। येसु हमारे माध्यस्थ हैं जो पिता से हमारे लिए विनय करते हैं, जब हम दूसरों के लिए प्रार्थना करते तो हम येसु की तरह की कार्य करते हैं, जो अपने में अति सुन्दर है।

प्रार्थना की प्रेरणा पवित्र आत्मा से

प्रार्थना में मानव का हृदय शामिल है। यह मानवीय स्वभाव है। कोई कह सकता है घृणा की अवस्था में, उदसीनता की स्थिति में कोई प्रार्थना नहीं कर सकता है। यह केवल पवित्र आत्मा से प्रेरित होता है जो प्रेम प्रसारित करते हैं। जो प्रेम नहीं करते प्रार्थना करने का बहाना करते या सोचते कि प्रार्थना कर रहे हैं लेकिन वे सही अर्थ में प्रार्थना नहीं करते क्योंकि हम उनमें पवित्र आत्मा की कमी को पाते हैं। कलीसिया में जो दूसरों की खुशी और दुःख से वाकिफ हैं वे उनकी अपेक्षा अपनी गरहाई में उतरते हैं, जो दुनियावी की बातों खोज करते हैं। इसी कारण हर प्रार्थना में हम मानवीय अनुभूति को पाते हैं क्योंकि लोग चाहे कुछ भी गलती क्यों न करें, हम उन्हें अलग या उनका परित्याग कभी नहीं कर सकते हैं।

नम्रतापूर्ण प्रार्थना फलप्रद होता है

विश्वासी जब आत्मा से प्रेरित होकर पापियों के लिए प्रार्थना करते हैं, तो कोई चुनाव नहीं होता, कोई शिकायत या बुराई के शब्द उच्चारित नहीं किये जाते, वे सभों के लिए प्रार्थना करते हैं। वे अपने लिए भी प्रार्थना करते हैं। उस घड़ी वे इस बात को जानते हैं कि वे पापी हैं और पापियों के मध्य रहते हैं अतः वे सभों के लिए प्रार्थना करते हैं। फरीसी और नाकेदार की प्रार्थना हमारे लिए सदैव एक सजीव शिक्षा स्वरुप आती है कि हम किसी से बेहतर नहीं हैं। हम सभी भाई-बहनों के समान अपने में क्षंणभगुर हैं, पापों के कारण दुःखों से ग्रस्ति हैं। हम ईश्वर के पास ऐसी प्रार्थना कर सके हैं, “प्रभु, तेरे समाने कोई भी निर्दोष नहीं है (स्तो.143.2) हम सभी ऋणी हैं हमें बहुत बड़ा कर्ज चुकाना है, आप की दृष्टि में कोई भी पापमुक्त नहीं, प्रभु हम पर दया कीजिए।” इस मनोभावना में प्रार्थना हमारे लिए फलप्रद होता है क्योंकि हम अपनी नम्रता में ईश्वर के सम्मुख आते हैं।

संत पापा ने कहा कि प्रार्थना की निरंतरता के कारण दुनिया आगे बढ़ते जाती है अतः हम उन लोगों के प्रति कृतज्ञ हैं जो अज्ञात रुप में प्रार्थना करते रहते हैं...लेकिन ईश्वर उन्हें जानते हैं। बहुत से ख्रीस्तियों ने धर्मसतावट के समय येसु ख्रीस्त की इस प्रार्थना को दुहराया, “हे पिता तू उन्हें क्षमा कर दे क्योंकि वे नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं (लूका. 23.34।)”।

भला चरवाहा अपने लोगों के पापों को जानने के बाद भी उनके प्रति हमेशा विश्वासी बने रहते हैं, वे हमारे लिए पिता बने रहते हैं यद्यपि बच्चे उन्हें छोड़कर उनसे दूर क्यों न चले जायें। वे उनकी भी सुधी लेते हैं जिन्होंने अपने हाथों को रक्तरंजित किया है, वे अपने हृदय को उनके लिए बंद नहीं करते जिन्होंने उन्हें दुःख दिया है।

कलीसिया की प्रेरिताई विनयपूर्ण प्रार्थना

अपने सभी सदस्यों के साथ कलीसिया का प्रेरितिक कार्य विनय प्रार्थना करना है। यह उनके लिए विशेष रुप से निर्देशित किया जाता है जो विभिन्न तरह के उत्तरदायित्वों को वहन करते हैं, माता-पिता, शिक्षकगण, याजकवर्ग, समुदाय के अधिकारी... जैसे कि हम आब्रहम और मूसा को देखते हैं जिन्होंने ईश्वर के समक्ष उन लोगों के लिए विनय की जिनकी देख-रेख की जिम्मेदारी उन्हें सौपी गई थी। वास्तव में, हम ईश्वरीय आंखों और हृदय से उनकी सुरक्षा करते हैं उनकी अद्वितीय करुणा और कोमलता में देखरेख करते हैं।

हम सभी एक ही पेड़ की पत्तियों के समान हैं, हममें से हर कोई जो गिरता है उस बड़ी दया की याद दिलाता है जो प्रार्थना से प्रोषित होता जिसे हम एक दूसरे के लिए करते हैं। हम एक दूसरे के लिए प्रार्थना करें यह हम सभों की भलाई करेगा।

16 December 2020, 13:58