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शिक्षा पर विश्वस्तरीय समझौता में आशा का बीज

संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार को रोम के लातेरन परमधर्मपीठीय विश्वविद्यालय में एक वर्चुवल कार्यक्रम के दौरान, शिक्षा पर वैश्वस्तरीय समझौता के प्रतिनिधियों को एक विडीयो संदेश भेजा।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

संत पापा ने बृहस्पतिवार को विश्वभर के समाजों के विभिन्न भागों से अपील की कि वे शिक्षा पर विश्वस्तरीय समझौता को सहयोग एवं समर्थन दें।

पहल द्वारा दूसरों की देखभाल, शांति, न्याय, अच्छाई, सुन्दरता, स्वीकृति और भाईचारा के मूल्यों को प्रोत्साहन दिया जाता है ताकि सभी ओर आशा, एकात्मता एवं सौहार्द स्थापित किया जा सके।

शिक्षा – आशा का बीज

समझौता, काथलिक शिक्षा के संघ द्वारा, विश्वस्तर पर परिवर्तन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रायोजित है, ताकि शिक्षा भ्रातृत्व, शांति और न्याय का निर्माता बन सके। संत पापा के अनुसार समझौता यह सुनिश्चित करने के लिए है कि हरेक व्यक्ति के लिए मानव व्यक्ति की प्रतिष्ठा और भाईचारा की आम बुलाहट के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो।

संत पापा ने संदेश में कहा, "हम इस धारणा से पोषित हो सकें कि शिक्षा अपने आपमें आशा का बीज धारण करता है : शांति और न्याय की आशा, सुन्दरता एवं अच्छाई की आशा, सामाजिक सौहार्द की आशा।" "हमें आगे बढ़ना है, सभी को एक साथ, हरेक को हम के रूप में, लेकिन सद्भाव और एकता की सभ्यता के निर्माण के लिए हमेशा तत्पर रहना है जहाँ फेंकने की संस्कृति की भयानक महामारी के लिए कोई जगह नहीं होगी।"

उन्होंने संदेश में कहा है कि कोविड-19 संकट ने कई मुद्दों और जरूरतों को बढ़ा दिया है। स्वास्थ्य देखभाल के बारे में चिंताएँ अब आर्थिक और सामाजिक चिंताओं को भी बढ़ा रही हैं तथा दुनियाभर में शैक्षिक प्रणालियों ने हर स्तर पर महामारी के प्रभावों को महसूस किया है। ऑनलाइन शैक्षिक प्लेटफॉर्मों के माध्यम से तेजी से प्रत्युत्तर देने के लिए हर जगह प्रयास किए जा रहे हैं। इन शैक्षिक और तकनीकी अवसरों ने उल्लेखनीय असमानता को प्रकाश में लाया है, पर उन्होंने हमें यह भी महसूस कराया है कि लॉकडाउन और कई अन्य जरूरतों के कारण, बड़ी संख्या में बच्चे और किशोर स्कूली शिक्षा में पीछे रह गए हैं।

अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के हालिया आंकड़ों के अनुसार, करीब दस मिलियन बच्चे, कोरोनवायरस के कारण आर्थिक संकट के परिणामस्वरूप स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर है। संत पापा ने कहा कि इसने केवल पहले की खाई को बढ़ा दिया है।

एकात्मता पर आधारित आशा

इस परिस्थिति में संत पापा ने एक नई सांस्कृतिक और विकास मॉडल का आह्वान किया है जो अपने सामान्य घर की देखभाल और शांति को बढ़ावा देने के लिए समुदायों और लोगों को एक साथ लाने हेतु एक वैश्विक निर्भरता का निर्माण करते हुए मानव प्रतिष्ठा का सम्मान एवं रक्षा करता है।

संत पापा ने कहा, "शिक्षा का अर्थ है परिवर्तनकारी।" यह एक ऐसी आशा प्रदान करती है जो प्रभावशाली लोगों के स्वार्थ के नियतिवाद और भाग्यवाद को चूर कर सकता है।

शिक्षा हमेशा आशा का कार्य है अतः इसे एक नये क्षितिज को खोलना चाहिए, जिसमें आतिथ्य, अंतरपीढ़ी एकजुटता और पारगमन के मूल्य एक नई संस्कृति को जन्म दे सकें।

यह आशा एकात्मता पर आधारित है। शिक्षा प्रक्रिया आज की चुनौतियों एवं समस्याओं का जवाब दे तथा हर पीढ़ी की आवश्यकताओं का हल खोज सके। यह आज और भविष्य में मानवता को विकसित होने में मदद दे।

15 October 2020, 17:24