खोज

Vatican News
कोलोम्बिया में सशस्त्र संघर्ष एवं कोविद के कारण विस्थापित लोग, तस्वीरः 12.08.2020 कोलोम्बिया में सशस्त्र संघर्ष एवं कोविद के कारण विस्थापित लोग, तस्वीरः 12.08.2020   (AFP or licensors)

शरणार्थी हमारे समकालीन विश्व की चुनौती, सन्त पापा फ्राँसिस

सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा है कि आप्रवासी, शरणार्थी और आन्तरिक रूप से विस्थापित लोग हमारे समकालीन विश्व की सर्वाधिक महान चुनौतियों में से एक है।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 14 अगस्त 2020 (रेई,वाटिकन रेडियो):  सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा है कि आप्रवासी, शरणार्थी और आन्तरिक रूप से विस्थापित लोग हमारे समकालीन विश्व की सर्वाधिक महान चुनौतियों में से एक है।

स्वागत, सुरक्षा और एकीकरण

गुरुवार को वाटिकन स्थित अखण्ड मानव विकास को प्रोस्ताहन देने के लिये गठित परमधर्मपीठीय परिषद ने आप्रवासियों, शरणार्थियों एवं विस्थापितों की व्यथा का स्मरण दिलाते हुए अपना चौथा विडियो जारी किया। 27 सितम्बर को मनाये जा रहे 106 वें आप्रवासी एवं शरणार्थी दिवस के उपलक्ष्य में सन्त पापा फ्राँसिस ने अपना विशिष्ट सन्देश जारी किया है जिसमें आन्तरिक रूप से विस्थापित लोगों की समस्याओं पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया गया है। इस सन्देश में सन्त पापा ने आप्रवासियों, शरणार्थियों एवं विस्थापितों के स्वागत, उनकी सुरक्षा और उनके एकीकरण का आह्वान किया है।

महामारी से पीड़ित लोगों का स्मरण

सन्देश में सन्त पापा लिखते हैं, "अनवरत जारी संघर्ष और जलवायु परिवर्तन की समस्याओं के चलते पहले से ही विस्थापितों की संख्या में वृद्धि हुई है, कई देशों में पर्याप्त संरचनाओं के अभाव के कारण निर्धनता की स्थिति में जीवन यापन करनेवाले लोग प्रभावित हुए हैं और इसके साथ साथ 2020 के आरम्भ होते ही विश्व को कोविद-19 महामारी का सामना करना पड़ा है जिससे स्थिति बद से बदत्तर हो गई है। उन्होंने कहा कि वास्तव में, इस महामारी की विरूपता, गंभीरता और भौगोलिक सीमा के कारण, इस संकट ने कई अन्य मानवीय आपातकालीन स्थितियों पर प्रभाव डाला है जो लाखों लोगों को प्रभावित करते हैं। तथापि, सन्त पापा ने कहा, लेकिन “यह भूलने का समय नहीं है। हम जिस संकट का सामना कर रहे हैं, उसके कारण हमें कई अन्य संकटों को नहीं भूलना चाहिए जिनसे अनेकानेक लोग पीड़ित हैं।"

विस्थापितों में येसु के दर्शन

सन्त पापा ने कहा कि हालांकि, उनका सन्देश विशिष्ट रूप से आन्तरिक रूप से विस्थापितों पर केन्द्रित है तथापि, वह उन सब का आलिंगन करता है जो कोविद-19 के परिणामस्वरूप अनिश्चितता, परित्याग, हाशिए और अस्वीकृति की स्थितियों का सामना कर रहे हैं।

सन्त पापा पियुस 12 वें द्वारा 1952 ई. में प्रकाशित प्रेरितिक संविधान "एक्सुल फामिलिया" के प्रति ध्यान आकर्षित कराते हुए सन्त पापा फ्राँसिस ने बालक येसु के संग मरियम एवं योसफ के मिस्र से भाग निकलने के दृश्य का स्मरण कराया और कहा कि नाज़रेथ के पवित्र परिवार ने भी विस्थापितों एवं शरणार्थियों की तरह ही भय, आशंका, असरलता एवं अनिश्चित्ता का अनुभव किया था। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश, हमारे अपने युग में भी, लाखों लोग उसी दुखद व्यथा अनुभव कर रहे हैं।

सन्त पापा ने कहा कि प्रतिदिन टेलेविज़न और समाचार पत्र युद्ध, भुखमरी और राजनैतिक दमन के कारण अपने घरों का पलायन करनेवाले आप्रवासियों, शरणार्थियों एवं विस्थापितों का समाचार देते हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से प्रत्येक में हम येसु को देखें, इनका स्वागत करें, इन्हें सुरक्षा प्रदान करें तथा समाज में इनके एकीकरण का प्रयास करें।  

14 August 2020, 10:58