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हिरोसिमा के शांति स्मारक पर संत पापा फ्राँसिस हिरोसिमा के शांति स्मारक पर संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

हिरोशिमा परमाणु बम के 75 साल, जापान के प्रति संत पापा का सामीप्य

हिरोशिमा में 6 अगस्त 1945 को परमाणु बम गिराये जाने की 75वीं वर्षगाँठ पर संत पापा फ्राँसिस ने हिरोशिमा के राज्यपाल को एक संदेश भेजा तथा वहाँ के लोगों के प्रति अपना आध्यात्मिक सामीप्य व्यक्त करते हुए परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को समाप्त करने का आह्वान किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 7 अगस्त 20 (वीएन)- संत पापा ने 6 अगस्त को जापान के लोगों के प्रति अपना आध्यात्मिक सामीप्य व्यक्त किया जो हिरोशिमा में परमाणु बम गिराये जाने की 75वीं वर्षगाँठ मना रहे हैं। यह घटना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान घटी थी।

हिरोशिमा के राज्यपाल हिदेहिको यूसाकी को बृहस्पतिवार को प्रेषित संदेश में संत पापा  ने 1945 में हिरोशिमा में परमाणु बम गिराये जाने की 75वीं वर्षगाँठ को मनाने हेतु समारोह के आयोजकों और खासकर, त्रासदी से बचे लोगों का हार्दिक अभिवादन किया।

संत पापा ने 2019 में अपनी प्रेरितिक यात्रा के दौरान हिरोशिमा के शांति स्मारक तथा नागासाकी में हाइपोसेंटर पार्क पर मानव जीवन एवं धरोहर को नष्ट किये जाने की याद की थी।

शांति के तीर्थयात्री

संत पापा ने कहा कि जैसा कि वे पिछले साल शांति के एक तीर्थयात्री के रूप में जापान गये थे उन्होंने अपने हृदय में इस समय के लोगों को धारण किया है, विशेषकर, युवाओं को जो शांति के प्यासे हैं एवं उसके लिए त्याग करते हैं।

उन्होंने गरीबों के प्रति भी अपना सामीप्य व्यक्त किया है जो हमेशा हिंसा एवं संघर्ष के पहले शिकार बनते हैं।

परमाणु हथियार के खिलाफ संत पापा की अपील

2019 में हिरोशिमा में अपने संदेश की याद करते हुए संत पापा ने कहा है कि "युद्ध के लिए परमाणु उर्जा का प्रयोग अनैतिक है ठीक उसी तरह जिस तरह परमाणु हथियारों को रखना अनैतिक है।"

अतः शांति का प्रसार करने के लिए "सभी लोगों को युद्ध के हथियारों को छोड़ देना होगा, खासकर, सबसे शक्तिशाली एवं विनाशकारी हथियार : परमाणु हथियार जो पूरे शहर, पूरे देश का विनाश कर सकता है।"

परमाणु बम से बचे लोगों के प्रति सामीप्य

संत पापा ने परमाणु बम से प्रभावित लोगों की भी याद की है जिन्हें हिबाकुशा कहा जाता है। हिरोशिमा एवं नागासाकी बम से बचे अनेक लोग विकिरण विषाक्तता और मनोवैज्ञानिक आघात सहित बमों के भयानक प्रभावों से पीड़ित हैं। संत पापा ने प्रार्थना की कि उनकी आवाज आनेवाली पीढ़ी के लिए चेतावनी बन सके।

स्तोत्रकार के उन शब्दों की याद करते हुए संत पापा ने पीड़ितों तथा मेल-मिलाप के लिए कार्य करनेवाले लोगों को सम्बोधित कर कहा, "मेरे भाई और मित्र यहाँ रहते हैं इसलिए कहता हूँ, तुझमें शांति बनी रहे।" (स्तोत्र. 122: 8) अपने संदेश के अंत में संत पापा ने यादगारी मनानेवाले सभी लोगों पर ईश्वर के प्रचुर आशीष की कामना की।

07 August 2020, 16:16