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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  

देवदूत प्रार्थना : सुसमाचार द्वारा ईश्वर पर भरोसा रखने का निमंत्रण

वाटिकन स्थिति संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 9 अगस्त को संत पापा फ्राँसिस ने देवदूत प्रार्थना का पाठ किया जिसके पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर रविवार के सुसमाचार पाठ पर चिंतन किया, जिसमें येसु लहरों से घिरी झील के जल पर चलते हैं।

उषा मनोरमा तिरकी- वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार, 10 अगस्त 20 (रेई)- वाटिकन स्थिति संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 9 अगस्त को संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

इस रविवार का सुसमाचार पाठ (मती.14,22-33) बतलाता है कि येसु लहरों से घिरी झील के जल पर चलते हैं। पाँच रोटियों और दो मछलियों से भीड़ को खिलाने के बाद, जैसा कि हमने पिछले रविवार को देखा था, येसु शिष्यों को आदेश देते हैं कि वे नाव पर चढ़कर, उनसे पहले उस पार चले जाएँ। इतने में वे लोगों को विदा कर देंगे। ईसा लोगों को विदा कर एकान्त में प्रार्थना करने पहाड़ी पर चढ़े। वहाँ वे पिता के साथ थे। रात के समय झील को पार करने के दौरान, अचानक तूफान से शिष्यों की नाव डगमगाने लगी। ठीक उसी समय उन्होंने किसी को पानी के ऊपर चलते हुए उनकी ओर आते देखा। वे घबरा गये और यह कहते हुए कि यह कोई प्रेत है, डर के मारे चिल्ला उठे। येसु ने तुरन्त उन से कहा, ढारस रखो मैं ही हूँ। डरो मत।" पेत्रुस ने उत्तर दिया, "प्रभु यदि आप ही हैं तो मुझे पानी पर अपने पास आने की आज्ञा दीजिए।" ईसा ने कहा, "आ जाओ।" पेत्रुस नाव से उतरा और पानी पर चलते हुए ईसा की ओर बढ़ा किन्तु प्रचण्ड वायु देख कर वह डर गया और जब डूबने लगा, तो चिल्ला उठा, "प्रभु मुझे बचाइये।" ईसा ने तुरन्त हाथ बढ़ाकर उसे थाम लिया और कहा, अल्पविश्वासी, तुम्हें संदेह क्यों हुआ?

ईश्वर पर भरोसा रखकर त्याग करें

संत पापा ने कहा, "यह सुसमाचार की कहानी एक निमंत्रण है कि हम अपने जीवन के हरेक क्षण में ईश्वर पर भरोसा रखकर त्याग करें, खासकर, परीक्षा एवं कठिनाई की घड़ी में। जब जीवन के कठिन समय में हम बहुत अधिक डर एवं संदेह महसूस करते हैं और जब हमें डूबने के समान लगता है, सब कुछ अंधकारमय हो जाता है, तब हमें पेत्रुस के समान चिल्लाने से नहीं शर्माना चाहिए, "प्रभु मुझे बचाईये।"(30) हमें ईश्वर के हृदय को दस्तक देना, येसु के हृदय को खटखटाना और कहना चाहिए, "प्रभु मुझे बचाईये।" संत पापा ने कहा कि यह एक सुन्दर प्रार्थना है। हम कई बार इस प्रार्थना को कर सकते हैं, प्रभु मुझे बचाईये और येसु के इस भाव पर जिसमें वे तुरन्त अपना हाथ बढ़ाकर, उसे मित्र की तरह थाम लेते हैं इसपर लम्बे समय तक चिंतन किया जा सकता है। येसु ऐसे ही हैं, वे ऐसा करते हैं, वे पिता के हाथ हैं जो कभी नहीं छोड़ते, वे पिता के मजबूत एवं विश्वस्त हाथ हैं जो हमेशा हमारी भलाई चाहते हैं। ईश्वर गर्जन नहीं हैं, न ही तूफान हैं, न आग और न भूकम्प, जैसा की नबी एलियाह की कहानी आज बतलाती है। ईश्वर मंद समीर में हैं, जिसको कहा जा सकता है कि वे उस मुधर शांति में हैं जो दबाव नहीं डालता बल्कि सुनने के लिए कहता है। (1 राजा 19,11-13)

विश्वास रखने का अर्थ है

संत पापा ने कहा, "विश्वास रखने का अर्थ है, तूफान के बीच, अपने हृदय को ईश्वर पर, उनके प्रेम पर, पिता के रूप में स्नेह पर लगाये रखना। येसु इसकी सीख पेत्रुस एवं अन्य शिष्यों को देना चाहते थे और आज वे हमें सिखलाना चाहते हैं। अंधकारमय क्षण, उदासी की घड़ी में वे हमारे विश्वास की दुर्बलता को अच्छी तरह जानते हैं। हम सभी अल्प विश्वासी हैं"... और हमारे मार्ग को प्रतिकूल शक्तियों द्वारा बाधित और अवरूद्ध किया जा सकता है किन्तु वे जी उठे हैं हम इसे न भूलें। वे प्रभु हैं जिन्होंने हमें बचाने के लिए मृत्यु को पार किया है। इससे पहले कि हम उनकी तलाश करें, वे हमारे बगल में उपस्थित रहते हैं और हमारे पतन से उठाकर, हमें विश्वास में बढ़ाते हैं। शायद हम अंधकार में प्रभु, प्रभु, चिल्ला रहे हों, यह सोचते हुए कि वे दूर हैं किन्तु वे कहते हैं, मैं यहीँ हूँ। इस तरह वे हमारे साथ रहते हैं, वे ऐसा ही करते हैं।

नाव की तुलना कलीसिया से   

संत पापा ने आंधी की चपेट में पड़े नाव की तुलना कलीसिया से करते हुए कहा, "तूफान में फंसी नाव कलीसिया का प्रतीक है जो हर युग में प्रतिकूल बहनेवाली हवा के थप्पेड़ों से गुजरती है, कई बार इसे अत्यधिक कठिन परिस्थिति से गुजरना पड़ता है, हम विगत शताब्दियों के लम्बे एवं दुखद अत्याचारों की याद करें, आज भी कई देशों में यह जारी है। ऐसे क्षण में यह सोचने का प्रलोभन आ सकता है कि ईश्वर ने हमें छोड़ दिया है, किन्तु वास्तव में, ये ही वे क्षण हैं जब विश्वास, प्रेम और आशा का साक्ष्य स्पष्ट रूप से दिया जा सकता है।

यह कलीसिया में पुनर्जीवित ख्रीस्त की उपस्थिति है जो शहादत तक साक्ष्य देने की कृपा प्रदान करते हैं, जहाँ से नया ख्रीस्तीय और समस्त विश्व के लिए मेल-मिलाप एवं शांति का फल उत्पन्न होता है।  

संत पापा ने माता मरियम से प्रार्थना करते हुए कहा, "माता मरियम की मध्यस्थता द्वारा हम विश्वास एवं भ्रातृ प्रेम में सुदृढ़ रह सकें, जब जीवन में अंधेरा एवं तूफान ईश्वर पर हमारे विश्वास को कमजोर बना देता है।     

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया। 

10 August 2020, 14:48