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रविवारीय देवदूत प्रार्थना में संत पापा फ्रांसिस रविवारीय देवदूत प्रार्थना में संत पापा फ्रांसिस  (ANSA)

आत्मत्याग- सम्पूर्ण परिवर्तन की मांग, संत पापा

संत पापा फ्रांसिस ने 30 अगस्त को रविवारीय देवदूत प्रार्थना के पूर्व दिये गये संदेश में येसु के अनुसरण हेतु आत्मत्याग-पूर्ण परिवर्तन पर बल दिया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

संत पापा फ्रांसिस ने अपने रविवारीय प्रार्थना के पूर्व संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में एकात्रित हुए सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को संबोधित करते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों, सुप्रभात।

आज का सुसमाचार विगत रविवार के सुसमाचार से संयुक्त है (मत्ती.16.13-20, 21-27)। शिष्यों की ओर से पेत्रुस द्वारा इस बात की घोषणा करने के उपरांत कि येसु ख्रीस्त जीवंत ईश्वर के पुत्र हैं, वे अपने शिष्यों के साथ अपने दुःखभोग की बातों को साझा करते हैं।  येरूसालेम की राह, वे अपने मित्रों से अपने ऊपर आने वाले दुःखों का खुले रुप में जिक्र करते हैं। येसु अपने शिष्यों को अपने दुःखभोग, मृत्यु और पुनरूत्थान के रहस्य को समझते हैं कि अपमान के बाद वे महिमान्वित किये जायेंगे। वे उनसे कहते हैं, “उन्हें नेताओं, महायाजकों और शास्त्रियों की ओर से बहुत दुःख उठाना, मार डाला जाना और तीसरे दिन जी उठना होगा (मत्ति.16.21)।” लेकिन शिष्य उनकी बातों को नहीं समझ पाते क्योंकि वे अपने विश्वास में परिपक्व नहीं हुए हैं और उनकी मानसिकता दुनिया की चीजों में उलझी हुई है। वे भी दुनियावी जीत के बारे में सोचते और इसलिए वे क्रूस की भाषा को नहीं समझते हैं।

क्रूस ठोकर का कारण

येसु के क्रूस मरण की बातों के सुन कर पेत्रुस इसका विरोध करते हुए कहता है, “ईश्वर ऐसा न करे। यह आप पर कभी नहीं बीतेगी।”(22) संत पापा ने कहा कि पेत्रुस येसु पर विश्वास करता है और अपने विश्वास में येसु का अनुसरण करने की चाह रखता है लेकिन वह दुःखभोग से महिमा में प्रवेश करने को स्वीकार नहीं करता है। यह केवल पेत्रुस और शिष्यों के साथ ही नहीं वरन हमारे साथ भी होता है- क्रूस हमारे लिए एक बाधा, ठोकर का कारण बनता है, वहीं क्रूस से भागना येसु के लिए पिता की इच्छाओं को अस्वीकार करना है, उस प्रेरितिक कार्य को जिसे उन्हें पिता की ओर से, मानवीय मुक्ति हेतु पूरा करने को मिला है। इसकी कारण येसु पेत्रुस को फटकारते हैं, “हट जाओ, शैतान। तुम मेरे रास्ते में बाधा बन रहे हो। तुम ईश्वर की बातें नहीं, बल्कि मनुष्यों की बातें सोचते हो।”(मत्ती.23) इसके ठीक पहले येसु ने पेत्रुस की प्रशंसा की थी, उसे कलीसिया की नींव बनाने की प्रतिज्ञा की थी, लेकिन इसके ठीक बाद वे उन्हें “शैतान” कहते हैं। हम इसे कैसे समझ सकते हैंॽ यह हम सबों के साथ भी होता है। अपने जीवन के अच्छे समय में हम येसु की ओर अपनी निगाहें बनाये रखते और आगे बढ़ते हैं लेकिन दुःख की परिस्थिति में हम भाग जाते हैं। येसु कहते हैं कि शैतान हमें फुसला लेता है। यह बुरी आत्मा, शैतान के कार्य करने का विशिष्ट तरीका है जो हमें येसु ख्रीस्त के क्रूस से दूर करने की कोशिश करता है।

आत्मत्याग, छिछला परिवर्तन नहीं

संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि इसके बाद येसु सभों को संबोधित करते हुए कहते हैं, “यदि कोई मेरे पीछे आना चाहता है तो वह आत्मत्याग करे और अपना क्रूस उठा कर मेरे पीछे हो ले।” इस भांति वे सच्चे शिष्य होने की दो बातों को हमारे समक्ष रखते हैं। पहला अपना “आत्मत्याग करना” जिसका अर्थ अपने में छिछला परिवर्तन लाना नहीं बल्कि यह हमें सम्पूर्ण बदलाव, अपने जीवन के मनोभावों और मूल्यों में परिवर्तन की मांग करता है। दूसरा मनोभाव अपने क्रूस को ढ़ोना है। यह अपने दैनिक जीवन के दुःखों को धैर्य से सहना मात्र नहीं बल्कि विश्वास के साथ उत्तरदायी बने रहते हुए मेहनत करना है जहाँ हम बुराइयों के विरूद्ध संघर्षरत रहते हैं। ख्रीस्तियों का जीवन सदैव संघर्षशील है। धर्मग्रंथ हमें कहता है कि ख्रीस्तियों का जीवन एक सैनिक के कार्य की भांति बुराई से, दुष्टता से लड़ना है।

क्रूस ढ़ोना, मुक्तिदायी कार्य में सहभागिता

इस तरह हमारा “क्रूस ढ़ोना”, संत पापा ने कहा कि येसु संग दुनिया की मुक्ति हेतु सहभागी होना है। इस बात पर विचार करते हुए हम अपने घरों की दीवारों में क्रूस को टांगते हैं, या इसे अपने गले में पहते हैं। यह हमें इस बात की याद दिलाती है कि हम येसु ख्रीस्त के साथ संयुक्त अपने भाई-बहनों की सेवा में अपना हाथ बंटाते हैं विशेषकर उनकी जो सबसे कमजोर और अति संवेदनशील हैं। क्रूस ईश्वर के प्रेम की पवित्र निशानी है यह येसु ख्रीस्त के त्याग का चिन्ह है, हम इसे किसी अंधविश्वास की वस्तु से दूर रहने हेतु या सजावटी हार स्वरुप न पहने। जब-जब हम येसु ख्रीस्त के क्रूस की ओर देखें हम इस बात पर चिंतन करें कि वे ईश्वर के सच्चे सेवक हैं जिन्होंने अपने प्रेरितिक कार्यो को अपने प्राणों की आहूति देकर, हमारे पापों की क्षमा हेतु अपने खून बहा कर पूरा किया है। हम अपने को दूसरी ओर बुराई के जाल में न पड़ने दें। संत पापा ने कहा कि यदि येसु के शिष्य बनने की चाह रखते हैं तो हमें उनका अनुसरण करने की आवयश्यकता है, हमें अपने जीवन को सुरक्षित रखे बिना ईश्वरीय प्रेम में पड़ोसियों के लिए अर्पित करना है।

माता मरियम जो अपने बेटे के संग कलवारी तक संयुक्त रहीं हमें सहायता करें कि हम सुसमाचार के साक्ष्य हेतु अपने जीवन की मुसीबतों और दुःखों की घड़ी में पीछे न हटें।

इतना कहने के बाद संत पापा ने सभों के साथ मिलकर देवदूत प्रार्थना का पाठ किया और सभों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया। 

31 August 2020, 14:20