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नील नदी एकता स्थापित करे, संत पापा

संत पापा फ्रांसिस ने मिस्र की नील नदी को एकता का स्रोत बनाने की मांग की।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

देवदूत प्रार्थना के उपरांत संत पापा ने सभों का अभिवादन करते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों, माता मरियम जो स्वर्ग में हैं जिन पर हम आज चिंतन करते हैं, “आशा की माता” हैं। उनके इस नाम को फिलहाल ही लोरेटो के स्तुति बिन्ती में शामिल किया गया है। हम उनकी मध्यस्थता द्वारा विश्व के उन स्थानों हेतु निवेदन करें जो आशा के भूखे हैं, शांति, न्याय और एक सम्मानजनक जीवन की चाह रखते हैं। उन्होंने कहा कि आज मैं उत्तरी नाईजीरिया के लोगों के लिए प्रार्थना करना चाहूँगा जो हिंसा और आतंवादी आक्रमणों के शिकार हैं।

उन्होंने विशेष रुप से मिस्र, इथोपिया और सूडान की याद की जो नील नदी से संबंधित असहमति को एक वार्ता के माध्यम सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं जिससे यह नदी विभाजन का नहीं वरन जीवन का स्रोत बन सकें। संत पापा ने इन देशों से निवेदन किया कि वे वार्ता का मार्ग अपनायें जिससे देश के निवासियों और विश्व की भलाई हो सके।

इसके बाद उन्होंने रोम और विश्व के विभिन्न देशों से आये हुए तीर्थयात्रियों, परिवारों, पल्ली समुदायों और संघों का अभिवादन किया। उन्होंने खास कर त्रियेस्ते के काथलिक कार्य दल संत जेरोलामो के युवाओं का अभिवादन किया।

संत पापा फ्रांसिस ने देवदूत प्रार्थना में उपस्थित लोगों के अलावे छुट्टियों में गये लोगों, बीमारों से ग्रस्ति, अकेलपन में जीवनयापन कर रहे व्यक्ति और विभिन्न तरह के सेवा कार्य में सलंग्न लोगों को स्वर्गारोहण पर्व की शुभकामनाएं प्रदान करते हुए मरिया मजोरे, मरियम के तीर्थ महागिरजाघऱ की भेंट करते हुए प्रार्थना करने का आहृवान किया।

अंत में उन्होंने अपने लिए प्रार्थना का निवेदन करते हुए पुनः कल मिलने की कामना कर सबों से विदा ली।  

         

15 August 2020, 15:06