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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस   (ANSA)

देवदूत प्रार्थना : स्वर्ग राज्य की खोज

देवदूत प्रार्थना के पूर्व संत पापा ने कहा कि इस रविवार का सुसमाचार पाठ (मती.13:44-52) उस अध्याय के अंतिम पदों से लिया गया है जिनको संत मती, स्वर्ग राज्य के दृष्टांत को समर्पित करते हैं। पाठ में तीन दृष्टांत हैं, जो केवल ढांचे के समान और बहुत छोटे हैं- छिपा खजाना, मूल्यवान मोती और जाल का दृष्टांत।

उषा मनोरमा तिरकी- वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार, 27 जुलाई 2020 (रेई)- वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में उपस्थित विश्वासियों के साथ संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 26 जुलाई को देवदूत प्रार्थना का पाठ किया, देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, "अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।"

इस रविवार का सुसमाचार पाठ (मती.13:44-52) उस अध्याय के अंतिम पदों से लिया गया है जिनको संत मती, स्वर्ग राज्य के दृष्टांत को समर्पित करते हैं। पाठ में तीन दृष्टांत हैं, जो केवल ढांचे के समान और बहुत छोटे हैं- छिपा खजाना, मूल्यवान मोती और जाल का दृष्टांत।

स्वर्ग राज्य के लिए येसु का प्रस्ताव

संत पापा ने कहा, "मैं प्रथम दो पर चिंतन करूँगा जिसमें स्वर्ग के राज्य की तुलना दो मूल्यवान चीजों से की गई है, अर्थात् खेत में छिपा खजाना और बहुमूल्य मोती।" खजाना एवं मोती पानेवाले व्यक्ति एवं व्यापारी की प्रतिक्रिया करीब एक समान है जो सब कुछ को बेच देते हैं ताकि अपने पसंद के उस खजाने को खरीद सकें। इन दो दृष्टांतों द्वारा येसु हमसे स्वर्ग के राज्य के निर्माण में शामिल होने का प्रस्ताव रखते हैं, वे ख्रीस्तीय जीवन की विशेषता को प्रस्तुत करते हैं जो स्वर्ग राज्य का जीवन है।

स्वर्ग राज्य की प्राप्ति हेतु तत्परता आवश्यक

स्वर्ग राज्य के लिए खुद को पूरी तरह समर्पित करनेवाले लोग सहर्ष सब कुछ को दांव पर लगा देते हैं, वे साहसी लोग हैं। वास्तव में, इन दोनों दृष्टांतों में व्यक्ति एवं व्यापारी अपनी सारी सम्पति बेच देते हैं, इस तरह वे भौतिक सुरक्षा का त्याग करते हैं। इससे हम समझ सकते हैं कि स्वर्ग राज्य का निर्माण न केवल ईश्वर की कृपा पर निर्भर है बल्कि उसे प्राप्त करने हेतु मनुष्यों की सक्रिय अभिलाषा की भी जरूरत है। ईश्वर की कृपा सब कुछ कर सकती है, केवल हमें उसे ग्रहण करने के लिए तैयार होना है, न कि उसका प्रतिरोध करना। कृपा सब कुछ कर सकती है किन्तु उसके लिए मेरे खुलेपन की जरूरत है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है?"

निर्णयात्मक और मूल मनोभाव

संत पापा ने कहा, "उस व्यक्ति और व्यापारी का मनोभाव जो अधिक मूल्यवान खजाने की खोज करते हैं, वे अपनी सम्पति छोड़ देते हैं, यह निर्णयात्मक और मूल मनोभाव है।" इसके अतिरिक्त ये दोनों ही मनोभाव आनन्द से आते हैं क्योंकि दोनों ने खजाना प्राप्त किया है।  

संत पापा ने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, "हम सुसमाचार के इन दो छवियों के मनोभाव को धारण करने के लिए बुलाये जाते हैं ताकि हम भी स्वर्ग राज्य को खोजने वाले सच्चे बेचैन व्यक्ति बन सकें। यह हमारी सांसारिक सुरक्षा के भारी बोझ - सम्पति की लोलुपता, लाभ और सत्ता की प्यास एवं सिर्फ अपनी चिंता करना आदि को छोड़ना है जो हमें स्वर्ग राज्य की खोज एवं निर्माण करने से रोकते हैं।"

औसत और आलसी जीवन

हमारे समय में, जिसके प्रति हम सभी सचेत हैं कुछ लोगों का जीवन औसत दर्जे के साथ और आलसी के रूप में समाप्त हो जाएगा क्योंकि वे सच्चे खजाने की खोज नहीं करते, वे आकर्षक किन्तु क्षणभंगुर वस्तुओं से संतुष्ट रहते जिनकी तेज रोशनी भ्रमित करती है क्योंकि वह अंधकार को स्थान देती है जबकि स्वर्ग राज्य का प्रकाश आतिशबाजी के समान सिर्फ कुछ क्षण के लिए नहीं होता पर जीवनभर हमारे साथ चलता है।

स्वर्ग का राज्य, दुनिया द्वारा प्रदान की जानेवाली सतही चीजों के विपरीत होता है, यह आलसी जीवन से अलग, एक खजाना है जो हर दिन जीवन को नवीन बनाता एवं विस्तृत क्षितिज की ओर ले चलता है। जिन्होंने इस खजाने को पाया है उनका हृदय रचनात्मक एवं जिज्ञासु होता है, वह नकल नहीं बल्कि खोजता, नये रास्तों का पता लगाता एवं उसपर आगे बढ़ता है जो उसे ईश्वर, पड़ोसियों एवं अपने आप से सच्चा प्यार करने के लिए प्रेरित करता है। उन लोगों का चिन्ह जो स्वर्ग राज्य के रास्ते पर चलते हैं, वह है रचनात्मकता, हमेशा अधिक करने की अभिलाषा। रचनात्मकता जो जीवन लेता एवं जीवन देता है, हमेशा देता है और कई तरह से जीवन समर्पित करने का रास्ता खोजता है।  

येसु छिपा खजाना एवं बहुमूल्य मोती

येसु जो एक छिपे खजाने एवं बहुमूल्य मोती हैं, दुनिया के सभी आनन्दों से बढ़कर हैं। यह जीवन का अर्थ खोजने का आनन्द है पवित्रता के साहस के लिए अपने आपको समर्पित करने का आनन्द।  

संत पापा ने कुँवारी मरियम से प्रार्थना की कि वे हमें स्वर्ग राज्य को प्रत्येक दिन खोजने में मदद दे ताकि ईश्वर का प्रेम जो येसु में प्रकट हुआ है, हमारे शब्दों एवं व्यवहार में प्रकट हो।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

27 July 2020, 15:56