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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस   (Vatican Media)

ईश वचन को ग्रहण करने का अर्थ है ख्रीस्त का आलिंगन

12 जुलाई को संत पापा फ्राँसिस ने देवदूत प्रार्थना का पाठ किया, जिसके पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित करते हुए बीज बोने वाले के दृष्टांत पर चिंतन किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार, 13 जुलाई 20 (रेई) – वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 12 जुलाई को उपस्थित विश्वासियों के साथ संत पापा फ्राँसिस ने देवदूत प्रार्थना का पाठ किया, देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

इस रविवार के सुसमाचार पाठ में (मती.13,1-23) येसु एक बड़ी भीड़ को एक दृष्टांत सुनाते हैं, जिसको हम सभी अच्छी तरह जानते हैं – बीज बोनेवाले का दृष्टांत, जो चार विभिन्न प्रकार की भूमि में बीज होता है। ईश्वर के वचन की तुलना बीज से की गई है। यह कोई निराकार शब्द नहीं है बल्कि स्वंय ख्रीस्त हैं, पिता के शब्द ने मरिया के गर्भ में शरीरधारण किया। इसलिए, ईश वचन को ग्रहण करने का अर्थ है ख्रीस्त का स्वागत करना।

ईश वचन को ग्रहण करना

ईश वचन को ग्रहण करने के कई तरीके हैं। उसे हम एक रास्ता के समान ग्रहण कर सकते हैं, जहाँ पक्षियाँ तुरन्त आकर दानों को चुग लेती हैं। यह मानसिक व्याकुलता की स्थिति है जो हमारे समय का एक बड़ा खतरा है। हम कई प्रकार के गपशप, कई विचारधाराओं, घर के भीतर एवं बाहर लगातार मन को भटकाने वाली चीजों के कारण चुप्पी के स्वाद को खो सकते हैं, प्रभु के साथ वार्तालाप करने का अवसर गवाँ सकते हैं। दुनिया की विभिन्न चीजों में व्यस्त और व्याकुल रहते हुए, हम विश्वास को खोने की जोखिम में पड़ सकते हैं, ईश्वर के वचन को अस्वीकार कर सकते हैं।

पथरीली भूमि   

दूसरी संभावना है कि हम ईश्वर के वचन को पथरीली भूमि के समान ग्रहण कर सकते हैं। जहाँ बीज जल्दी ही उग जाते हैं किन्तु उनकी जड़ें गहरी नहीं होतीं। यह उन लोगों का प्रतीक है जो ईश्वर के वचन को सुनते ही प्रसन्नता से ग्रहण करते किन्तु उनकी जड़ें नहीं होतीं वे वचन को आत्मसात् नहीं करते हैं। इस तरह जीवन की पहली कठिनाई, पीड़ा एवं परेशानी के सामने उनका कमजोर विश्वास तुरन्त विचलित हो जाता है, ठीक उसी तरह जिस तरह पथरीली भूमि पर गिरने वाला बीज सूख जाता है।

कंटीली झाड़ी  

एक तीसरी संभावना है – जहाँ येसु दृष्टांत में बतलाते हैं कि हम ईश्वर के वचन को कंटीली झाड़ी में गिरने वाले बीज के समान ग्रहण कर सकते हैं। कांटे, संसार की चिंता, सफलता एवं धन के मोह हैं जहाँ वचन थोड़ा बढ़ता किन्तु दब जाता, कमजोर हो जाता अथवा मर जाता एवं फल नहीं लाता है।

अच्छी भूमि  

चौथी संभावना है- जहाँ हम ईश्वर के वचन को अच्छी भूमि की तरह ग्रहण कर सकते हैं। केवल यहाँ बीज जड़ जमाता और फल लाता है। इस उपजाऊ भूमि पर गिरने वाला बीज उन लोगों का प्रतीक है जो ईश वचन को सुनते, उसे ग्रहण करते, हृदय में रखते तथा प्रतिदिन अपने जीवन में उसका अभ्यास करते हैं।

संत पापा ने कहा, "बीज बोने का यह दृष्टांत सभी दृष्टांतों की "माता" के समान है क्योंकि यह वचन को सुनने के लिए कहता है। दृष्टांत हमें स्मरण दिलाता है कि यह एक फलप्रद एवं प्रभावशाली बीज है जिसको ईश्वर बर्बादी की चिंता किये बिना, बड़ी उदारता के साथ सभी ओर बिखेरते हैं। ईश्वर का हृदय ऐसा ही है। हम में से हरेक एक भूमि है जहाँ वचन का बीज पड़ता है इससे कोई भी वंचित नहीं है। हम प्रत्येक को वचन प्रदान किया गया है।

फलप्रद बनना अपने आप पर निर्भर

हम अपने आप से पूछ सकते हैं कि मैं किस प्रकार की भूमि हूँ? क्या मैं रास्ता, पथरीली जमीन अथवा झाड़ी में वचन को ग्रहण तो नहीं करता? यदि हम चाहेंगे तो ईश्वर की कृपा से अच्छी भूमि बन सकते हैं अच्छी देखभाल के साथ उसे बढ़ा सकते हैं और बीज को परिपक्व होने दे सकते हैं। यह हमारे हृदय में डाला गया है किन्तु उसे फलप्रद बनाना हम पर निर्भर करता है। बहुधा हम कई प्रकार की चिंताओं से घिरे होते हैं, कई प्रकार की आवाजों को सुनते हैं और उन आवाजों एवं शब्दों के बीच प्रभु की आवाज को सुनना कठिन हो जाता है जो हमें मुक्त कर सकते हैं। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि हम ईश्वर के वचन को पढ़ने के द्वारा सुनने की आदत डालें।

संत पापा ने अपनी सलाह दुहराते हुए कहा, "अपने साथ हमेशा सुसमाचार की एक छोटी पुस्तिका रखें। अपने पॉकेट अथवा थैला में पॉकेट संस्करण के सुसमाचार को लेकर चलें। इस तरह आप हर दिन इसका छोटा अंश पढ़ेंगे और समझने की कोशिश करेंगे तो प्रभु के इस बीज को मैं किस प्रकार की भूमि में ग्रहण कर रहा हूँ।"

माता मरियम, उपजाऊ भूमि की सच्ची आदर्श

संत पापा ने माता मरियम की याद करते हुए कहा, "कुँवारी मरियम, अच्छी और उपजाऊ भूमि की सच्ची आदर्श, अपनी प्रार्थना से हमें मदद दे कि हम झाड़ीयुक्त  अथवा पथरीली भूमि न बनें जिससे कि हम अपने एवं अपने भाई बहनों के लिए अच्छे फल ला सकें।"  

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

13 July 2020, 15:11