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पोलैंड में संत पापा के  जन्म दिन  पर फूल चढाते हुए पोलैंड में संत पापा के जन्म दिन पर फूल चढाते हुए  (ANSA)

संत पापा ने नई संस्कृति संस्थान को भेजा आशीर्वाद

संत पापा फ्राँसिस ने संत जॉन पॉल द्वितीय संस्कृति संस्थान के उद्घाटन के लिए पोंटिफिकल अंजेलिकुम विश्वविद्यालय के रेक्टर को एक पत्र भेजा।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 18 मई 2020 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस ने संत पापा जॉन पॉल द्वितीय की शतवर्षीय जुबली के दिन अंजेलिकुम विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र संकाय के भीतर संत जॉन पॉल द्वितीय के नाम पर शुरु संस्कृति संस्थान के उद्घाटन के अवसर पर विश्वविद्यालय के रेक्टर माइकेल पालुक को पत्र लिखा।

अपने पत्र में संत पापा ने लिखा,ʺ विश्वविद्यालय के सबसे शानदार पूर्व छात्र, संत जॉन पॉल द्वितीय के जन्म के शताब्दी वर्ष पर, उनके नाम पर दर्शनशास्त्र संकाय के भीतर संस्कृति संस्थान का उद्घाटन एंजेलिकम में किया जा रहा है। इस पहल के लिए, मैं पूरे शैक्षणिक समुदाय और इस कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों, विशेष रूप से दो पोलिश फाउंडेशन, फुतुरा इयूवेंटा और संत निकोलस के प्रतिनिधियों को शुभकामनाएं देता हूँ, जो नए संस्थान का समर्थन करते हैं।ʺ

संत पापा जॉन पॉल द्वितीय ने 1946 से 1928 तक एंजेलिकम में दर्शनशास्त्र की पढ़ाई की थी।

प्रेरक और वास्तुकार

संत पापा फ्राँसिस ने लिखा कि संस्थान का मुख्य उद्देश्य समकालीन संस्कृति को प्रतिबिंबित करना है। ऐसा करने के लिए, आयोजक अपने व्यापक अर्थों में प्रख्यात दार्शनिकों, धर्मशास्त्रियों और संस्कृति के पुरुषों और महिलाओं के सहयोग की तलाश करना चाहते हैं। संत जॉन पॉल द्वितीय इस परियोजना के प्रेरक और महत्वपूर्ण वास्तुकार दोनों हैं। हम उनके समृद्ध और बहुमुखी विरासत के लिए धन्यवाद है जिन्हें उन्होंने हमारे लिए छोड़ दिया है। वे खुले और चिंतनशील व्यक्ति थे। ईश्वर, मनुष्य, सृष्टि, इतिहास और कला के लिए उनका जुनून था।

मानवता के लिए गहरा सम्मान

संत पापा जॉन पॉल द्वितीय ने अपने पहने प्रेरितिक उद्बोधन में लिखा था, “हम सभी संस्कृतियों, सभी वैचारिक अवधारणाओं, भली इच्छा वाले सभी लोगों से संपर्क करते हैं। हम सम्मान और विवेक के साथ संपर्क करते हैं कि चूंकि प्रेरितों के समय से ही मिशनरी मनोभाव को चिह्नित किया गया है। जिसका उदाहरण हम, एथेंस के एरोपागुस में संत पौलुस के संबोधन में पाते हैं। मिशनरी मनोभाव हमेशा मनुष्य के लिए गहरे सम्मान की भावना के साथ शुरू होता है, जिसके लिए मनुष्य ने अपनी आत्मा की गहराई में और महत्वपूर्ण समस्याओं से निपटने के लिए इसका उपयोग किया है। यह पवित्र आत्मा के द्वारा लाई गई हर चीज का सम्मान करता है, जो जहां चाहे आता और जाता है।(रेडेमटोर होमिनिस, 12; सीएफ यूनेस्को, 2 जून 1980)।

आज की सांस्कृतिक चुनौतियों की व्याख्या

संत पापा ने सराहना की कि जॉन पॉल संस्कृति संस्थान अंजेलिकुम विश्वविद्यालय का हिस्सा है।

उन्होंने लिखा, "अंजेलिकुम," "एक अकादमिक समुदाय जिसमें दुनिया भर के प्रोफेसर और छात्र शामिल हैं और यह आज की संस्कृतियों की महत्वपूर्ण चुनौतियों की व्याख्या करने के लिए एक उपयुक्त स्थान है।"

उन्होंने कहा कि दोमेनिकन परंपरा - जो विश्वविद्यालय का मार्गदर्शन करती है - निश्चित रूप से परियोजना का पक्ष लेगी, "ताकि यह सच्चाई की स्वतंत्रता, साहस और बौद्धिक ईमानदारी की विशेषता हासिल करेगी।"

अंत में, संत पापा फ्राँसिस ने संत जॉन पॉल द्वितीय संस्कृति संस्थान के लिए अपनी शुभकामनाएं व्यक्त कीं और इसमें शामिल सभी लोगों पर अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।   

18 May 2020, 16:51