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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (Vatican Media)

पवित्र आत्मा हमारे कदमों को आलोकित करते हैं, संत पापा

वाटिकन की लाईब्रेरी से लाईव प्रसारण के माध्यम से रविवार 17 मई को संत पापा फ्राँसिस ने स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया। स्वर्ग की रानी प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित किया।

उषा मनोरम ातिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, रविवार, 17 मई 2020 (रेई)- वाटिकन की लाईब्रेरी से लाईव प्रसारण के माध्यम से रविवार 17 मई को संत पापा फ्राँसिस ने स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया। स्वर्ग की रानी प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, "अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।"

इस रविवार का सुसमाचार पाठ (योहन 14, 15-21) आज्ञाओं के पालन एवं पवित्र आत्मा की प्रतिज्ञा के दो संदेशों को प्रस्तुत करता है।

येसु अपने प्रति प्रेम को आज्ञाओं के पालन से जोड़ते हैं और अपने विदाई के भाषण में इस पर जोर देते हैं- "यदि तुम मुझे प्यार करोगे तो मेरी आज्ञाओं का पालन करोगे।"  (पद. 15); "जो मेरी आज्ञाएँ जानता और उनका पालन करता है वही मुझे प्यार करता है।" (पद. 21). येसु उन्हें प्यार करने के लिए कहते हैं किन्तु बतलाते हैं कि यह प्रेम, चाहने मात्र या भावना मात्र से प्रकट नहीं होता, बल्कि उनके रास्ते पर चलने की जिम्मेदारी की मांग करता है अर्थात् पिता की इच्छा पर चलने की मांग करता है और यह पारस्परिक प्रेम की आज्ञा में अभिव्यक्त हुआ है - पहला प्रेम है कि उन्होंने येसु को हमारे लिए प्रदान किया। जिस प्रकार मैंने तुम लोगों को प्यार किया है उसी प्रकार तुम भी एक-दूसरे को प्यार करो। (यो. 13,34). उन्होंने नहीं कहा, "मुझे प्यार करो जैसा कि मैंने तुमको प्यार किया है बल्कि एक-दूसरे को प्यार करो जैसा मैंने प्यार किया है। बदले में हमसे कुछ मांगे बिना वे हमें प्यार करते हैं। यह येसु का मुफ्त प्यार है वे उसके बदले कभी कुछ नहीं मांगते। वे चाहते हैं कि उनका मुफ्त प्यार हमारे जीवन में आपस में एक ठोस आकार ले, यही उनकी इच्छा है।"

पवित्र आत्मा हमारे सहायक

इस रास्ते पर चलने हेतु शिष्यों की मदद करने के लिए येसु पिता से प्रार्थना की प्रतिज्ञा करते हैं कि वे एक दूसरा सहायक भेज देंगे। (पद.16), अर्थात् एक सांत्वना दाता, एक रक्षक उनका स्थान लेगा जो उन्हें वचन को सुनने एवं उसका पालन करने का साहस प्रदान करेगा। यह पवित्र आत्मा हैं, ईश्वर का प्रेम उपहार है जो ख्रीस्तियों के हृदय में आता हैं। येसु के मरने और जी उठने के बाद उनका प्रेम उन लोगों को प्रदान किया गया है जो उनपर विश्वास करते एवं पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम पर बपतिस्मा लेते हैं। पवित्र आत्मा ही उनका मार्गदर्शन करते, शक्ति प्रदान करते ताकि वे जीवन के रास्ते पर चल सकें, विपत्ति और कठिनाई में, खुशी और गम में भी, येसु के रास्ते पर चल सकें। यह पवित्र आत्मा के प्रति उदार बने रहने से संभव है ताकि उनकी सक्रिय उपस्थिति से न केवल सांत्वना प्राप्त करें बल्कि हृदयों को बदल सकें, सच्चाई एवं प्रेम के लिए उसे खोल सकें।

संत पापा ने कहा, "गलतियाँ और पाप जिनके शिकार हम सभी होते हैं इन अनुभवों के सामने पवित्र आत्मा हमें मदद करते हैं कि हम फिर उसके शिकार न बनें और येसु के उन शब्दों को पूरी तरह जी सकें", "यदि तुम मुझे प्यार करते हो तो मेरी आज्ञाओं का पालन करो।" (पद. 15)

ईश वचन हमारे कदमों को आलोकित करता

आज्ञाएँ हमें ऐनक की तरह नहीं दिये गये हैं जिनमें हम अपनी दयनीय एवं विषम स्थितियों को देख सकें। येसु का वचन हमारे लिए जीवित वचन के रूप में दिया गया है जो हृदय और जीवन को परिवर्तित एवं नवीकृत करता है जो दण्ड नहीं दिलाता बल्कि चंगाई प्रदान करता और क्षमा देता है। ईश्वर की दया यही है। ईश वचन हमारे लिए पाँव का दीपक है। जो हमें स्वतंत्र व्यक्ति बनाता, ऐसा व्यक्ति जो प्यार करने जानता और जिसने समझ लिया है कि जीवन एक मिशन है जो उन पर विश्वास करने वालों के लिए किये गये ईश्वर के महान कार्यों की घोषणा है।

कुँवारी मरियम से प्रार्थना

धन्य कुँवारी मरियम कलीसिया की आदर्श जो ईश्वर के वचनों को सुनना एवं पवित्र आत्मा के वरदानों को ग्रहण करना जानती है, हमें सुसमाचार के आनन्द को जीने और पवित्र आत्मा से समर्थन प्राप्त करने में मदद दे, जो दिव्य अग्नि हैं और हृदयों को उष्मा प्रदान करते एवं हमारे कदमों को आलोकित करते हैं।  

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

18 May 2020, 12:07