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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (Vatican Media)

ऊरबी एत ओरबी में संत पापा का संदेश

संत पापा फ्रांसिस प्रभु येसु ख्रीस्त के पुनरूत्थान, पास्का पर्व के अवसर पर रोम और पूरे विश्व के नाम अपना संदेश प्रेषित करते हुए सभों के ऊपर पुनर्जीवित प्रभु येसु की आशीष की कामना की।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

प्रिय भाइयो एवं बहनों, खुश पास्का पर्व। 

आज कलीसिया की यह उद्घोषणा पूरे विश्व में गूंजित होती है, “येसु ख्रीस्त जी उठे हैं, वे सचमुच जी उठे हैं।” एक नई आग की भांति, यह शुभ संदेश रात्रि में दहकती है, क्योंकि विश्व में मानव परिवार पहले ही महामारी के दंश, एक महत्वपूर्ण चुनौती से व्यथित है। ऐसी रात में कलीसिया की आवाज, “ख्रीस्त, मेरी आशा, जीवित हैं”, ध्वनित होती है।

पास्का एक “संस्पर्श”

यह एक अलग प्रकार का “संस्पर्श” है जो एक हृदय से दूसरे हृदय में एक संदेश स्वरुप फैलता है क्योंकि हर मानव का हृदय इस खुश खबरी की प्रतीक्षा में है। यह आशा का स्पर्शसंचार है, “ख्रीस्त, मेरी आशा जीवित हैं।” यह कोई जादुई नुसख़ा नहीं जो हमारी मुसीबतों को दूर करती हो। नहीं, येसु का पुररूत्थान ऐसा नहीं है। बल्कि, यह बुराई की जड़ों में प्रेम की जीत है, एक ऐसी जीत जो मृत्यु और दुःख को हमसे “बाहर नहीं निकलती” है, लेकिन उन गर्त से पार होते हुए बुराई को अच्छाई में परिणत करती है, जो  ईश्वरीय शक्ति की एक अद्वितीय पहचान है।

पुनर्जीवित ईश्वर कोई दूसरे नहीं वरन हमारे लिए क्रूसित येसु ख्रीस्त हैं। उनके महिमामय शरीर में हम अमार्जनीय घाव की निशानी को पाते हैं, वे घाव जो हमारे लिए आशा की खुली खिड़की बन गये हैं। हम उसी प्रभु की ओर अपनी निगाहें फेरें जो घावों से प्रभावित मानवता को चंगाई प्रदान करते हैं।

संत पापा की संवेदना

संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि मैं आज सबसे पहले उन लोगों की याद करता हूँ जो कोरोना वायरस की महामारी से प्रत्यक्ष रुप में प्रभावित हैं, बीमारों, मृतजनों के परिजन जो अपने प्रियजनों को खोने से दुःखी हैं, उनमें से कुछ जिन्होंने अपनों को अंतिम विदाई तक नहीं दे सका। जीवनदाता ईश्वर हमारे बीच से गुजरे सभों को अपने राज्य में स्वागत करें और उन्हें अपनी सांत्वना और धीरज से भर दें जो अब भी दुःखद परिस्थिति में हैं, विशेषकर बुजूर्गों को और उन्हें जो अकेले हैं। वे उन लोगों पर अपनी कृपादृष्टि बनाये रखें जो अतिसंवेदनशील हैं, खासकर वे लोग जो सेवा क्रेन्दों में कार्यारत हैं या जो बैरकों और कैदखानों में हैं। बहुतों के लिए यह अकेलेपन का पास्का है क्योंकि वे महामारी के कारण शारीरिक दुःख और कठिनाइयों का सामना करने के साथ-साथ आर्थिक तकलीफों के भी शिकाऱ हैं।

महामारी का प्रभाव

इस महामारी ने हमें न केवल मानवीय निकटता से वंचित किया है वरन हम अपने को संस्कारों से भी वंचित पाते हैं जो हमारे लिए सांत्वना के स्रोत हैं, विशेष कर पवित्र यूखारीस्त और पापस्वीकार संस्कार। बहुत से देशों में विश्वासी इसे ग्रहण नहीं कर सकते हैं, लेकिन इस विकट परिस्थिति में भी ईश्वर ने हमें अपने में अकेला नहीं छोड़ा है। हमारी प्रार्थनामयी एकता हमें यह एहसास दिलाती है कि उनका सहचर्य हमारे साथ है।(स्त्रो.138.5) वे हमें कहते हैं, “डरो मत, मैं पुनर्जीवित होकर अब भी तुम्हारे साथ हूँ।” (रोमन धर्मविधि, पास्का रविवार का प्रवेश भजन)

हमारे नायकगण

संत पापा ने कहा कि येसु ख्रीस्त हमारे पास्का, चिकित्सकों और नर्सों को अपनी शक्ति और आशा से भर दें, जो थकान और अपने स्वास्थ्य की परवाह किये बिना हर जगह अपनी सेवा के माध्यम पड़ोसी प्रेम का साक्ष्य दे रहे हैं। हम अपनी कृतज्ञता और प्रेम उनके लिए व्यक्त करते हैं, वे जो अपनी कर्मठता में समाज के लोगों हेतु अति जरूरी सेवाओं की पूर्ति में लगे हैं, विधि-व्यवस्था और सैन्य दल जिन्होंने विभिन्न देशों में लोगों की कठिनाइयों और दुःखों को दूर करने की कोशिश की है।

जीवन में परिवर्तन  

इन सप्ताहों में, लाखों लोगों के जीवन में अचानक परिवर्तन आ गया है। बुहतों से लोगों के लिए अपने घरों में रहना उन्हें अपने जीवन पर चिंतन हेतु अवसर प्रदान किया है, वे जीवन की भाग-दौड़ से तटस्थ हैं तथा अपने प्रियजनों के साथ रहने का आनंद उठा रहे हैं। लेकिन बहुतों के लिए यह चिंता का समय है, वे अपने अनिश्चित भविष्य, अपने कार्य को लेकर चिंतित हैं जो इस विकट परिस्थिति से उत्पन्न होने वाली है। मैं राजनीति नेताओं को प्रोत्साहित करता हूँ कि वे जनता की भलाई हेतु कार्य करें, उनके लिए जरुरी चीजें उपलब्ध करें जिससे सभी सम्मानजनक जीवनयापन कर सकें। संत पापा ने आग्रह किया कि परिस्थिति में सुधार के अनुरूप लोगों को पुनः सामान्य जीवन शुरू करने में मदद किया जाये।

यह उदासीनता का वक्त नहीं

संत पापा कहा कि यह एक उदासीनता का समय नहीं है क्योंकि विश्व महामारी से प्रभावित है और हमें एकजुट होकर इसका सामना करने की जरुरत है। पुनर्जीवित येसु गरीबों, हाशिये में रहने वालों, प्रवासियों और परित्यक्त लोगों को आशा प्रदान करें। ये अति संवेदनशील भाई-बहनें जो हमारे समाज और विश्व के हर जगहों में सबसे निचले स्तर में रहते हैं, अपने में परित्यक्त न रहें। हम यह सुनिश्चित करें कि वे अपने में मूलभूत जरुरत की चीजों से वंचित न रहें विशेषकर दवाईयों और स्वास्थ्य संबंधित बातों को लेकर। इस विकट परिस्थिति में अंतरराष्ट्रीय नीति-नियमों में थोड़ी रियायत लाया जाये क्योंकि यह देशों के नागरिकों को प्रर्याप्त सुविधा प्रदान करने में कठिनाई उत्पन्न करती है, वहीं धनी देशों को चाहिए कि वे गरीब देशों को अति आवश्यक वस्तुओं की पूर्ति के संबंध में कर माफ करने की असंभव परिस्थिति में न होने पर भी, जहाँ तक बन पड़े थोड़ी कटौती लायें।

यह स्वार्थी बनने का वक्त नहीं

संत पापा ने कहा कि यह अपने में स्वार्थी बने रहने का समय नहीं है क्योंकि चुनौतियां जिनका हम सामना कर रहे हैं व्यक्तियों में भेदभाव किये बिना, सभों के लिए बराबर हैं। विश्व के भिन्न स्थल कोरोना वायरस की चपेट में हैं और इस समय मैं विशेष रुप से यूरोप की चिंता करता हूँ। द्वितीय विश्व युद्ध के उपरांत यह स्नेही भू-भाग अपने में पुनः खड़ा हुआ, हम ठोस रुप से एकात्मकता की भावना हेतु कृतज्ञ हैं जिसके फलस्वरुप यह अतीत में शत्रुओं पर विजयी हुआ। हमारे लिए वर्तमान परिस्थिति में पहले की अपेक्षा अभी यह और भी जरुरी है कि ये विरोधी ताकत अपने में मजबूत न हों वरन हम सभी अपने को एक परिवार के अंग स्वरुप देखें और एक दूसरे की सहायता करें। यूरोपीय संघ इस वक्त इस महत्वपूर्ण चुनौती से जूझ रहा है जो इसके भविष्य को और पूरे विश्व को कई रुपों में प्रभावित करेगा। सृजनात्मक उपयों को समाने लाते हुए हम अपनी एकात्मकता को पुनः प्रदर्शित करने हेतु इस अवसर को अपने हाथों से न जाने दें।

यह विभाजन का वक्त नहीं

यह हमारे लिए विभाजन का समय नहीं है। येसु ख्रीस्त जो हमारी शांति हैं उन लोगों को अपनी ज्योति आलोकित करें जो युद्धों के लिए जिम्मेदार हैं जिससे वे विश्व की इस चिंतनीय परिस्थिति में वैश्विक युद्ध विराम का समर्थन तुरंत कर सकें। यह हमारे लिए हथियारों के उत्पादान और उनकी बिक्री का समय नहीं वरन अपने वृहद अर्थ को दूसरों की सेवा और लोगों के जीवन की सुरक्षा में व्यय करने की मांग करता है। यह परिस्थिति लम्बे समय से चली आ रही युद्धों को हमेशा के लिए समाप्त करने का समय हो सकती है जिसके कारण सिरिया, यमन, ईराक और लेबनान रक्तरंजित हुआ है। यह वह अवसर बने जहाँ इस्रराएल और फिलिस्तीन अपने में शांति कायम हेतु पुनः वार्ता हेतु आगे आयें जिससे स्थायी समाधान निकला जा सकें और दोनों देश चैन की जिन्दगी जी सकें। पूर्वी उक्रेन प्रांत में रहने वाले जिनका जीवन तकलीफों से भरा है अपने में इति हो। अफ्रीका के विभिन्न देशों में निर्दोषों के विरूद्ध किये जाने वाले आतंकी हमलें, खत्म हो।

यह विस्मृति का वक्त नहीं

संत पापा ने कहा कि यह समय हमारे लिए भूलने का नहीं है। हम जिस मुसीबत का सामना अभी कर रहे हैं वह हमें दूसरी कठिनाइयों को न भूलने दे जो बहुत से लोग प्रभावित करता है। जीवनदाता ईश्वर एशिया और अफ्रीका के लोगों संग रहें जो मानवतावादी गंभीर कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, जैसे कि उत्तरी मोजाम्बिक के काबो डेलगाडो की स्थिति है। वे उन प्रवासियों के लिए बल बनें जो युद्ध, अकाल और भूखमारी के कारण प्रवासन हेतु विवश हैं। वे शरणार्थियों और प्रवासियों को सुरक्षा प्रदान करें, बहुत से बच्चे जो असहनीय परिस्थिति में हैं विशेष कर लीबिया और यूनान तथा तुर्की के सीमावर्ती प्रांतों में। वेनेजुऐला के लोगों को जो देश में गंभीर राजनीतिक, सामाजिक-आर्थिक और स्वास्थ्य के संकट से जुझ रहे हैं ईश्वर अंतरराष्ट्रीय सहायता के माध्यम उनकी परिस्थिति में सुधार और समाधान लाने हेतु मदद करें।

येसु हमारी आशा

प्रिय भाइयो एवं बहनों, संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि उदासीनता, स्वार्थ, विभाजन और विस्मृति जैसे शब्दों को हम इस परिस्थिति में सुनने की चाह नहीं रखते हैं। हम इन शब्दों को हमेशा के लिए अपने जीवन से अलग रखने की चाह रखते हैं। ये हमारे जीवन में तब प्रबल होते नजर आते जब भय और मृत्यु हम पर हावी हो जाती है, अर्थात जब हम पुनर्जीवित येसु को अपने जीवन और हृदयों में विजयी होने नहीं देते हैं। प्रभु येसु ख्रीस्त, जिन्होंने मृत्यु पर विजय पाई है और हमारे लिए आनंत मुक्ति को लाया है, मानवता के मध्य के दुःख के अधंकार को दूर करें और हमें अपने महिमामय ज्योति में ले चलें, जो कभी खत्म नहीं होती है। 

अपने संदेश के अंत में संत पापा फ्रांसिस ने पूरी कलीसिया को पुनर्जीवित प्रभु येसु ख्रीस्त के पास्का का आशीर्वाद प्रदान किया।

12 April 2020, 11:57