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रोम का पवित्र आत्मा गिरजाघर रोम का पवित्र आत्मा गिरजाघर 

पवित्र आत्मा गिरजाघर में दिव्य करुणा रविवार मनायेंगे संत पापा

इस साल दिव्य करूणा का पर्व, जिसको पास्का पर्व के बाद वाले रविवार को मनाया जाता है उसका 20वाँ साल है। संत पापा फ्राँसिस इस पर्व को रोम के पवित्र आत्मा गिरजाघर में रविवार को ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए मनायेंगे।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

रोम, शनिवार, 18 अप्रैल 2020 (रेई)- इस साल दिव्य करूणा का पर्व, जिसको पास्का पर्व के बाद वाले रविवार को मनाया जाता है उसका 20वाँ साल है। संत पापा फ्राँसिस इस पर्व को रोम के पवित्र आत्मा गिरजाघर में रविवार को ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए मनायेंगे। 

पवित्र आत्मा का गिरजाघर संत पेत्रुस महागिरजाघर से करीब 200 मीटर की दूरी पर स्थित है। यह दिव्य करूणा का तीर्थस्थल एवं उसकी भक्ति का केंद्र है। संत पापा फ्राँसिस 19 अप्रैल को यहां ख्रीस्तयाग अर्पित कर दिव्य करुणा रविवार मनायेंगे। ख्रीस्तयाग को लाईव प्रसारित किया जाएगा। इटली एवं वाटिकन में कोरोना वायरस लॉकडाउन के कारण बहुत कम लोग उनके साथ ख्रीस्तयाग में शरीक होंगे।

संत फौस्तीना एवं संत जॉन पौल द्वितीय

दिव्य करूणा की भक्ति 20वीं सदी में पोलैंड की धर्मबहन संत फौस्तीना कोवालस्का के द्वारा अधिक लोकप्रिय हुई जब येसु ने उन्हें दर्शन देकर और उनसे वार्तालाप कर दिव्य करुणा का प्रचार करने की मांग की।

संत पापा जॉन पौल द्वितीय ने 30 अप्रैल 2000 को संत फौस्तीना की संत घोषणा के अवसर पर, पास्का के दूसरे रविवार को दिव्य करुणा रविवार मनाने की घोषणा की। इस तरह दिव्य करुणा के पर्व को विश्वव्यापी कलीसिया में मनाया जाने लगा।

संत पापा जॉन पौल द्वितीय अपने परमाध्यक्षीय काल के शुरू से ही दिव्य करुणा पर विशेष भक्ति रखते थे जैसा कि सिस्टर फौस्तीना द्वारा इसे बढ़ावा दिया गया था। सिस्टर फौस्तीना का निधन 1938 में 33 साल की उम्र में क्राकॉव में हुआ था। संत पापा जॉन पौल द्वितीय उस समय वहाँ के महाधर्माध्यक्ष थे, जो सन् 1978 में संत पापा चुने गये। 

संत पापा जॉन पौल द्वितीय जिन्होंने सिस्टर फौस्तीना को 18 अप्रैल 1993 को, पास्का के दूसरे रविवार के दिन धन्य घोषित किया था, उनका निधन भी 2 अप्रैल 2005 को पास्का के दूसरे रविवार को हुआ था।

संत पापा जॉन पौल द्वितीय को भी 1 मई 2011 को दिव्य करुणा रविवार के दिन धन्य घोषित किया गया था और संत घोषणा भी 27 अप्रैल 2014 को दिव्य करुणा रविवार के दिन ही किया गया।

7 अप्रैल 2002 को दिव्य करुणा रविवार के उपलक्ष्य में प्रकाशित एक प्रेरित पत्र में संत पापा जॉन पौल द्वितीय ने उन काथलिक विश्वासियों को दण्डमोचन प्रदान किया था जो उस दिन पापस्वीकार करते, परमप्रसाद ग्रहण करते एवं दिव्य करुणा की रोजरी विन्ती करते हैं। बाद में इस दण्डमोचन को औपचारिक रूप से प्रेरितिक दण्डमोचन की ओर से डिक्री घोषित किया गया।

संत पापा जॉन पौल द्वितीय एवं संत पापा फ्राँसिस

बुधवार को लाईव प्रसारण के माध्यम से आमदर्शन समारोह के दौरान संत पापा फ्राँसिस ने पौलैंड के तीर्थयात्रियों को सम्बोधित कर कहा था कि रविवार 19 अप्रैल को वे दिव्य करुणा का महापर्व मनायेंगे जिसकी स्थापना संत पापा जॉन पौल द्वितीय ने प्रभु येसु के आग्रह पर संत फौस्तीना को जवाब देते हुए की थी।

येसु ने सिस्टर फौस्तीना से कहा था, "मैं चाहता हूँ कि दिव्य करुणा का पर्व सभी आत्माओं के लिए शरण और आश्रय हो। मानव जाति तब तक शांति नहीं पा सकता जब तक कि वह भरोसे के साथ मेरी दया के पास न लौटे।”

संत पापा ने आह्वान किया है कि करुणावान ईश्वर के पास दृढ़ भरोसा रखकर हम कलीसिया एवं सारी मानवजाति के लिए प्रार्थना करें, विशेषकर उन लोगों के लिए जो इस अत्यन्त कठिन समय में  कष्ट झेल रहे हैं।

दिव्य करुणा को लेकर संत पापा जॉन पौल द्वितीय एवं संत पापा फ्राँसिस के बीच गहरा संबंध है। संत पापा जॉन पौल द्वितीय के प्रेरितिक विश्व पत्र "दिभेस एन मिसेरीकोरदिया" (करुणा के धनी) से संत पापा फ्राँसिस अक्सर उद्धृत करते हैं।

इसी संदर्भ में हम करुणा की असाधारण जयन्ती की याद कर सकते हैं जिसका आह्वान संत पापा फ्राँसिस ने 8 दिसम्बर 2015 से 20 नवम्बर 2016 तक किया था।

दोनों ही संत पापाओं में मानव प्रतिष्ठा, गरीबी, रोगी और पीड़ित लोगों के प्रति विशेष संवेदनशीलता देखने को मिलती है। संत पापा फ्राँसिस कलीसिया को "अस्पताल क्षेत्र" के रूप में प्रस्तुत करते हैं जो सबसे पिछड़े, खोये हुए और अंतिम लोगों तक पहुँचती है। परमाध्यक्ष चयन की संध्या उन्होंने कहा था कि कलीसिया अपने आप से बाहर निकलकर गाँवों में जाने के लिए बुलायी गयी है न केवल भौतिक किन्तु अस्तित्व की दूरी के रूप में पाप, पीड़ा, अज्ञानता और धर्म की उदासीनता, बौद्धिक धाराओं और हर प्रकार के दुःख में पड़े लोगों के पास।"

आज दिव्य करूणा की भक्ति विश्वभर में की जाती है। दुनियाभर में कई गिरजाघर एवं तीर्थस्थल दिव्य करुणा को समर्पित हैं। दिव्य करूणा को समर्पित सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थल पोलैंड के क्रकॉव में जहाँ संत फौस्तीना के अवशेष रखे गये हैं। इसकी स्थापना 1999-2002 के बीच की गयी थी। तीर्थस्थल का तीन संत पापाओं ने दर्शन किया है। विश्वभर के हजारों तीर्थयात्री इसका दर्शन करने हर साल आते हैं।

18 April 2020, 14:50