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वाटिकन के सन्त मर्था प्रेरितिक आवास में ख्रीस्तयाग वाटिकन के सन्त मर्था प्रेरितिक आवास में ख्रीस्तयाग  (AFP or licensors)

कोविद-19 से उत्पन्न क्षुधा पीड़ितों को याद किया सन्त पापा ने

वाटिकन स्थित सन्त मर्था प्रेरितिक आवास के प्रार्थनालय में शुक्रवार को ख्रीस्तयाग अर्पण के अवसर पर सन्त पापा ने उन लोगों को याद किया जो कोरोना वायरस से उत्पन्न निर्धनता एवं भुखमरी के शिकार बन रहे हैं।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 3 अप्रैल 2020 (रेई,वाटिकन रेडियो): वाटिकन स्थित सन्त मर्था प्रेरितिक आवास के प्रार्थनालय में शुक्रवार को ख्रीस्तयाग अर्पण के अवसर पर सन्त पापा ने उन लोगों को याद किया जो कोरोना वायरस से उत्पन्न निर्धनता एवं भुखमरी के शिकार बन रहे हैं।  उन्होंने उन लोगों को भी प्रभु ईश्वर की करुणा के सिपुर्द किया जो इस महामारी से ग्रस्त लोगों की सेवा में जुटे हैं।  

महामारी के उपरान्त समस्याएँ

चालीसाकाल के पाँचवे सप्ताह की प्रार्थना करते हुए सन्त पापा ने स्तोत्र ग्रन्थ के 30 वें भजन के इन शब्दों का उच्चार कर ख्रीस्तयाग आरम्भ किया "मुझ पर दया कर, प्रभु, क्योंकि मैं संकट में हूँ; मेरे शत्रुओं के हाथों से मुझे छुड़ा और मेरे आततातियों से मेरा उद्धार कर: प्रभु, मुझे भ्रमित मत होने दे"।

कोरोना वारयस महामारी के बाद की स्थिति पर चिन्तन करते हुए सन्त पापा ने कहा, "लोगों ने  महामारी के बाद की स्थिति के बारे में सोचना शुरू कर दिया है। आने वाली सभी समस्याओं पर वे चिन्तित हैं, निर्धनता, बेरोज़गारी, और भुखमरी की समस्याएँ। हम उन सभी लोगों के लिए प्रार्थना करते हैं जो आज बीमारों की सेवा में लगे हैं, किन्तु कल के बारे में सोचना भी अनिवार्य है, सबकी मदद के बारे में सोचना अनिवार्य है।"

दुखों का माता मरियम से याचना करते हुए सन्त पापा ने कहा, "खजूर रविवार से पूर्व पड़नेवाले इस शुक्रवार को हम माता मरियम के दुखों की याद करें तथा उनके प्रति धन्यवाद ज्ञापित करें क्योंकि उन्होंने हमारी माता बनना स्वीकार किया।"

मरियम के सात दुख

मरियम के दुखों पर चिन्तन करते हुए सन्त पापा ने कहा कि कलीसिया मरियम के “सात दुखों” पर मनन करती है, सर्वप्रथम, येसु के जन्म से चालीस दिन बाद ही सिमियोन की भविष्यवाणी उस तलवार की बात करती है जो हृदय को बेधेगी, दूसरा दुख बालक येसु को बचाने के लिये मिस्र में भागना, तीसरा दुख जब मरियम और योसफ तीन दिन तक अपने 12 वर्षीय पुत्र की खोज में भटकते रहे थे। चौथा दुख कलवारी के रास्ते में येसु से मुलाकात, पाँचवा दुख येसु को क्रूस पर मरते देखना, छठवाँ दुख येसु का क्रूस पर से उतारा जाना तथा मरियम की गोद में रखा जाना तथा सातवाँ दुख येसु का कब्र में दफ़नाया जाना। सन्त पापा ने कहा कि कलीसिया की माता के इन दुखों की याद करना हम सबके लिये हितकर है क्योंकि इससे हमें अपने दुख सहने का सम्बल प्राप्त होता है। सन्त पापा ने कहा कि क्रूस पर टंगे येसु ने हमसे कहा था कि मरियम ही हमारी माता हैं, इस दुखद घड़ी में इसीलिये हम सब मिलकर येसु की माता, हम सबकी माता, कलीसिया की माता मरियम से प्रार्थना करें।  

03 April 2020, 10:36