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संत पापा फ्राँसिस वाटिकन के प्रेरितिक पुस्तकालय में संत पापा फ्राँसिस वाटिकन के प्रेरितिक पुस्तकालय में  

दुःख के क्षण सवालों के सैलाब लातेः संत पापा

संत पापा ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह में पवित्र सप्ताह के दौरान येसु के क्रूस और पवित्र बाईबल पढ़ने का आह्वान किया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, गुरूवार, 08 अप्रैल 2020 (रेई) संत पापा फ्रांसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर वाटिकन प्रेरितिक निवास के पुस्तकालय से सभों का अभिवादन करते हुए कहा, प्रिय भाइयो एव बहनों सुप्रभात।

पूरे विश्व में कोरोना वायरस की महामारी से उत्पन्न हुई त्रासदी हमारे जेहन में बहुत सारे सावल उत्पन्न करते हैं, उन सवालों में एक यह भी हो सकता है ईश्वर हमारे दुःख की इस परिस्थिति में क्या कर रहें हैंॽ सारी चीजें हमारे विपरीत जाती दिखाई देती हैं तो वे कहाँ हैंॽ वे हमारी समस्याओं का समाधान तुरंत क्यों नहीं करते हैंॽ

ईश्वर के प्रति हमारे मनोभाव

येसु के दुःखभोग का वृतांत हमारी सहायता करे जिसे हम पवित्र सप्ताह के इन दिनों में सुन रहे हैं। येसु के घोर दुःख में हम भी बहुत सारे सवालों को देखते हैं। जनता जिन्होंने येरुसलेम में विजयपूर्ण तरीके से स्वागत किया था अपने में यह सवाल कर रहे थे कि वे उन्हें अब उनके शत्रुओं से मुक्ति दिलायेंगे। (लूका. 24.21) वे इसी आस में थे कि उनके मुक्तिदाता तलवार के द्वारा अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते हुए विजयी होगें। लेकिन वे एक नम्र और दीन-हीन मुक्तिदाता को पाते जो मनपरिवर्तन और करूणा हेतु आह्वान करते हैं। और इस तरह हम भीड़ को देखते हैं जिन्होंने उनकी महिमा की थी, वे अब उनके विरूद्ध ही चिल्लाते हैं, “उन्हें क्रूस दिया जाये”(मती.27.23)। उनके अनुयायी अपने में भ्रमित हो जाते और भय के कारण उन्हें छोड़कर भाग जाते हैं। वे अपने में सोचते हैं कि यदि येसु की यह दुर्गति है तो वे मसीह नहीं हो सकते क्योंकि ईश्वर अपने में शक्तिशाली और ईश्वर अपने में अपराजेय हैं।

आश्चर्यजनक तथ्य

संत पापा ने कहा कि लेकिन यदि हम दुःखभोग की कथा का अध्ययन करें तो हम एक आश्चर्यजनक तथ्य को पाते हैं। जब येसु मर जाते तो रोमी शतपति, जो अपने में विश्वासी नहीं था, वह यहूदी नहीं वरन एक गैर-यहूदी था, उसने येसु को क्रूस पर घोर दुःख सहते हुए देखता था, उन्हें सभों को क्षमा करते सुना, उसने उनके शर्तहीन प्रेम का अनुभव किया, वह कहता है, “सचमुच यह व्यक्ति ईश्वर का पुत्र था” (मार.15,39)। वह दूसरो से अलग इस बात की घोषणा करता है कि वहाँ ईश्वर हैं, वे सचमुच में ईश्वर हैं।

ईश्वर का स्वरुप 

आज हम अपने में यह पूछ सकते हैं, ईश्वर का असल रुप क्या हैॽ साधारणतः हम अपने शक्तिशाली  सामर्थ्य को ईश्वर में अभिव्यक्त करते हैं- हमारी सफलताएं, न्याय के तरीके और यहाँ तक की हमारे प्रतिशोध की भावना भी। लेकिन सुसमाचार हमें बतलाता है कि ईश्वर वैसे नहीं हैं। वे हमारी सोच से अलग हैं जिन्हें हम अपनी शक्ति से नहीं जान सकते हैं। यही कारण है कि वे हमारे निकट आते हैं, वे हमसे मिलने आते और अपने पास्का के रहस्य में हमारे लिए अपने को पूरी तरह प्रकट करते हैं। वे किस रुप में अपने को हमारे लिए पूरी तरह व्यक्त करते हैंॽ संत पापा ने कहा कि सूली में। वहाँ हम ईश्वर के चेहरे को देखते और जानते हैं। भाइयो एवं बहनों, हम यह न भूलें कि क्रूस ईश्वर की कुर्सी है। हमारे लिए यह अच्छा होगा कि हम एक क्षण मौन होकर क्रूस की ओर अपनी निगाहें फेरें और ईश्वर को देखें कि हमारे लिए वे कौन हैं। वे किसी के विरूद्ध अपनी उगूंली नहीं उठाते हैं यहाँ तक की उनके विरूद्ध भी नहीं जिन्होंने उन्हें सूली पर चढ़ा दिया, बल्कि वे अपनी बाहों को सभों के लिए फैलाते हैं। वे अपनी महिमा हेतु किसी को नहीं कुचलते वरन वे हमें अपने को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। वे हमें अपने शब्दों से प्रेम नहीं करते बल्कि वे शांतिमय तरीक से अपना जीवन हमारे लिए अर्पित करते हैं जो हम पर दबाव नहीं डालता लेकिन हमें स्वतंत्र करता है। वे हमारे साथ अजनबी जैसा पेश नहीं आते वरन हमारी बुराइयों, पापों को अपने ऊपर ले लेते हैं। इस भांति, वे ईश्वर के प्रति हमारे पूर्वाग्रह से हमें मुक्त करते हैं। हम क्रूस की ओर निगाहें फेरें और इसे सुसमाचार में देखें। इस दिनों जब हम सभी अपने घरों में कैद होने को विवश हैं, हम दो चीजों को अपनी हाथों में लें। संत पापा ने कहा कि हम क्रूस की ओर देखें और सुसमाचार को खोलें। यह हमारे लिए घरेलू वृहृद धर्मविधि के समान होगी क्योंकि हम इन दिनों गिरजाघर नहीं जा सकते हैं।

मानव पुत्र में आडम्बर नहीं

सुसमाचार में हम पढ़ते हैं कि रोटियों के चमत्कार के बाद जनता उन्हें राजा बनाना चाहती है लेकिन वे वहाँ से निकल जाते हैं।(यो.6.15) जब शैतान उनकी दिव्यता को घोषित करना चाहता तो वे उसे चुप करते हैं मार.1.24-25)। क्योंॽ क्योंकि येसु नहीं चाहते हैं कि वे अपने बारे लोगों में गलतफहमी उत्पन्न करें। वे नहीं चाहते कि वे लोगों के मध्य ईश्वर के नकली रुप, दुनियावी ईश्वर जो अपनी नुमाईश करता हो और लोगों में अपने को थोपता हो प्रकट करें, वे ईश्वर के असल रुप को लेकर जनता में भ्रम पैदा नहीं करना चाहते थे, जो कि प्रेम में नम्र हैं। ईश्वर अपने में मूर्तिपूजा नहीं हैं। ईश्वर हमारी तरह मानव बनें और एक साधारण व्यक्ति की तरह जीवन व्यतीत किया न कि उन्होंने अपनी दिव्य शक्ति का प्रदर्शन किया। वास्तव में, हम येसु की पहचान को कब सुसमाचार में घोषित होता पाते हैंॽ जब शतपति ने कहा, “वह सचमुच ईश्वर का पुत्र था”। यहाँ हम देखते हैं कि जैसे ही ईश पुत्र ने क्रूस पर प्राण निछावर किये यह घोषित किया गया, जिससे हम उन्हें समझने में गलती न करें। हम ईश्वर को किसी दूसरे रुप में नहीं वरन उनके अनंत प्रेम में देखते हैं, क्योंकि उनका स्वरुप यही है। वे प्रेम हैं।

आप डरें नहीं

संत पापा ने कहा कि आप इसका विरोध कर सकते हैं, “ऐसे कमजोर ईश्वर से क्या होने काॽ वे मरते हैंॽ मुझे एक शक्तिशाली, ताकतवर ईश्वर की जरुरत है।” उन्होंने कहा कि लेकिन हम जानते हैं, इस दुनिया की शक्तियाँ खत्म हो जाती हैं, केवल प्रेम ही रह जाता है। केवल प्रेम हमारे जीवन को सुरक्षित रखता है क्योंकि यह हमारी कमजोरियों को आलिंगन कर उन्हें परिवर्तित करता है। यह ईश्वर का प्रेम है जिन्होंने पास्का में क्षमा द्वारा हमें पापों से चंगाई दिलाई जिसके फलस्वरुप हमें मृत्यु से जीवन मिला, भय से भरोसा और दुःखों से आशा में बने रहने की कृपा। पास्का हमें कहता है कि ईश्वर सारी चीजों को अच्छाई में बदल देते हैं। हम उनमें यह सच्चा विश्वास कर सकते हैं कि सभी चीजें ठीक हो जायेंगी। संत पापा ने कहा कि यह हमारे लिए ख्वाब के समान नहीं है क्योंकि येसु का मरण औऱ पुनरुत्थान अपने में ख्वाब नहीं है। यह एक सच्चाई है। यही कारण है कि हमें पास्का की सुबह कहा जाता है, “आप भयभीत न हों” (मत्ती.28.5)। हमारे जीवन में हताश करने वाली बुराइयाँ अचानक खत्म नहीं होतीं वरन येसु के पुनरुत्थान में हमें एक मजबूत आधार मिलता है जो हमें डूबने नहीं देती है।

बेधित हृदय प्रेम का स्रोत

प्रिय भाइयो एवं बहनों, येसु ने अपने को हमारे निकट लाते हुए इतिहास को बदल दिया है। मानव के पाप को उन्होंने मुक्ति के इतिहास में परिणत कर दिया है। अपने को क्रूस पर अर्पित करते हुए उन्होंने मृत्यु पर विजयी पाई है। क्रूस में उनके बेधित हृदय द्वारा ईश्वर का प्रेम हम सबों के पास पहुँचता है। हम उनकी ओर आते हुए अपने इतिहास को बदल सकते हैं, जब हम उनसे मिलने वाली मुक्ति को स्वीकारते हैं। प्रिय भाइयो एवं बहनों, पवित्र सप्ताह में इन दिनों, पूरे हृदय से प्रार्थना करते हुए हम अपने को खोलें। हम क्रूस और बाईबल को न भूलें। ये हमारे लिए घरेलू धर्मविधि होंगी। हम अपना सम्पर्ण हृदय खोलें और उन्हें अपनी ओर निहारने दें। इस भांति हम यह समझ पायेंगे कि हम अकेले नहीं हैं लेकिन ईश्वर हमें प्रेम करते और हमारा परित्याग कभी नहीं करते हैं, वे हमें कभी नहीं भूलते हैं। अपने इस विचारों से साथ सबों को पुण्य सप्ताह और पवित्र पास्का की शुभकामनाएं देते हुए सभों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।

08 April 2020, 13:50