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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

देवदूत प्रार्थना ˸ संजीवन जल के स्रोत ख्रीस्त

संत पापा फ्राँसिस ने चालीसा काल के तीसरे रविवार 15 मार्च को, वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास के लाईब्रेरी से लाईव प्रसारण के माध्यम से देवदूत प्रार्थना का पाठ किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सटी, सोमवार, 16 मार्च 2020 (रेई)˸ चालीसा काल के इस तीसरे रविवार का सुसमाचार पाठ (यो. 4,5-42) येसु का एक समारी स्त्री से मुलाकात को प्रस्तुत करता है। वे अपने चेलों के साथ यात्रा कर रहे थे और समारिया के एक कुएँ के पास रूके। समारी लोग यहूदियों के द्वारा विधर्मी समझे जाते थे और द्वितीय श्रेणी के नागरिकों के रूप में नफरत की नजर से देखे जाते थे। येसु थक चुके थे एवं उन्हें प्यास लगी थी। तभी एक महिला पानी भरने आयी और येसु ने उनसे पानी मांगा, "मुझे पानी पिला दो।" (पद.7) इस तरह, हर प्रकार के घेरे को तोड़ते हुए वार्तालाप की शुरूआत हुई, जिसमें उन्होंने महिला को संजीवन जल का रहस्य प्रकट किया, जो ईश्वर का वरदान, पवित्र आत्मा है। "महिला की विस्मयकारी प्रतिक्रिया पर येसु जवाब देते हैं, "यदि तुम ईश्वर का वरदान पहचानती और यह जानती कि वह कौन है जो कहता है मुझे पानी पिला दो तो तुम उससे मांगती और वह तुम्हें संजीवन जल देता।"(पद. 10)

संत पापा ने कहा कि इस वार्ता के केंद्र में जल है। एक ओर, जल जीवन के लिए एक आवश्यक तत्व है, जो शरीर की प्यास बुझाता एवं जीने के लिए सहायता देता है। दूसरी ओर, जल दिव्य वरदान का प्रतीक है जो अनन्त जीवन प्रदान करता है। बाईबिल की परम्परा में ईश्वर संजीवन जल के स्रोत हैं। जैसा कि स्तोत्र ग्रंथ और नबियों की भविष्यवाणी में कहा गया है ˸ ईश्वर एवं उनके नियम, जो संजीवन जल के स्रोत हैं उनसे दूर चले जाना, सूखी भूमि के समान है। यही अनुभव इस्राएलियों ने मरूभूमि में किया। आजादी के लम्बे रास्ते पर प्यास से लड़पते हुए उन्होंने मूसा और ईश्वर के विरूद्ध प्रदर्शन किया क्योंकि वहाँ पानी नहीं था। तब ईश्वर की आज्ञा से, मूसा ने चट्टान से पानी निकाला जो ईश्वर की कृपा का चिन्ह था जो ईश्वर की प्रजा को साथ और जीवन प्रदान किया। (निर्गमन 17: 17-7)

प्रेरित संत पौलुस चट्टान की तुलना ख्रीस्त से करते हैं, "और वह चट्टान हैं मसीह।"  (1कुरि. 10: 4) संत पापा ने कहा कि यह ईश प्रजा के बीच उनकी उपस्थिति की रहस्यात्मक आकृति है जो यात्रा कर रही है। ख्रीस्त वास्तव में मंदिर हैं और नबियों के दिव्यदर्शन के अनुसार वहाँ से पवित्र आत्मा प्रवाहित होता है। यही संजीवन जल है जो शुद्ध करता एवं जीवन प्रदान करता है। जितने लोग मुक्ति के प्यासे हैं वे येसु से मुफ्त में संजीवन जल पा सकते हैं तथा पवित्र आत्मा उनके लिए पूर्ण और अनन्त जीवन के स्रोत बन जायेगा। संजीवन जल जिसकी प्रतिज्ञा येसु ने समारी स्त्री से की वह उनके पास्का के दिन पूरी हो गयी। उनकी बगल से रक्त और जल बह निकला। (यो.19˸34) प्राँण की आहुति देनेवाले एवं पुनर्जीवित ख्रीस्त ही स्रोत हैं जिनसे पवित्र आत्मा बह निकला जो पापों को क्षमा करते एवं नया जीवन प्रदान करते हैं।  

यह वरदान साक्ष्य का स्रोत है। समारितानी स्त्री की तरह पुनर्जीवित येसु से मुलाकात करनेवाला हरेक व्यक्ति दूसरों को, उनका साक्ष्य देने की आवश्यकता महसूस करे ताकि हरेक व्यक्ति यह स्वीकार करे कि "येसु ही दुनिया के सच्चे मुक्तिदाता है।" (यो. 4:42) बपतिस्मा के द्वारा हम भी अपने अंदर के नये जीवन एवं आशा का साक्ष्य देने के लिए बुलाये गये हैं। यदि हमारी खोज एवं हमारी प्यास ख्रीस्त में परिपूर्णता प्राप्त करती है तब हम साक्ष्य दे पायेंगे कि मुक्ति इस दुनिया की चीज वस्तुओं में नहीं है जिनसे सूखापन आ जाता है। येसु हमारे मुक्तिदाता जो हमें सदा प्यार करते हैं, हमें संजीवन जल प्रदान करते हैं।  

संत पापा ने माता मरियम से प्रार्थना की कि पवित्र कुँवारी मरियम हमें मदद दे कि हम संजीवन जल के स्रोत ख्रीस्त की अभिलाषा करें, क्योंकि एकमात्र वही हैं जो हमारे जीवन एवं प्रेम की प्यास बुझा सकते हैं जो हमारे हृदय में है।

इतना कहने के बाद संत पापा ने देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा विश्वासियों का अभिवादन किया।

देवदूत प्रार्थना के उपरांत उन्होंने कहा, "इन दिनों संत पेत्रुस महागिरजाघर का प्राँगण बंद है अतः मेरा अभिवादन आप सभी जो सीधे जाता है जो संचार माध्यमों द्वारा सीधे जुड़े हैं।"  

इस महामारी की स्थिति जिसमें हम अपने आपको अलह–थलग पाते हैं, हम सम्पर्क करने के मह्त्व को गहरा करने के लिए बुलाये जाते हैं ताकि कलीसिया के सभी सदस्य एक हो सकें। ख्रीस्त से संयुक्त होकर हम कभी अलग नहीं हो सकते किन्तु हम एक शरीर हैं जिनके वे शीर्ष हैं। यह एकता प्रार्थना एवं आध्यात्मिक यूखरिस्त के द्वारा ही पोषित हो सकती है। संत पापा ने आध्यात्मिक रूप से यूखरिस्त में भाग लेने एवं जब कभी संभव हो संस्कार ग्रहण करने का प्रोत्साहन दिया। उन्होंने कहा, "मैं यह सलाह सभी लोगों को देता हूँ विशेषकर उन लोगों को जो अकेले रह रहे हैं।" मैं सभी बीमार लोगों एवं उनकी देखभाल करने वाले लोगों को अपना आध्यात्मिक सामीप्य प्रदान करता हूँ। उन्होंने उन सभी लोगों की भी याद की जो गरीबों एवं बेघर लोगों की मदद कर रहे हैं। उन्होंने उनके हर प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया तथा उनपर ईश्वर की आशीष एवं माता मरियम की सुरक्षा की कामना की। अंत में प्रार्थना का आग्रह करते हुए सभी को शुभ रविवार की मंगलकामना आर्पित की।      

16 March 2020, 17:01