खोज

Vatican News
प्रेरितिक निवास के पुस्तकालय में आमदर्शन समारोह के दौरान संत पापा प्रेरितिक निवास के पुस्तकालय में आमदर्शन समारोह के दौरान संत पापा   (ANSA)

मानव सम्पूर्ण जीवन हेतु बना हैः संत पापा

संत पापा फ्रांसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर प्रेरितिक प्रबोधन एभंजेलियुम भीत्ते की 25वीं सालगिराह पर प्रकाश डालते हुए मानवीय जीवन की परिपूर्णत का जिक्र किया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 25 मार्च 2020 (रेई) संत पापा फ्रांसिस ने वाटिकन प्रेरितिक पुस्तकालय से अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह को जारी रखते हुए सभों को संबोधित करते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों सुप्रभात।

आज से पचीस साल पहले, आज की ही तारीख 25 मार्च को जब कलीसिया येसु के देहधारण संदेश का महोत्सव मनाती है, संत पापा जोन पौल द्वितीय ने वैश्विक कलीसिया हेतु प्रेरितिक प्रबोधन एभंजेलियुम भीत्ते अर्थात मानवीय जीनव का मूल्य और उसकी अखंण्डता प्रकाशित की थी।

संत पापा ने कहा कि ख्रीस्त के गर्भाधारण का संदेश औऱ “जीवन का सुसमाचार” गहन रुप में एक दूसरे के निकट हैं जैसे कि संत पापा जोन पौल द्वितीय ने अपने प्रेरितिक प्रबोधन में जोर देते हुए कहा है। आज, महामारी की परिस्थिति में जहाँ हम मानव जीवन और वैश्विक अर्थव्यवस्था को खतरे की स्थिति में पाते यह हमारे लिए पुनः उभर कर आती है। इस परिस्थिति में प्रेरितिक प्रबोधन के शब्द जिसके द्वारा इसकी शुरूआत होती है हमारे लिए और भी खरा उतरता है, “जीवन का सुसमाचार येसु के संदेश के क्रेन्द-विन्दु में है। कलीसिया इसे रोज दिन प्रेम से ग्रहण करती है, हमें इसे साहसपूर्ण निष्ठा में विश्व के सभी लोगों औऱ संस्कृतियों हेतु घोषित करने की जरूरत है”। (न.1)

संत पापा द्वारा कृतज्ञता के भाव

अन्य सुसमाचार की घोषणा के अनुरुप, इसे भी हमें सबसे पहले साक्ष्य के रुप में प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। और मैं कृतज्ञतापूर्ण हृदय से उनके बारे में सोचता हूँ, संत पापा ने कहा कि जो इस शांतिमय साक्ष्य को विभिन्नों रूपों में बीमारों, बुजूर्गों की सेवा, अकेलेपन और अति विकट परिस्थिति में जीवनयापन कर रहे लोगों के साथ अपने जीवन को साझा करते हुए साक्ष्य दे रहे हैं। वे जीवन के सुसमाचार को अपने में जी रहे हैं जिस तरह माता मारिया ने स्वर्गदूत के संदेश को अपने में स्वीकार किया औऱ अपनी कुटुबिनी ऐलिजबेद की सेवा हेतु निकल पड़ी, जिसे उनकी सेवा की जरुरत थी।

वास्तव में, जीवन जिसे प्रसारित करने और सुरक्षित रखने हेतु हमें निमंत्रण मिला है अपने में एक अमूर्त विषयवस्तु नहीं है वरन यह सदैव अपने को व्यक्ति के हांड़-मांस में अभिव्यक्त करता है। संत पापा ने कहा कि गर्भ में आया एक नया शिशु, एक दीन-दुःखी गरीब व्यक्ति,एक अकेला औऱ हताश रोगी या मरण संकट में पड़ा व्यक्ति, एक व्यक्ति जिसने अपनी नौकरी खो दी है या उसे और कोई दूसरा कार्य नहीं मिल सकता, एक परित्याक्त प्रवासी व्यक्ति... जीवन अपने को ठोस रुप में व्यक्ति में प्रकट करता है।

कलीसिया का उत्तरदायित्व

संत पापा ने कहा कि हर मानव ईश्वर के द्वारा अपने जीवन की पूर्णतः को प्राप्त करने हेतु बुलाया गया है और यह कार्यभार माता कलीसिया को सौंपी गई है जिससे वह अपने मातृत्व में हर मावन जीवन और मानवीय सम्मान की रक्षा करे। जीवन की रक्षा कलीसिया के लिए कोई आदर्श नहीं वरन यह एक सच्चाई है, एक मानवीय सच्चाई जिसमें हर ख्रीस्तीय सहभागी होता है क्योंकि हम ख्रीस्त के अनुयायी हैं और उसके साथ ही हम सभी मानव हैं।

मानव जीवन और मानव सम्मान पर आक्रमण दुर्भाग्यवश वर्तमान परिस्थिति में भी जारी है जिसे हम वैश्विक मानव अधिकार का काल कहते हैं। ठीक इसके विपरीत हम अपने में आज नये मुसीबतों और नये तरह की गुलामी को पाते हैं जहाँ नियमावली सदैव सबसे कमजोरों और अति संवेदनशील लोगों की सुरक्षा हेतु नहीं होती है।

प्रेरितिक प्रबोधन का सार

संत पापा ने कहा कि इस संदर्भ में प्रेरितिक प्रबोधन एभंजेलियुम भीत्ते हमारे लिए पहले से और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। आपातकालीन स्थिति से परे, जिसका अनुभव अभी हम सभी कर रहे हैं, हमारे लिए यह सवाल उत्पन्न करता है कि हम सांस्कृतिक औऱ शैक्षिणक स्तर पर भावी पीढ़ियों में- एकात्मकता, सेवा, सत्कार, जीवन की संस्कृति जो केवल ख्रीस्तीय हेतु एक विशेष विरासत नहीं वरन सभों के लिए है जो आपस में भातृत्वमय संबंध स्थापित करने की चाह रखते और हर व्यक्ति के जीवन मूल्य को समझते हों यहाँ तक की उन्हें भी जो दुःख और टूटे परिस्थिति में हैं, इन मनोभावओं को कैसे प्रसारित कर सकते हैं।

मानव जीवन का मूल्य

प्रिय भाइयो एवं बहनों हर मानव जीनव अपने में अद्वितीय और अतुल्य है यह अपने में मूल्यवान है जिसका हम हिसाब नहीं कर सकते हैं। हमें साहस में इसे अपने जीवन के कार्यों और शब्दों द्वारा पुनः घोषित करने की आवश्यकता है। यह हमें मानवता रुपी बृहृद परिवार में एक-दूसरे के संग एकता और भातृत्वमय प्रेम में जुड़े रहने हेतु आह्वान करता है।

संत पापा ने कहा, “अतः संत पापा जोन पौल द्वितीय के संग जिन्होंने इस प्रेरितिक प्रबोधन की घोषणा की, मैं विश्वास में पचीस साल पहले किये गये अलीप को पुनः सुदृढ़ करते हुए नवीकृत करता हूँ। हम हर मानव जीवन, मानव का सम्मान करते हुए उसकी रक्षा करें, उसे प्रेम करते हुए उसकी सेवा करें। केवल इस मार्ग पर चलते हुए हम न्याय, विकास, स्वतंत्रता, शांति और खुशी को प्राप्त कर सकते हैं”।

इतना कहने के बाद संत पापा फ्रांसिस ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की और सभों के संग हे पिता हमारे प्रार्थना का पाठ करते हुए सभों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।

25 March 2020, 15:22