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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस 

कलीसिया में नियम के सच्चे अर्थ को पुनः प्राप्त करें, संत पापा

संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार 21 फरवरी को वाटिकन में, विधि-निर्माण की परमधर्मपीठीय समिति के सदस्यों से मुलाकात की और कलीसियाई कानून के प्रेरितिक स्वभाव पर जोर दिया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 22 फरवरी 2020 (रेई)˸ संत पापा ने विधि-निर्माण की परमधर्मपीठीय समिति के उन सदस्यों से मुलाकात की जो अपनी आमसभा में भाग ले रहे हैं। 

अपने सम्बोधन में संत पापा ने गौर किया कि समिति उन्हें कानून संबंधी कार्यों में मदद करती है। वह उनके लिए कानून की व्याख्या करने में सहायता देती, वाटिकन के दूसरे विभागों में कानून संबंधी बातों में मदद करती और कलीसिया के लिए विधायकों द्वारा अधिनियमित मानदंडों के लेखों की वैधता की निगरानी करती है।  

कलीसिया में कानून का सही अर्थ

संत पापा ने कहा कि समिति, धर्माध्यक्षों एवं धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों को "नियमों की सही व्याख्या एवं लागू किये जाने में मदद देती है और सामान्य रूप से नियम के ज्ञान एवं उसपर ध्यान देने में मदद करती है। संत पापा ने कहा कि यह आवश्यक है कि कलीसिया के नियमों के सच्चे अर्थ को गहरा किया जाए एवं उसे पुनः प्राप्त किया जाए, जो ख्रीस्त का रहस्यात्मक शरीर है। उन्होंने विश्वासियों को कलीसिया के कानून के प्रेरितिक स्वभाव को समझने में मदद करने पर जोर दिया, ताकि आत्माओं की मुक्ति एवं न्याय के सदगुण के पालन की आवश्यकता पर ध्यान दिया जा सके।  

कानून के प्रेरितिक स्वभाव

संत पापा ने कलीसियाई कानून के प्रेरितिक स्वभाव पर भी प्रकाश डाला जो प्रेरितिक प्रभावशीलता के लिए बाधक नहीं है बल्कि समाधान की खोज की गरांटी है जो मनमाना नहीं किन्तु सच्चा न्याय है अतः सच्ची प्रेरिताई है। संत पापा बेनेडिक्ट 16वें का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, "बिना कानून वाला समाज अधिकारों से वंचित समाज होगा" जहाँ विश्व युद्ध आज छोटे-छोटे रूपों में लड़ा जा रहा है, वहाँ हम हमेशा देखते हैं कि कानून का अभाव है। कानून के अभाव में तानाशाही शासन का जन्म और विकास होता है। कलीसिया में ऐसा नहीं होना चाहिए।"  

ईश प्रजा के बीच एकता

कलीसिया के कानून के संबंध में, जिसपर समिति आमसभा में अध्ययन कर रही है, संत पापा ने कहा कि धर्माध्यक्षों को अपने क्षेत्र में सजग होना चाहिए। उन्हें विश्वासियों के बीच न्यायधीश की भूमिका अदा करनी है। धर्माध्यक्षों का कार्य ईश्वर की प्रजा के बीच एकता लाने से प्रेरित होना चाहिए, अतः दण्ड दिया जाना सबसे अंतिम सहारा होना चाहिए, जब उपयोग किए जानेवाले चरम उपाय, अनुपालन के अन्य सभी साधन अप्रभावी साबित हों।  

कानूनी दंड हमेशा औषधीय हो

संत पापा ने कहा कि कलीसियाई कानून का महत्व, किसी राज्य के कानून के समान नहीं बल्कि प्रेरितिक होना चाहिए। यह न केवल कलीसियाई समुदाय के लिए बल्कि दोषी व्यक्ति के लिए भी हितकर हो। उन्होंने कहा कि कानूनी सजा प्रतिरोधी साधन मात्र न हो बल्कि औषधि के रूप में हो, जो राज्य के विस्तार एवं विश्वासी समुदाय में न्याय के निर्माण के लिए एक साकारात्मक साधन हो जो व्यक्तिगत एवं सामुदायिक पवित्रता के लिए बुलायी गयी है।     

संत पापा ने अपने सम्बोधन के अंत में विधि-निर्माण संबंधी परमधर्मपीठीय समिति के सदस्यों को प्रोत्साहन दिया कि वे अपने कार्य में सही दिशा में त्याग के साथ आगे बढ़ें और अंत में उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

22 February 2020, 16:46