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आमदर्शन समारोह के दौरान संत पापा आमदर्शन समारोह के दौरान संत पापा   (Vatican Media)

चालीसाः येसु संग वक्त व्यतीत करने का समय, संत पापा

संत पापा फ्रांसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह में राखबुध पर धर्मशिक्षा देते हुए चालीसा काल को येसु ख्रीस्त हेतु समय देने का वक्त बतलाया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 26 फरवरी 2020 (रेई) संत पापा फ्रांसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में विश्व के विभिन्न देशों से आये हुए विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को पवित्र राखबुध पर अपनी धर्मशिक्षा माला देने के पूर्व संबोधित करते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों, सुप्रभात।

आज राखबुध के दिन, हम चालीसा काल की शुरूआत करते हुए, विश्वास में चालीस दिन की यात्रा करते और प्रभु के पास्का की ओर बढ़ते हैं जो ख्रीस्तीय पूजन विधि वार्षिक काल चक्र का केन्द्र विन्दु है। यह वह राह है जहाँ हम येसु का अनुसरण करते हैं जो अपने प्रेरितिक कार्य शुरू करने के पूर्व चालीस दिनों तक मरूभूमि में प्रार्थना और उपवास में व्यतीत करते और शैतान उनकी परीक्षा लेता है। यद्यपि हम सभी शहरों में रहते हैं, आज मैं मरूभूमि के आध्यात्मिक अर्थ के बारे में आप सभों से जिक्र करना चाहूँगा। संत पापा ने कहा कि मरूभूमि का अर्थ हमारे लिए क्या है।

मरूभूमि की अनुभूति

उन्होंने कहा कि कल्पना करें कि हम मरूभूमि में हैं। यहाँ हमारी पहली अनुभूति एक वृहृद शांति होती है-वायु और अपनी सांसों के अलावे हम वहाँ शोरगुल की कमी का एहसास करते हैं। मरूभूमि वह स्थल है जहाँ हम अपने को हल्ला-गुल्ला से अलग पाते हैं। यहाँ शब्दों की अनुपस्थिति है जो ईश्वर के शब्दों को सुनने हेतु हममें एक जगह तैयार करता है, मानो हवा की मंद-मंद प्रवाह हमारे हृदयों का स्पर्श कर रही हो।(1 राजा 19.12) वास्तव में, धर्मग्रंथ बाईबल में हम पाते हैं कि ईश्वर मरूभूमि में हम से बातें करना पसंद करते हैं। उन्होंने मरूभूमि में मूसा को “दस आज्ञाओं” की पट्टी प्रदान की। और जब चुनी हुई प्रजा उनसे दूर चली गई जैसे एक अविश्वासिनी वधू व्यवहार करती है, ईश्वर कहते हैं, “देखों मैं उसे मरूभूमि ले आऊंगा औऱ हृदय से बातें करूंगा वहाँ वह मुझे अपने जवानी के दिनों की तरह उत्तर देगी।(होश 2.16-17) मरूभूमि में हम ईश्वर की आवाज को सुनते हैं जो हमारे लिए धीमी-धीमी आती है। राजाओं का ग्रंथ हमें ईश्वर के वचनों को शांति के मधुर धागे स्वरुप निरूपित करता है। मरूभूमि में हम ईश्वर के साथ अपनी निकटता का एहसास करते हैं जो हमें प्रेम करते हैं। येसु प्रतिदिन अपने को एकांत में ले जाना पसंद करते जिससे वे प्रार्थना कर सकें।(लूका. 5.16) उन्होंने हमें इस बात की शिक्षा दी कि हम कैसे पिता से मिल सकते हैं जो शांतिमय परिवेश में हमसे बातें करते हैं। संत पापा ने कहा कि अपने हृदय में शांति का अनुभव करना हमारे लिए सहज नहीं है हम अपने रोज दिन के जीवन में शांति की अपेक्षा दूसरों के साथ रहना, मिलना-जुलाना और उनसे थोड़ा बातें करना पसंद करते हैं।

चालीसाः ईश्वर के लिए समय

चालीसा का समय हमारे लिए ईश्वर के वचनों हेतु एक उचित स्थान देने का समय है। यह हमारे लिए दूरदर्शन को बंद कर और बाईबल को खोलने का समय है। यह मोबाईल से अपने को दूर रखने औऱ सुसमाचार से अपने को सुंयक्त करने का समय है। चालीसा का समय त्याग करने का समय है। यह हमें अपने में उन चीजों का परित्याग करने का आहृवान करता है जो हमारे लिए व्यर्थ हैं, गपशप, शिकायतें, अफवाहें, जिससे हम अपने को ईश्वर को दे सकें। यह हमारे लिए ईश्वर से वार्ता करने का समय है, अपने को ईश्वर हेतु देने का समय है। यह हृदय के स्वास्थ्य हेतु अच्छा प्रर्यावरण तैयार करने का समय है, हृदय की सफाई का समय। हम उस वातावरण में रहते हैं जो अपने में शब्दिक हिंसा, आक्रमणकारी शब्दों से भरा है जिसे सूचना तंत्र और भी अधिक प्रसारित करता है। आज एक व्यक्ति अपने को उस तरह अपमानित करता है मानों यह “शुभ दिन” कहने की तरह हो। आज हम अपने में छिछले शब्दों, विज्ञापनों और चालबाजी संदेशों से भरा पाते हैं। हम दूसरों के बारे में सबकुछ सुनने के इतने आदी हो गये हैं कि हम दुनियादारी में फिसल कर गिर जाते जो हमारे हृदय में इतना घुल-मिल जाता कि हमारे पास इससे चंगाई प्राप्त करने का कोई विकल्प नहीं रह जाता है सिवाय शांति में बने रहने के। हम अपने अंतःकरण में ईश्वर की ओर से आने वाली अच्छी वाणी की परख करने में संघर्षरत रहते हैं। येसु हमें मरूभूमि की ओर आने का निमंत्रण देते हैं जिससे हम उनकी आवाज को सुन सकें, जो हमारे लिए जीवन का अर्थ रखता है, जो हमारे लिए महत्वपूर्ण, जरुरी है। शैतान जो येसु की परीक्षा लेता, वे उन्हें उत्तर देते हुए कहते हैं,“मनुष्य रोटी से ही नहीं जीता है बल्कि वह ईश्वर के मुख से निकलने वाले हर एक शब्द से जीता है।” (मत्ती. 4.4) रोटी की तरह, हमें ईश्वर के वचनों की जरुरत, रोटी से भी अधिक है, जिसके लिए हमें ईश्वर से बातें करने, प्रार्थना करने की आवश्यकता है। क्योंकि ईश्वर के सामने हमारे हृदय की असक्तियाँ और इसके दोहरेपन प्रकट होते हैं। संत पापा ने कहा कि यह मरूभूमि है जो हमारे लिए मृत्यु नहीं वरन जीवन का स्थल बनती है क्योंकि हम शांत वातावरण में ईश्वर से वार्ता करते जो हमें जीवन देते हैं।

मरूभूमि हमारे जरुरत का स्थल

उन्होंने कहा कि मरूभूमि हमारे लिए जरुरत का स्थल है। हम अपने जीवन पर विचार करें कितनी ही व्यर्थ की चीजें हैं जो हमारे जीवन में भरी हैं। हम हजारों चीजें के पीछे भागते हैं जो हमें जरुरत की चीजें लगतीं हैं परन्तु वे, वास्तव में, हमारे लिए जरूरी नहीं हैं। हमारे लिए कितना अच्छा होता यदि हम अपने को उन व्यर्थ की चीजों से मुक्त कर पाते, अपने लिए यह खोज पाते कि हमारे लिए क्या असल में जरुरी है, उन चेहरों को देख पाते जो हमारे लिए जरुरी हैं। अपने उपवास में येसु हमें इसका उदाहरण देते हैं। उपवास, व्यर्थ की चीजों का परित्याग हेतु एक ज्ञान है जहाँ हम जरुरत की चीजें को खोजते हैं। उपवास वजन कम करना नहीं वरन जरुरी चीजों की खोज करना है जो हमारे जीवन को सुन्दर और सरल बनाते हैं।

मरूभूमि एकांत का स्थल

संत पापा ने अंततः मरूभूमि को एकांत का स्थल कहा। उन्होंने कहा कि आज भी हमारे निकट, हमारे आस-पास बहुत से मरूभूमि, अकेलेपन में जीवन व्यतीत करने वाले हैं। वे छोड़ दिये गये हैं। कितने ही गरीब और बुजूर्ग हमारे बीच हैं जो चुपचाप जीवन व्यतीत करते हैं, कितने परित्यक्त और बेचारे लोग हैं जो बिना शोरगुल किये जीवनयापन करते हैं। उनसे बातें करना लोगों का ध्यान आकर्षित नहीं कराता है। लेकिन मरूभूमि हमें उनकी ओर खींच लाता है जो चुपचाप हमारी सहायता की मांग करते हैं। बहुत से शांतिमय निगाहें हैं जो हमारी सहायता की मांग करती हैं। चालीसा काल में मरूभूमि की राह चलना करूणा में कमजोरों की ओर चलना है। प्रार्थना, उपवास और करूणा के कार्य हमारे लिए चालीसा की राह हैं।

संत पापा ने कहा कि नबी इसायस की आवाज में ईश्वर हमसे प्रतिज्ञा करते हैं, “देखो, मैं एक नया कार्य करने जा रहा हूँ। मैं मरूभूमि में एक मार्ग बनाऊँगा”।(इसा.43.19) मृत्यु से जीवन की ओर ले जाने वाली राह हमारे लिए मरूभूमि में खुलती है। हम येसु के साथ मरूभूमि में प्रवेश करते हुए, ईश्वरीय प्रेम, पास्का में निकले, जो हमें नया जीवन प्रदान करता है। हम साहस के साथ चालीसा में प्रवेश करें और येसु के संग मरूभूमि में चलें जो हमारी मरूभूमि को हरियाली से भर देते हैं।

26 February 2020, 14:54