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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (Vatican Media)

अपने आपको गतिशील और विस्मित होने दें, संत पापा

संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 2 फरवरी को, मंदिर में प्रभु के समर्पण महापर्व एवं विश्व समर्पित जीवन दिवस के अवसर पर, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार, 3 फरवरी 20 (रेई) ˸ वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 2 फरवरी को, मंदिर में प्रभु के समर्पण महापर्व एवं विश्व समर्पित जीवन दिवस के अवसर पर, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया, देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

आज हम प्रभु के समर्पण का महापर्व मना रहे हैं, जब नवजात येसु को कुँवारी मरियम एवं संत जोसेफ ने मंदिर में समर्पित किया था। इसी दिन विश्व समर्पित जीवन दिवस भी मनाया जाता है जो कलीसिया के महान निधि, प्रभु का अनुसरण सुसमाचारी सलाहों द्वारा निकटता से करनेवालों की याद दिलाता है।

मरियम और जोसेफ, सिमेयोन और अन्ना

सुसमाचार पाठ (लूक. 2,22-40) बतलाता है कि येसु के जन्म के 40 दिनों बाद, उनके माता-पिता बालक को ईश्वर को समर्पित करने के लिए येरूसालेम ले गये, जैसा कि संहिता में लिखा था। परम्परागत रीति को पूरा करने का वर्णन करते हुए यह घटना हमारे लिए कुछ खास लोगों का उदाहरण प्रस्तुत करती है। उन्हें उन स्थानों पर पाया गया, जहाँ प्रभु ने अपने आपको प्रकट किया और लोगों के करीब लाया, वहीं उन्होंने प्रभु के साथ मुलाकात का अनुभव किया। वे लोग हैं, मरियम और जोसेफ, सिमेयोन और अन्ना जो स्वीकार करनेवालों एवं ईश्वर को अपना जीवन अर्पित करनेवालों के आदर्श हैं। ये चारों एक समान नहीं थे, वे सभी अलग-अलग थे किन्तु उन्होंने ईश्वर की खोज की और अपने आपको ईश्वर द्वारा संचालित होने दिया।

सुसमाचार लेखक संत लूकस उन चारों को दो मनोभावों में प्रस्तुत करता है; गतिशीलता का मनोभाव एवं विस्मित होने का मनोभाव।

गतिशीलता का मनोभाव

मरियम और जोसेफ येरूसालेम गये, उधर सिमेयोन भी पवित्र आत्मा से प्रेरित होकर मंदिर गया, जबकि अन्ना ने बिना रूके, रात और दिन ईश्वर की सेवा की। इस तरह सुसमाचार के ये चारों पात्र हमें दिखलाते हैं कि ख्रीस्तीय जीवन, गतिशीलता एवं चलने की तत्परता की मांग करता है। अचल होना ख्रीस्तीय साक्ष्य एवं कलीसिया के मिशन के अनुकूल नहीं है। विश्व को ऐसे ख्रीस्तियों की जरूरत है जो सक्रिय हैं जो जीवन की राह पर चलने एवं येसु के सांत्वनापूर्ण शब्दों को लाने से कभी नहीं थकते।

संत पापा ने विश्वासियों को याद दिलाते हुए कहा, "हर बपतिस्मा प्राप्त व्यक्ति ने सुसमाचार प्रचार करने की बुलाहट पायी है। येसु की घोषणा करने, सुसमाचार का प्रचार करने का मिशन प्राप्त किया है। पल्ली एवं विभिन्न कलीसियाई समुदाय, युवाओं, परिवारों एवं बुजूर्गों को समर्पित होने हेतु प्रोत्साहन देने के लिए बुलाये गये हैं ताकि हरेक व्यक्ति ख्रीस्तीय होने का अनुभव कर सके तथा कलीसिया के जीवन एवं मिशन को एक नायक के रूप में जी सके।"  

विस्मय का मनोभाव

दूसरा मनोभाव, जिसको संत लूकस कहानी के चार पात्रों द्वारा प्रस्तुत करते हैं वह है, विस्मय। मरियम और जोसेफ येसु के बारे में कही गयी बातों से विस्मित थे। विस्मय एक स्पष्ट प्रतिक्रिया है जिसको वयोवृद्ध सिमेयोन में भी देखा गया, जो बालक येसु में, अपनी ही आँखों से, ईश्वर द्वारा अपनी प्रजा के लिए प्रदान की गई मुक्ति को देखता है। उसी मुक्ति की प्रतीक्षा वह वर्षों से कर रहा था।

अन्ना के साथ भी ऐसा ही हुआ "वह उसी घड़ी आ कर प्रभु की स्तुति करने और जो लोग येरुसालेम की मुक्ति की प्रतीक्षा में थे, वह उन सबों को उस बालक के विषय में बताने लगी।" (पद. 38) संत पापा ने कहा कि वह एक बातूनी संत थी। खूब बात करती थी और बुरी चीजों के बारे नहीं बल्कि अच्छी चीजों के बारे बतलाती थी। वह एक ऐसी संत थी जो एक महिला से दूसरी महिला के पास जाकर, उन्हें येसु को दिखलाती थी। ऐसे व्यक्तित्व के लोग विस्मित होते हैं क्योंकि वे अपनी नजरों के सामने घटने वाली घटनाओं के लिए खुले होते हैं।

अपने आसपास की वस्तुओं से विस्मित होने के लिए धार्मिक अनुभव एवं प्रभु के साथ मुलाकात को फलप्रद बनाने की आवश्यकता है। इसके विपरीत, विस्मित नहीं होना, हमें उदासीन बनाता एवं विश्वास की यात्रा और दैनिक जीवन के बीच दूरियाँ बढ़ाता है। संत पापा ने सभी का आह्वान करते हुए कहा, "प्रिय भाइयो एवं बहनो, हम हमेशा बढ़ते रहें और विस्मय के लिए खुले रहें।"    

कुँवारी मरियम से प्रार्थना

उन्होंने प्रार्थना की कि कुँवारी मरियम हमें येसु जो हमारे लिए ईश्वर के दान हैं उनपर हरेक दिन चिंतन करने में मदद दे और अपने आपको उस दान से आनन्दमय विस्मय के साथ प्रेरित होने में सहायता दे, ताकि हमारा सम्पूर्ण जीवन, अपने भाई-बहनों की सेवा में, ईश्वर की स्तुति बन जाए।   

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को  अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

03 February 2020, 13:03