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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (AFP or licensors)

कलीसिया गरीब और बहिष्कृत लोगों की पुकार सुनती है, संत पापा

वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 9 फरवरी को, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया, देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार, 10 फरवरी 2020 (रेई)˸ आज के सुसमाचार पाठ में (मती. 5˸ 13-16) येसु अपने शिष्यों से कहते हैं "तुम पृथ्वी के नमक हो"..."तुम संसार की ज्योति हो।" (पद.13-14) वे उन लोगों को जो उनका अनुसरण करना चाहते हैं, दुनिया में उनकी उपस्थिति को जीने एवं साक्ष्य देने के मापदण्डों का पालन करने के बारे बतलाने के लिए प्रतीकात्मक भाषा का प्रयोग करते हैं।

पहला प्रतीक ˸ नमक

नमक एक ऐसी चीज है जो भोजन का स्वाद बढ़ाती, उसे संरक्षित रखती और नष्ट होने से बचाती है। उसी तरह शिष्य, लोगों के जीवन को विषाक्त करने वाले समाज के खतरे एवं संक्षारक रोगाणुओं से बचाने के लिए बुलाया जाता है। संत पापा ने कहा कि यह पाप और अनैतिकता से बचने तथा कैरियरवाद, सत्ता और  धन के सांसारिक मोह में पड़े बिना ईमानदारी एवं भाईचारा के मूल्यों का साक्ष्य देने का निमंत्रण है। उन्होंने कहा, "एक शिष्य नमक है जो दैनिक असफलताओं के बावजूद, चूँकि हम सभी में कमजोरियाँ हैं, अपनी गलतियों के धूल से ऊपर उठता तथा साहस एवं धीरज के साथ, हरेक दिन वार्ता एवं दूसरों के साथ मुलाकात की पुनः शुरूआत करता है। शिष्य नमक है जो आम सहमति एवं प्रशंसा की खोज किये बिना विनम्र एवं निर्माणात्मक उपस्थिति द्वारा येसु की शिक्षा के प्रति वफादार रहते हुए, उनका साक्ष्य देता है जो इस संसार में सेवा कराने नहीं बल्कि सेवा करने आये।" संत पापा ने कहा कि यह मनोभाव बहुत अधिक आवश्यक है।

दूसरा प्रतीक ˸ दीपक

येसु अपने शिष्यों से कहते हैं "तुम संस्कार की ज्योति हो।" दीपक अंधकार दूर करता और राह दिखाता है। येसु प्रकाश हैं जिन्होंने अंधकार दूर किया है किन्तु यह अंधकार अब भी संसार में और लोगों में मौजूद है। यह ख्रीस्तियों का कर्तव्य है कि वे ख्रीस्त की ज्योति फैलाने एवं सुसमाचार का प्रचार करने के द्वारा उस अंधकार को समाप्त करें। इस अंधकार को हम अपने सुवचनों से कम कर सकते हैं किन्तु सबसे बढ़कर हमारे भले कार्यों द्वारा दूर कर सकते हैं।

संत पापा ने कहा कि एक शिष्य और एक ख्रीस्तीय समुदाय संसार की ज्योति है यदि वह दूसरों को ख्रीस्त की ओर प्रेरित करता और उनकी अच्छाई एवं करुणा का अनुभव कराता है। येसु का शिष्य जो दीपक है वह अपने विश्वास को सीमिति क्षेत्र के बाहर जीना जानता है जब वह पूर्वाग्रह एवं झूठी निंदा को दूर करने में मदद देता है एवं झूठ तथा दिखावे द्वारा बिगड़े महौल में सच्चाई का प्रकाश लाता है। संत पापा ने ख्रीस्त को केंद्र में रखने की याद दिलाते हुए कहा, हमें प्रकाश लाना है किन्तु अपना नहीं, ख्रीस्त का। हम ख्रीस्त के प्रकाश को सभी लोगों तक पहुँचाने के माध्यम हैं।  

कलीसिया का कर्तव्य

येसु हमें निमंत्रण देते हैं कि हम संसार में जीने से न डरें, यद्यपि संघर्ष एवं पाप की स्थिति है। हिंसा, अन्याय और शोषण के सामने, कलीसिया एवं ख्रीस्तीय अपने आप में अथवा अपनी चारदीवारी के अंदर सुरक्षित बंद होकर नहीं रह सकते। अपने आप में बंद होकर कलीसिया सुसमाचार प्रचार एवं सेवा के मिशन को नहीं छोड़ सकती। अंतिम व्यारी में येसु ने पिता से प्रार्थना की कि वे उन्हें संसार से अलग न करें, उन्हें वहां रहने दें किन्तु सांसारिक मनोभाव से उन्हें बचायें।

संत पापा ने कहा कि कलीसिया निम्न और गरीब लोगों के लिए उदारता एवं कोमलता से अपने आपको समर्पित करती है। यह दुनियावी मनोभाव नहीं है बल्कि दीपक एवं प्रकाश का मनोभाव है। कलीसिया सबसे पिछड़े एवं बहिष्कृत लोगों की आवाज सुनती है क्योंकि वह यात्री कलीसिया होने तथा इतिहास में येसु ख्रीस्त की मुक्तिदायी उपस्थिति को आगे बढ़ाने हेतु बुलाये जाने के प्रति सचेत है।

संत पापा ने माता मरियम से प्रार्थना की कि धन्य कुँवारी मरियम हमें लोगों के बीच नमक एवं दीपक बनने में मदद दे ताकि हम अपने जीवन एवं वचन के माध्यम से ईश्वर के शुभ संदेश को सभी लोगों तक पहुँचा सकें।     

इतना कहने के बाद संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

 

10 February 2020, 14:23