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संत पापा फ्राँसिस का चालीसा संदेश 2020 संत पापा फ्राँसिस का चालीसा संदेश 2020 

चालीसा परिवर्तन का काल, संत पापा

“हम मसीह के नाम पर आप लोगों से यह विनती करते हैं कि आप लोग ईश्वर से मेलमिलाप कर लें।” (2 कुरि.5.20)

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार, 24 फरवरी 2020 (रेई) संत पापा फ्रांसिस ने चालीसा काल का काथलिक पत्र सन् 2020 जारी करते हुए ख्रीस्तीय समुदाय को मन-परिवर्तन करने के साथ-साथ, इस अवधि को ईश्वर से वार्ता का समय और अपनी समृद्धि को अपने में संकुचित रखने हेतु नहीं वरन दूसरों के संग साझा करने का आहृवान किया।

प्रिय भाइयो एवं बहनों ईश्वर हमें पुनः इस वर्ष तैयारी का अवसर प्रदान करते हैं जिससे हम येसु ख्रीस्त के महान रहस्य मृत्यु औऱ पुनरूत्थान में सहभागी हो सकें, जो हमारे व्यक्तिगत और ख्रीस्तीय सामुदायिक जीवन की आधारशिला है। हम अपने मन औऱ हृदय से येसु ख्रीस्त के उस रहस्य पर चिंतन करें क्योंकि हम जितना खुले रुप में इस पर विचार करते हैं यह उतना ही आध्यात्मिक शक्ति स्वरुप हममें विकसित होता और उदारता में हमें स्वतंत्रता प्रदान करता है।

पास्का रहस्य हमारे परिवर्तन का आधार

ख्रीस्तीय खुशी का प्रवाह, येसु ख्रीस्त की मृत्यु और पुनरुत्थान के सुसमाचार को सुनने औऱ उसे स्वीकार करने से होती है। इस सुसमाचार का संक्षेप वह रहस्यमयी प्रेम है, “जो अति सत्य, सच्चा, ठोस है जो हमारे खुलेपन में एक संबंध स्थापित करने औऱ वार्ता में फलहित होता है। (क्रीस्तुत भीभीत 117) जो कोई इस संदेश को स्वीकार करता वह अपने में उस असत्य का तिरस्कार करता है कि यह जीवन हमारा है और हम अपनी इच्छा के अनुरूप कुछ भी कर सकते हैं। बल्कि, हमारे जीवन की उत्पति ईश्वर का प्रेम है जो पिता की ओर से आता है, वे हमें अपनी इच्छा में सम्पूर्ण जीवन प्रदान करते हैं।(यो.10.10) इसके बदले यदि हम “झूठों के पिता”(यो.8.44) की फुसलाने वाली आवाज को सुनते तो हम अपने को व्यर्थता के गर्त में डुबोने की जोखिम में पड़ जाते हैं औऱ दुनिया में नरक का अनुभूति करते हैं।

सन् 2020 के चालीसा प्रेरितिक पत्र में ख्रीस्तियों के साथ उन बातों को साझा करना चाहूँगा जिसकी चर्चा मैंने प्रेरितिक प्रबोधन “ख्रीस्तुस भीभीत में की है, “आप अपनी निगाहें हाथ फैलाये क्रूसित येसु की ओर गड़ायें रखें, आप उनके द्वारा मिलने वाली मुक्ति का एहसास बारंबार करें। जब आप पापस्वीकार करने जाते हैं तो उनकी करूणा पर अटूट विश्वास करें जो आपको ग्लानियों से मुक्ति प्रदान करती है। आप इस बात पर चिंतन करे कि उन्होंने अपने अनंत प्रेम में खून बहाया, आप अपने को इसके द्वारा शुद्ध होने दें। इस भांति आप अपने में नवीनता का अनुभव करेंगे”। (123) येसु का पास्का आतीत की एक घटना नहीं है वरन पवित्र आत्मा की शक्ति में यहां हमारे मध्य सदैव उपस्थित है, जो हमें विश्वास में येसु ख्रीस्त के शरीर को देखने और स्पर्श करने के योग्य बनाता है जो गरीबों में कष्ट के शिकार हैं।

2. मन परिवर्तन की आवश्यकता

यह हमारे लिए उचित है कि हम पास्का रहस्य का गहराई से चिंतन करें जहाँ हम अपने लिए ईश्वरीय करूणा को पाते हैं। वास्तव में, करूणा की अनुभूति हम सिर्फ येसु ख्रीस्त के साथ आमने-सामने अपने संबंध में, उनके क्रूस मरण और पुनरूत्थान में कर सकते हैं, जैसे कि हम अपने हृदय की बातों को अपने मित्रो के संग करते हैं, “जिन्होंने मुझे प्रेम किया औऱ अपने को अर्पित कर दिया” (गला.2.20)।  यही कारण है कि चालीसे के काल में प्रार्थना अति महत्वपूर्ण है। प्रार्थना हमारे लिए एक अभिव्यक्ति है जहाँ हम अपनी जरुरतों को व्यक्त करते हुए य़ेसु के प्रेम का प्रतिउत्तर अपने जीवन में देते हैं जो सदा हमें पोषित करता है। ख्रीस्तीय अपने इस ज्ञान में प्रार्थना करते हैं कि वे आयोग्य हैं फिर भी वे प्रेम किये जाते हैं। प्रार्थना के कई रुप हो सकते हैं जो अपने स्वयं के ज्ञान में, की जा सकती है लेकिन ईश्वर की नजरों में हमारे लिए महत्वपूर्ण यह है कि हम अपने हृदय की गरहाई में अपनी कठोरता से बाहर निकलते और अपने को ईश्वरीय योजना के अनुरूप परिवर्तित करते हैं।

अतः इस उचित समय में हम अपने को इस्रराएली जनता की भांति मरूभूमि में ले चलें, (होश.2.14) जिससे हम अपने पुकारने वाले की आवाज को और गरहाई से सुन सकें। हम जितना अधिक अपने को उनके वचनों से संयुक्त करेंगे उतना ही अधिक हम उनकी करूणा का एहसास अपने में करेंगे जिससे वे अपनी स्वतंत्रता में हमें प्रदान करते हैं। हम अपने इस कृपा के समय को व्यर्थ न जाने दें, जिससे हम अपने को उनकी ओर परिवर्तित कर सकें।

3. अपनी संतानों से वार्ता हेतु ईश्वर की करूणामय योजना

वास्तव में, ईश्वर हमें अपने में परिवर्तन लाने का एक सुनहरा मौका प्रदान करते हैं हम इसे यूं ही न लें। यह अवसर हमें अपने में कृतज्ञता के भाव जागृत करने हेतु मदद करे औऱ हमें अपने ढ़िलाई से ऊपर उठने में मदद करे। हमारे जीवन में, कलीसिया और विश्व में बुराइयों की उपस्थिति के बावजूद यह अवसर हमें अपने में परिवर्तन लाने का मौका प्रदान करता है, हमारे लिए ईश्वरीय योजना को व्यक्त करता है जहाँ वे हमारी मुक्ति हेतु हमसे वार्ता करते हैं। क्रूसित येसु में, जिन्होंने पाप नहीं किया, लेकिन हमारी मुक्ति हेतु दोषारोपित हुए, पिता हमें बचाने हेतु अपने बेटे में हमारे पापों का भार लाद दिया।(देऊस कारितास एस्त 12)

बेटे के पास्का रहस्य में ईश्वर जो हमसे वार्ता करने की चाह रखते हैं व्यर्थ वार्ता नहीं हैं जैसा की प्राचीन एंथेस के निवासी करते थे, “उन्होंने अपना समय सिर्फ कुछ नई चीजों के बारे में सुनने में व्यतीत किया।(प्रेरि.17.21) ऐसे वार्ता अपने में खोखले और छिछले उत्सुकता से भरे होते, जो अपने में दुनयावी हैं। ये आज भी हमारे समय में व्याप्त हैं, जो संचार माध्यमों के अनुचित उपयोग में भी हो सकता है।

4. समृद्धि साझा करना

पास्का रहस्य को हमारे जीवन का केन्द्र-विन्दु बनाना हमसे इस बात की मांग करता है कि हम क्रूसित येसु ख्रीस्त के प्रति करूणा के भाव रखें जो निर्दोष युद्ध प्रभावितों, जीवन में आक्रमण के शिकार हुए लोगों, अजन्म से लेकर वृद्धों और विभिन्न प्रकार के हिंसाग्रस्त लोगों में अपने को व्यक्त करते हैं। वे प्रर्यावरण के विनाश, दुनिया की संपति के असंतुलन विभाजन, मानव व्यापार के विभिन्न रूपों और लाभ करने का क्षुब्ध में उपस्थित है जो अपने में एक तरह की मूर्ति पूजा है। आज भी हमें अपने को एक दूसरे के साथ साझा करने की जरुरत है, जो अति जरुरत की स्थिति में हैं जिससे हम एक अच्छी दुनिया के निर्माण में सहभागी हो सकें। उदारता में देना हमें और अधिक मानवीय बनाता है वहीं जमाखोऱी हमें अमानवीय बनाता है जहाँ हम अपने स्वार्थ में कैद रहते हैं। हम उससे भी आगे जा सकते हैं और अपने आर्थिक जीवन के आयाम में विचार कर सकते हैं। यही कारण है कि चालीसा की इस अवधि में 26 से 28 मार्च तक मैंने आस्सीसी में युवा अर्थशास्त्रियों की एक संगोष्टी बुलाई है जिसका उद्देश्य अपने में उचित और समाहित अर्थव्यवस्था के ढ़ांचे को तैयार करना है। कलीसिया का धर्म सिद्धांत अपने में इस बात को अनेक बार घोषित करता है राजनीतिक जीवन अपने में एक प्रभावकारी करूणा के रुप को व्यक्त करता है। यह बात आर्थिक जीवन पर लागू होती है जिसे हम धन्य वचनों के आधार पर अपने जीवन में लागू कर सकते हैं।

माता मरियम हमारी सहायता करें जिससे हम चालीसा के काल में अपने हृदय को खुला करते हुए ईश्वर से अपना मेल-मिलाप कर सकें, पास्का रहस्य की ओर निगाहें उठाये रखें और येसु के साथ वार्ता कर अपने में परिवर्तन ला सकें। इस भांति हम दुनिया के लिए नामक और ज्योति बन पायेंगे जिसकी मांग येसु ख्रीस्त हम सभों से करते हैं। (मत्ती.5.13-14)

24 February 2020, 16:44