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देवदूत प्रार्थना के लिए एकत्रित विश्वासी देवदूत प्रार्थना के लिए एकत्रित विश्वासी  (ANSA)

ईश्वर हमें सच्ची स्वतंत्रता एवं जिम्मेदारी सिखलाते हैं, संत पापा

संत पापा फ्राँसिस ने देवदूत प्रार्थना के पूर्व कहा, "अपने हृदय में ईश्वर के नियम को स्वीकार करने के द्वारा हम समझ सकते हैं कि जब हमने अपने पड़ोसी से प्रेम नहीं किया, तब हमने अपने आपको एवं दूसरों को कुछ हद तक मार डाला, क्योंकि घृणा, बदला और विभाजन, भाई-बहन के प्रेम को मार डालता है जो आपसी सम्बन्ध की नींव है।"

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार, 17 फरवरी 2020 (रेई)˸ वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 16 फरवरी को, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया, देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

आज के सुसमाचार पाठ को (मती. 5ः 17-37) पर्वत प्रवचन से लिया गया है और यह नियम पालन करने के मुद्दे को प्रस्तुत करता है कि मैं किस तरह नियम पूरा करूँ और कैसे करूँ।

नियम, पाप और वासना के गुलाम से बचाता है

येसु अपने श्रोताओं को मदद करना चाहते हैं ताकि वे मूसा को दी गई संहिता को अच्छी तरह समझ सकें। उनसे आग्रह करते हैं कि वे ईश्वर के सामने खुले हों जो नियम के द्वारा सच्ची स्वतंत्रता एवं जिम्मेदारी की शिक्षा देते हैं। यह स्वतंत्रता के साधन को जीना है। संत पापा ने नियमों को जीने का प्रोत्साहन देते हुए कहा, "हम इसे न भूलें, नियम को स्वतंत्रता के साधन के रूप में जीयें जो हमें मुक्त होने में मदद देता है, पाप एवं वासना के गुलाम होने से बचाता है।" हम युद्ध की कल्पना करें, उसके परिणामों पर चिंतन करें, उस छोटी लड़की की याद करें जो सीरिया में दो दिनों पहले ठंढ़ से मौत की शिकार हो गई। इस तरह की अनेक घटनाएँ हैं। ये वासना के परिणाम हैं क्योंकि जो लोग युद्ध करते हैं वे अपनी वासना को नियंत्रण में रखना नहीं जानते। वे नियम पालन करने में असफल हो जाते हैं। संत पापा ने कहा, "यदि आप प्रलोभन एवं वासना के गुलाम हो जाते हैं तब आप अपने जीवन के मालिक नहीं रह जाते, बल्कि अपनी इच्छाओं एवं जिम्मेदारियों को संभालने में भी असमर्थ हो जाते हैं।"

नियम को हृदय में स्वीकार करें

येसु का प्रवचन चार प्रतिपदों में संरचित है जिसको इस सूत्र से व्यक्त किया गया है, "तुम लोगों ने सुना है कि कहा गया है... परंतु मैं तुम से कहता हूँ।" ये प्रतिपाद दैनिक जीवन की विभिन्न समस्याओं में प्रकट होते हैं जैसे, हत्या, व्यभिचार, तलाक और सौगंध। येसु उन संहिताओं (नियमों) को नष्ट नहीं करते जो इन समस्याओं से संबंधित हैं बल्कि उनके पूरे अर्थ को समझाते हैं और बतलाते हैं कि उनका पालन किस मनोभाव से किया जाना चाहिए। वे नियम के पालन की औपचारिकता से, उसके ठोस अनुपालन को प्रोत्साहन देते हैं। नियम को हृदय में स्वीकार करने की सलाह देते हैं जो हम सभी के इरादों, निर्णयों, शब्दों और भावनाओं का केंद्र है। भले और बुरे कार्य का उद्गम स्थल हृदय ही है।  

अपने हृदय में ईश्वर के नियम को स्वीकार करने के द्वारा हम समझ सकते हैं कि जब हमने अपने पड़ोसी से प्रेम नहीं किया, तब हमने अपने आपको एवं दूसरों को समान रूप से मार डाला, क्योंकि घृणा, बदला और विभाजन, भाई-बहन के प्रेम को मार डालता है जो आपसी सम्बन्ध की नींव है। यह बात युद्ध के लिए लागू होती है किन्तु जुबान के लिए भी, क्योंकि भाषा मार डाल सकती है।

ईश्वर के नियम को अपने हृदय में स्वीकार करने के द्वारा हम समझ सकते हैं कि हमारी चाहतों को मार्गदर्शन की जरूरत है, क्योंकि हम जो चाहते हैं वह सब कुछ प्राप्त नहीं किया जा सकता और न ही सब कुछ अपने स्वार्थ एवं आधिपत्‍य की भावना से हासिल किया जा सकता।

यदि हम अपने हृदय में ईश्वर के नियमों को स्वीकार करेंगे, तब हम समझेंगे कि वादा तोड़ने की प्रवृति को छोड़ना है, साथ ही साथ, गलत वादा करने के निर्णय को रोकने के बदले, सभी के साथ पूरी ईमानदारी का रवैया अपनाते हुए, बिल्कुल वादा नहीं करने की जीवनशैली अपनाना है।

येसु हमारी मदद करना चाहते हैं

येसु जानते थे कि नियमों का पूरा-पूरा पालन करना आसान नहीं है। यही कारण है कि वे हमारी मदद करना चाहते हैं, जिसके लिए वे इस दुनिया में आये, न केवल नियमों को पूरा करने लिए बल्कि हमें अपनी कृपा देने, ताकि उनकी कृपा द्वारा हम ईश्वर की इच्छा पर चल सकें, ईश्वर और अपने पड़ोसियों से प्रेम कर सकें। ईश्वर की कृपा द्वारा हम हर तरह के नियमों का पालन कर सकते हैं। दूसरी ओर, पवित्रता का अर्थ दूसरा कुछ नहीं, बल्कि उस कृपा को सुरक्षित रखना है, जिसको उन्होंने हमें मुफ्त में प्रदान किया है, उस हाथ को स्वीकार करना है जो लगातार हमारी ओर बढ़ता है ताकि हमारा प्रयास एवं समर्पण, उनकी सहायता से बल प्राप्त करे जो भलाई तथा दया से पूर्ण हैं।

संत पापा ने विश्वासियों से कहा, "आज येसु हमें प्रेम के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए कह रहे हैं उस रास्ते पर, जिसपर वे स्वयं चले और जो हृदय से शुरू होती है। यही ख्रीस्तीय जीवन का रास्ता है।" संत पापा ने प्रार्थना की कि धन्य कुँवारी मरियम हमें अपने पुत्र के दिखाये मार्ग पर चलने, सच्ची खुशी को खोजने और सभी ओर न्याय एवं शांति फैलाने में मदद करे।     

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

संत पापा का अभिवादन

देवदूत प्रार्थना के उपरांत उन्होंने देश-विदेश से एकत्रित सभी तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों का अभिवादन किया।  

उन्होंने कहा, "मैं रोमवासियों एवं आप सभी तीर्थयात्रियों का अभिवादन करता हूँ, विशेषकर, क्रोएशिया, सेर्विया, फ्राँस और स्पेन के तीर्थयात्री तथा मडरिड के विद्यार्थी।"

उन्होंने ब्यांकाविल्ला, फूज्जी, अपरिलिया, पेस्कारा एवं त्रेभिजो के विश्वासियों का अभिवादन किया तथा सेर्रावल्ले स्क्रिविया, क्वारतो अल्तिनो एवं रोसोलिना के दृढ़ीकरण प्राप्त युवाओं की याद की।  

अंत में, उन्होंने प्रार्थना का आग्रह करते हुए सभी को शुभ रविवार की मंगलकामनाएँ अर्पित की।  

              

 

17 February 2020, 16:15