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राजनयिक दल को सम्बोधित करते संत पापा फ्राँसिस राजनयिक दल को सम्बोधित करते संत पापा फ्राँसिस 

अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए वार्ता एवं सम्मान आवश्यक, संत पापा

राजनयिक निकाय को, साल की शुरूआत में सम्बोधित अपने वार्षिक संदेश में, संत पापा फ्राँसिस ने ईरान एवं अमरीका के बीच तनाव पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि यह "इराक में पुनर्निर्माण की क्रमिक प्रक्रिया से समझौता की जोखिम है, साथ ही साथ, एक भयंकर संघर्ष के लिए जमीनी स्तर की तैयारी है।"

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 9 जनवरी 2020 (रेई)˸ परमधर्मपीठ से मान्यता प्राप्त राजनयिक निकाय को सम्बोधित करते हुए 9 जनवरी को संत पापा ने "आशा" के सदगुण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "आशा ख्रीस्तियों के लिए एक महत्वपूर्ण सदगुण है जो भविष्य की ओर आगे बढ़ने हेतु हमारा पथ प्रदर्शन करती है। इस बात पर गौर करते हुए कि शांति एवं समग्र मानव विकास, परमधर्मपीठ एवं कूटनीति के क्षेत्र में इसकी भागीदारी का प्रमुख उद्देश्य है, उन्होंने वार्ता और आज की दुनिया के सामने विभिन्न मुद्दों पर ठोस अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई के लिए अपील की।

प्रेरितिक यात्रा, वार्ता का एक अवसर

संत पापा ने अपने सम्बोधन में याद किया कि विगत साल उनकी प्रेरितिक यात्रा, जिसकी शुरूआत पनामा में विश्व युवा दिवस के साथ हुई थी एक आनन्द एवं युवाओं के साथ मुलाकात करने का महान अवसर था। उन्होंने कहा कि वे हमारे समाज के भविष्य एवं आशा हैं। संत पापा ने युवाओं के खिलाफ प्रौढ़ लोगों के गंभीर अपराधों को स्वीकार किया जिसमें याजक भी शामिल हैं। उन्होंने गौर किया कि कलीसिया में नाबालिगों की सुरक्षा के लिए आयोजित सभा में परमधर्मपीठ ने दुराचार कम करने हेतु अपनी प्रतिबद्धता को नवीकृत किया तथा नाबालिगों की सुरक्षा सुनिश्चित की।       

उन्होंने जोर दिया कि वयस्कों को उचित शैक्षिक जिम्मेदारियों को संभालने की जरूरत है। युग परिवर्तन जिसका अनुभव आज हम कर रहे हैं, परिवारों को शिक्षित करने हेतु सहायता देने एवं कलीसिया और समुदायों को उनकी प्राथमिक अधिकारों पर ध्यान देने के लिए मानवीय संबंधों का निर्माण करने हेतु एक शैक्षिक गांव का निर्माण करने का आह्वान कर रही है।

जलवायु परिवर्तन से संघर्ष

युवाओं के साथ वार्ता करने एवं उन्हें सुनने के लिए खुला होने के संदर्भ में संत पापा ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे को उठाया तथा सभी से पारिस्थितिक बदलाव का आह्वान किया। उन्होंने आमघर की चुनौतियों का सामना करने में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समर्पण की कमी पर खेद प्रकट किया। उन्होंने कहा कि अमाजोन पर सिनॉड में पर्यावरण एक महत्वपूर्ण मुद्दा था जो कि एक कलीसियाई आयोजन था।

संत पापा ने विभिन्न राष्ट्रों जैसे अमरीका एवं बेनेजुएला में राजनीतिक संकटों के प्रसार पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यद्यपि संकट के कारण अलग-अलग हैं, ये असामनता, न्याय, भ्रष्टाचार और गरीबी से जुड़े हैं। अतः इन मुद्दों का सामना करने के लिए आवश्यक है कि वार्ता की संस्कृति स्थापित की जाए।

आपसी समझदारी एवं शांतिपूर्ण सहअस्तित्व

2019 में अपनी दूसरी यात्रा में संत पापा फ्राँसिस संयुक्त अरब अमीरात गये थे जहाँ उन्होंने अल अजहर के ग्रैंड इमाम के साथ मानव बंधुत्व पर एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर किया जिसमें आपसी समझदारी एवं शांतिपूर्ण सहअस्तित्व को बढ़ावा दिये जाने पर जोर दिया गया। उन्होंने भावी पीढ़ी को अंतरधार्मिक वार्ता हेतु प्रशिक्षित किये जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।  

मोरोक्को में अपनी यात्रा के दौरान संत पापा ने "येरूसालेम, दुनिया के तीन महान एकेश्वरवादी धर्मों के लिए एक पवित्र शहर, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का प्रतीकात्मक स्थान हो", इसपर राजा मुहम्मद छटवें के साथ एक संयुक्त अपील पर हस्ताक्षर किया।

शांति के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता

संत पापा ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह शांति प्रक्रिया में सक्रिय हो न केवल पवित्र भूमि में बल्कि पूरे भूमध्यसागरीय प्रांत और मध्यपूर्व में। उन्होंने सीरिया में युद्ध एवं यमन तथा लीबिया में चल रहे संघर्ष की ओर ध्यान आकृष्ट किया। ईरान और अमरीका के बीच तनाव को देखते हुए उन्होंने अपील की कि "सभी संबंधित पक्ष संघर्ष को बढ़ाने से बचें और अंतर्राष्ट्रीय कानून के पूर्ण सम्मान में 'संवाद और आत्म-संयम की ज्वाला को जीवित रखें'।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आवास की खोज में आप्रवासियों की दुर्दशा पर भी ध्यान देने का प्रोत्साहन दिया। इस संदर्भ में उन्होंने फिर एक बार याद किया कि भूमध्यसागर एक विशाल कब्रस्थान बन गया है। उन्होंने विश्व के नेताओं से अपील की कि वे जबरन पलायन की समस्या के लिए कोई स्थायी हल ढूढ़ें। उन्होंने उन देशों की सराहना की जिन्होंने गंभीरता से इसका हल ढूढ़ने का प्रयास किया है और शरणार्थियों को बसाने के भार को साझा किया है।

वार्ता एवं मुलाकात की संस्कृति का महत्व

संत पापा ने पूर्वी यूरोप के देशों, बुल्गारिया, उतरी मकेदुनिया और रोमानिया में अपनी प्रेरितिक यात्रा की याद की, जहाँ उन्होंने वार्ता एवं मुलाकात की संस्कृति के महत्व को महसूस किया। उन्होंने "स्थिर संघर्षों को हल करने में अंतर्राष्ट्रीय कानून के लिए संवाद और सम्मान के महत्व" पर प्रकाश डाला, जो यूरोप में जारी है और जॉर्जिया सहित पश्चिमी बाल्कन एवं दक्षिणी काकेशस में स्थितियों; तथा साइप्रस के पुन: एकीकरण के लिए चल रही वार्ता को प्रोत्साहित करने पर गौर किया। उन्होंने पूर्वी यूक्रेन में जारी संघर्ष के समाधान के प्रयास की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि हथियार नहीं वार्ता ही विवाद का हल करने का महत्वपूर्ण रास्ता है।

अफ्रिका में शांति एवं मेल-मिलाप के चिन्ह

संत पापा ने विगत साल अफ्रीका का भी दौरा किया था जहाँ उन्होंने शांति और मेल -मिलाप के चिन्ह को देखा था। हालांकि, महाद्वीप के अन्य हिस्सों को देखते हुए, पोप ने कहा, "विशेष रूप से बुर्किना फासो, माली, नाइजर और नाइजीरिया में यह दर्दनाक है कि निर्दोष लोगों के खिलाफ हिंसा जारी है, जिसमें कई ख्रीस्तियों को सुसमाचार पर उनकी निष्ठा के लिए हत्या कर दी गई है।” यहाँ भी उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एक साथ कार्य करने की अपील की थी, न केवल आतंकवाद को दूर करने के लिए, किन्तु गरीबी कम करने, स्वास्थ्य के स्तर को ऊपर उठाने, विकास को बढ़ावा देने एवं मानवीय सहायता और साथ ही साथ अच्छे प्रशासन एवं नागरिक अधिकार के लिए। उन्होंने स्थानीय संस्कृति, जाति और धर्मावलम्वियों के साथ भाईचारा को बढ़ावा देने के पहल को प्रोत्साहन दिया था, विशेषकर, कैमरून एवं कोंगो में।

दक्षिणी सूडान में प्रेरितिक यात्रा की उम्मीद

उन्होंने आंतरिक विस्थापन के मुद्दे को सम्बोधित किये जाने की आवश्यकता महसूस करते हुए वे सूडान और मध्य अफ्रीका की याद किया तथा आशा की कि इन दोनों देशों में शांति को अपनाया जाएगा। 2019 में संत पापा की अंतिम प्रेरितिक यात्रा एशिया में सम्पन्न हुई जिसमें उन्होंने थाईलैंड एवं जापान के विभिन्न जाति, धर्म एवं संस्कृति के लोगों से मुलाकात की।

संयुक्त राष्ट्र की स्थापना का उद्देश्य   

वर्ष 2020 संयुक्त राष्ट्र की स्थापना का 75वाँ वर्षगाँठ होगा। संत पापा ने गौर किया कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना का मुख्य उद्देश्य था अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति की चाह रखना, शांति का अनुसरण करना मानव की प्रतिष्ठा का सम्मान करना, मानवीय सहायता और सहयोग देना आदि जो आज भी कायम है। संत पापा जॉन 23वें के प्रेरितिक विश्व पत्र "पाचेम इन तेर्रा" का हवाला देते हुए संत पापा फ्राँसिस ने कहा, "हम नैतिक कार्रवाई के लिए एक मापदंड के रूप में आम अच्छाई के काम करने हेतु पूरे मानव परिवार के संकल्प की पुष्टि करना चाहते हैं, और प्रत्येक देश को एक-दूसरे के अस्तित्व और शांतिपूर्ण सुरक्षा की गारंटी देने में सहयोग करने के लक्ष्य के लिए प्रेरित करते हैं।" उन्होंने कहा कि मानव अधिकार आंतरिक रूप से मानव स्वभाव में ही निहित है।

महिलाओं के लिए संदेश

धन्य कुँवारी मरियम के स्वर्गोदग्रहण पर डोगमा की घोषणा की 70वीं सालगिराह की याद करते हुए संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि 1995 में बिजिंग सम्मेलन के 25 वर्षों बाद, वे सभी महिलाओं को विशेष रूप से सम्बोधित करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, "यह मेरी आशा है कि समाज में महिलाओं की अनमोल भूमिका को अधिक व्यापक रूप से स्वीकार किया जाएगा और महिलाओं के खिलाफ हर प्रकार के अन्याय, भेदभाव एवं हिंसा का अंत होगा।"    

अंत में उन्होंने कहा कि मरियम का स्वर्गोदग्रहण हमें यह भी निमंत्रण देता है कि हम पृथ्वी पर अपनी यात्रा के अंतिम लक्ष्य पर ध्यान दें। उस दिन पर जब न्याय और शांति को पुनः स्थापित किया जाएगा।

09 January 2020, 17:21