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बुधवारीय आमदर्शन में संत पापा बुधवारीय आमदर्शन में संत पापा   (ANSA)

ईश्वर के धन्य-वचन खुशी के मार्ग, संत पापा

संत पापा फ्रांसिस ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह में ईश्वर के धन्य-वचनों पर अपनी धर्मशिक्षा की नई श्रृंखला शुरू की।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन रेडियो, गुरूवार, 29 जनवरी 2020 (रेई) संत पापा फ्रांसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर विश्व के विभिन्न देशों से आये हुए तीर्थयात्रियों और विश्वासियों को, संत पापा पौल षष्ठम के सभागार में अपनी धर्मशिक्षा माला देने के पूर्व संबोधित करते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों सुप्रभात।

आज हम संत मत्ती रचित सुसमाचार के अधार धन्य वचनओं पर धर्मशिक्षा की एक नई श्रृंखला शुरू करते हैं। इसकी शुरूआत “पर्वत प्रवचन” से होती है जो विश्वासियों के जीवन के साथ-साथ अविश्वासियों को भी आलोकित करती है। हमारे लिए यह असंभव है कि हम येसु के इन वचनों से अपने को प्रभावित न पायें, जो हममें उन्हें समझने की इच्छा उत्पन्न करता और उन्हें पूर्णरुपेण सही अर्थ में स्वीकारने हेतु मदद करता है। येसु के धन्य-वचन हम ख्रीस्तियों के लिए “पहचान पत्र” की भांति हैं, ये हमारे लिए पहचान पत्र के समान हैं क्योंकि ये हमारे लिए येसु के चेहरे को परिलक्षित करते और उनकी जीवन शैली के बारे में हमें बतलाते हैं।

धन्य-वचनों की शुरूआत

सबसे पहले, संत पापा ने कहा कि हम इस बात पर विचार करें की कैसे येसु के इस संदेश की शुरूआत हुईः येसु अपने पीछे आऩे वाली भीड़ को देखकर गलीलिया झील के किनारे पहाड़ पर चढ़े और बैठकर अपने शिष्यों को धन्य-वचनों पर शिक्षा देने लगे। यह शिक्षा येसु अपने पीछे आने वालों, अपने सुनने वालों के लिए देते हैं अतः यह संदेश सारी मानव जाति को अपने में सम्माहित करता है।

इसे साथ ही “पर्वत” हमारा ध्यान सिनाई पहाड़ की ओर आकर्षित कराता है जहां याहवे ने मूसा को दस आज्ञाओं की पाटी प्रदान की थी। येसु ख्रीस्त नये नियमों की शिक्षा देते हैं जो हमें दरिद्र होने, नम्र और करूणावान बनने हेतु निमंत्रण देते हैं। ये “नयी आज्ञाएं” हमारे लिए नियमों से बढ़कर हैं। वास्तव में, येसु ख्रीस्त हमारे ऊपर किसी बात को नहीं थोपते वरन नये रुप में खुशी के रहस्य को हमारे लिए प्रकट करते हैं, इस भांति अपनी राह को वे आठ बार धन्य हैं वे, धन्य हैं वे, धन्य हैं वे ... के रुप में दुहराते हैं।

धन्य-वचनों में तीन भाग 

हर धन्य-वचनों में हम तीन भाग को पाते हैं। पहले भाग में सदैव, शब्द “धन्य” आता है उसके बाद एक संदर्भ जहाँ धन्य, एक परिस्थिति में संबोधित है, धन्य हैं वे जो गरीब हैं, जो दीन-हीन हैं, जो शोकित हैं, धार्मिकता के भूखे और प्यासे हैं इत्यादि। इसके बाद अंत में हम धन्य होने के कारण को पाते हैं जो “क्यों” से संयोजित है। संत पापा ने कहा कि इस भांति हम येसु के आठ धन्य-वचनों को पाते हैं जिन्हें याद कर लेना और उन्हें अपने हृदय की गरहाई में दुहराना हमारे लिए कितना सुखद है।

उन्होंने कहा कि हम इस बात पर ध्यान दें कि यहाँ खुशी का कारण हमारे लिए वर्तमान परिस्थिति नहीं, वरन उस स्थिति में रहते हुए भी, एक नये परिस्थिति की ओर निगाहें उठाये रखना जिसे ईश्वर हमें एक उपहार स्वरुप प्रदान करने वाले हैं, क्योंकि स्वर्गराज्य उन्हीं का है, क्योंकि उन्हें सांत्वना मिलेगी, उन्हें प्रतिज्ञात देश प्राप्त होगा इत्यादि।

तीसरे भाग जहाँ हम मुख्य रुप से आनंद के कारण को पाते हैं येसु ख्रीस्त भविष्य की सकारात्मक को व्यक्त करते हैं, “उन्हें सांत्वना मिलेगी”, “उन्हें प्रतिज्ञात देश प्राप्त होगा”, “उन पर दया की जायेगी”, “वे ईश्वर के संतान कहलायेंगे।”

“धन्य” का अर्थ

संत पापा ने कहा कि लेकिन “धन्य” शब्द का अर्थ क्या हैॽ क्योंकि आठों वाक्यों की शुरूआत इससे होती है। इसका वास्तविक अर्थ हमारा ध्याऩ इस ओर इंगित नहीं करता है कि व्यक्ति अपने में भरा-पूरा या अच्छी स्थिति में है वरन यह व्यक्ति को ईश्वरीय कृपा की स्थिति में दिखाता है। वह ईश्वर की अनुकम्पा में विकास करता और ईश्वर की राह- धैर्य, दरिद्रता, दूसरों की सेवा और सांत्वना में आगे बढ़ता है। ऐसे लोग आनंदित और धन्य होते हैं।

ईश्वर के मार्ग अविचारनीय

ईश्वर अपने को हमें देने हेतु अविचारनीय मार्ग का चुनाव करते हैं शायद वे हमारे लिए हमारी कमजोरियां, हमारे आंसू और हमारी असफलताएं हैं। यह पास्का की खुशी है जिसके बारे में पूर्वी रीति के भाई कहते हैं कि वह अपने में कलंकित था लेकिन वह जीवित है, वह मृत्यु से होकर गुजरा लेकिन उसने ईश्वरीय शक्ति का अनुभव किया। संत पापा ने कहा कि धन्य-वचन हमारे लिए सदा खुशी लेकर आते हैं। यह हमें खुशी के मार्ग में ले चलते हैं। हम संत मत्ती रचित सुसमाचार के अध्याय पाँच का अध्ययन आज और आने वाले दिनों में अनेक बार करें, जिससे हम खुशी के इस सुन्दर, निश्चित मार्ग को समझ सकें जिसे ईश्वर हमें प्रदान करते हैं।

इतना कहने के बाद संत पापा फ्रांसिस ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की और सभों से संग हे पिता हमारे प्रार्थना का पाठ करते हुए सभों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया। 

29 January 2020, 15:37