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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (AFP or licensors)

हमारा सम्पूर्ण जीवन ईश्वर के प्रति "हाँ" के लिए समर्पित हो, पोप

वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 8 दिसम्बर को मरियम के निष्कालंक गर्भागमन महापर्व के अवसर पर, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार, 9 दिसम्बर 2019 (रेई)˸ आज हम मरियम के निष्कालंक गर्भागमन का महापर्व मना रहे हैं जो आगमन काल, प्रतीक्षा की घड़ी, की पृष्ठभूमि पर रखी गयी है ˸ ईश्वर उसे पूरा करेंगे जिसकी उन्होंने प्रतिज्ञा की है। संत पापा ने कहा किन्तु आज के पर्व में हमें बतलाया गया है कि कुँवारी मरियम के जीवन में पहले ही कुछ पूरा हो चुका था। इस पूर्णता की शुरूआत आज होती है जो प्रभु की माता के जन्म से पहले की घटना है। वास्तव में, उनका निष्कलंक गर्भागमन हमें उस विशेष घड़ी की ओर प्रेरित करती है जब मरियम का जीवन उनकी माता के गर्भ में पलने लगा। वहीं ईश्वर के विशुद्ध प्रेम ने उन्हें बुराई के हर स्पर्श से बचाये रखा जो मानव परिवर की सामान्य देन है।  

ईश्वर की इच्छा पर भरोसा  

आज के सुसमाचार पाठ में, मरियम को स्वर्गदूत का अभिवादन गूँजता है, "प्रणाम, प्रभु की कृपापात्री, प्रभु आपके साथ है।" (लूक. 1,28) ईश्वर ने अपने रहस्यमय योजना में कृपा से पूर्ण सृष्टि पर हमेशा विचार किया और उसकी कामना की, जो उनके प्रेम से परिपूर्ण हो किन्तु भरे जाने के लिए खाली स्थान की आवश्यकता है, अपने आपको खाली करना, परित्याग करना, जैसा कि मरियम ने किया। वे ईश्वर की वाणी को सुनना एवं उनकी इच्छा पर पूरी तरह भरोसा करना और अपने जीवन में स्वीकार करना जानती थीं। इस तरह शब्द ने उनके गर्भ में शरीर धारण किया। यह उनके "हाँ" से संभव हुआ जिसको उन्होंने स्वर्गदूत के सामने कहा था। मरियम ने कहा, ''देखिए, मैं प्रभु की दासी हूँ। आपका कथन मुझ में पूरा हो जाये।'' (पद. 38).

दूत के संदेश पर मरियम की प्रतिक्रिया पर प्रकाश डालते हुए संत पापा ने कहा, "मरियम ने कोई तर्क नहीं किया, न ही प्रभु के आगमन पर बाधा डाली बल्कि तुरन्त विश्वास किया एवं पवित्र आत्मा के कार्य के लिए स्थान दिया। उन्होंने अपने पूरे अस्तित्व को प्रभु को चढ़ा दिया ताकि उनके शब्द एवं उनकी इच्छा आकार ले और पूरा हो सके। इस तरह ईश्वर की इच्छा का पूर्ण पालन कर मरियम अति सुन्दर और अति पवित्र बन गई, जिनमें पाप का छोटा सा दाग भी नहीं है। वे दीन हैं, एक उत्कृष्ट कृति हैं किन्तु विनम्र, दीन और गरीब बनी रहीं। उनमें ईश्वर की सुन्दरता की झलक दिखाई पड़ती है जो प्रेम, अनुग्रह एवं आत्मत्याग में निहित है।

सेवा का मनोभाव

संत पापा ने कुँवारी मरियम के "हाँ" पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मैं यहाँ मरियम के शब्द "हाँ" को रेखांकित करना चाहूँगा जिसके द्वारा उन्होंने अपने आपको ईश्वर के लिए एक दासी के रूप में समर्पित किया। मरियम द्वारा ईश्वर को हाँ कहना, शुरू से ही सेवा के मनोभाव में, दूसरों की जरूरतों की ओर ध्यान देने में प्रकट हुई। वास्तव में, एलिजाबेथ से मुलाकात जो स्वर्गदूत के संदेश के तुरन्त बाद हुई, इसका साक्षात् उदाहरण है। ईश्वर के प्रति तत्परता दूसरों की मदद करने की चाह में परिलक्षित हुई। ये सारी चीजें कोलाहल और आडंबर से रहित थीं, इनमें  ही सम्मान और विज्ञापन का स्थान खोजीं क्योंकि उदारता एवं दया के कार्यों के लिए जीत की तरह प्रचार की कोई आवश्यकता नहीं होती। करुणा के कार्य चुपचाप, शांत भाव से, बिना डींग मारे की जाती है। संत पापा ने कहा कि हमारे समुदायों में भी हम मरियम के उदाहरणों को अपनाने के लिए बुलाये जाते हैं।  

अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित

हमारी माता का पर्व हमें अपने सम्पूर्ण जीवन को ईश्वर के प्रति "हाँ" के लिए अर्पित करने में मदद दे। अपने दैनिक जीवन में प्रेम एवं सेवा द्वारा उनकी आराधना करने हेतु "हाँ"।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

09 December 2019, 14:54