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संत गण मानव पहुँच से परे नहीं होते, संत पापा

संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार को, वाटिकन में संत घोषणा हेतु गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ के 400 सदस्यों से मुलाकात की। उन्होंने वाटिकन के संत प्रकरण परिषद की स्थापना की 50वीं वर्षगाँठ के अवसर पर उनसे मुलाकात की। संत पापा ने उन्हें संत घोषणा और धन्य घोषणा के उम्मीदवारों की जाँच करने के कार्यों को जारी रखने का प्रोत्साहन दिया।

उषा मनोरमा तिरकी-संत घोषणा हेतु गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ एवं दिव्य उपासना के लिए गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ के कार्य को पहले, रीतियों के लिए पवित्र धर्मसंघ के द्वारा किया जाता था।

संत पापा फ्राँसिस ने बुधवार को, इसमें संशोधन करते हुए धन्य घोषणा के 33 उम्मीदावरों के लिए संत घोषणा हेतु 10 अज्ञप्तियों को प्राधिकृत किया है।

पवित्रता

धर्मसंघ के सदस्यों को सम्बोधित करते हुए संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि कई धन्य घोषणा एवं संत घोषणा जिनको हाल के दशकों में मनाया गया है इसका अर्थ है कि संत ख्रीस्तीय जीवन के आदर्श हैं और मार्गदर्शन करते हैं किन्तु वे मानव के पहुँच से दूर नहीं हैं। 

वास्तव में ये वे लोग हैं जिन्होंने दैनिक जीवन के परिश्रम में सफलता एवं असफलता को महसूस किया है तथा उठने और यात्रा में आगे बढ़ने हेतु हमेशा प्रभु से बल प्राप्त किया है।

संत घोषणा एवं धन्य घोषणा हमें प्रबुद्ध, आकर्षण और चुनौती भी देते हैं क्योंकि ईश्वर के शब्द ने इतिहास में शरीरधारण किया और हमारे बीच रहे। फिर भी हम ईश्वर के धैर्यशील व्यक्तियों में पवित्रता को देखते हैं क्योंकि यह कई बार छिपा हुआ और हमारे लिए अस्पष्ट लगता है। इस संबंध में उन्होंने माता-पिता का उदाहरण दिया जो अपने बच्चों को बड़े प्रेम से जन्म देते और उनका पालन-पोषण करते हैं, स्त्री और पुरूष जो कठिन परिश्रम कर घर में रोटी लाते हैं, बीमार, बुजूर्ग और धर्मसमाजी जो मुस्कुराना जारी रखते हैं। यह हमारे नजदीक रहने वालों की पवित्रता है जो ईश्वर की उपस्थिति के प्रतिबिम्ब हैं।      

संत पापा ने धर्मसमाज का आह्वान किया कि वे अपने अनुसंधान और जाँच के कार्यों को सफाई और सटीकता से करना जारी रखें। वाटिकन सिटी

 

12 December 2019, 17:26