Vatican News
मरियम मेजर महागिरजाघर में प्रार्थना करते संत पापा फ्राँसिस मरियम मेजर महागिरजाघर में प्रार्थना करते संत पापा फ्राँसिस 

संस्कृतियों के बीच संवाद को बढ़ाने में सहायक मरियाशास्त्र

संत पापा फ्राँसिस ने परमधर्मपीठीय अकादमी की 24वीं आम सत्र को एक संदेश भेजा जिसमें ईशशास्त्रीय खोज के लिए डॉ. कार्मेल लोपेज कालदेरोन एवं माननीय लोनट कतालिन ब्लीदर को पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 5 नवम्बर 2019 (रेई)˸ अपने संदेश की प्रस्तावना के रूप में संत पापा फ्राँसिस ने परमधर्मपीठीय अकादमी को एक ऐसा स्थान कहा, जहाँ ज्ञान, सेवा बन जाता है क्योंकि ज्ञान के बिना सच्चा एवं समग्र विकास संभव नहीं है। एक अकादमी, सिनॉडालिटी (एक साथ) का आदर्श है और सुसमाचार को ऊर्जा प्रदान करता है।

संत पापा ने अपना संदेश, सातवें परमधर्मपीठीय अकादमी के 24वें आम सत्र के प्रतिभागियों को दिया। इसके संयोजक समिति के अध्यक्ष हैं कार्डिनल जानफ्रांको रवासी।  

इस साल इसकी विषयवस्तु है, "मरियम, संस्कृतियों के बीच शांति की राह।" इसका आयोजन परमधर्मपीठीय अंतरराष्ट्रीय मरिया अकादमी ने की है। इस साल इसकी स्थापना का 60वां वर्षगाँठ है। संत पापा जॉन 23वें ने 8 दिसम्बर 1959 को इसकी स्थापना की थी।  

मरिया, मानवता की शिक्षिका

संत पापा ने विषयवस्तु पर चिंतन करते हुए विभिन्न संत पापाओं द्वारा माता मरियम के प्रति सम्मान प्रकट करने पर प्रकाश डाला।  

उन्होंने याद किया कि किस तरह दो विश्व युद्धों के विकट अनुभवों ने, संत पापा पीयुस 12वें को, भयभीत मानव जाति के लिए माता मरियम को शांति के एक प्रकाशस्तम्भ के रूप में प्रस्तुत करने हेतु प्रेरित किया।

द्वितीय वाटिकन महासभा ने माता मरियम को "मानवता की शिक्षिका और मानव हृदय की गहरी आकांक्षाओं की सेवा के मिशन में कलीसिया की आदर्श घोषित किया।"  

परेशानी पर आशा की जीत

संत पापा पौल छटवें ने धन्य कुँवारी मरियम एवं विश्वाससियों के बीच संबंध पर प्रकाश डाला और कहा कि वे समकालीन मानवता, जो परेशानी और एकाकीपन से दबा है स्थिरता और आश्वस्त दृष्टि प्रदान करती हैं। वे चिंता पर आशा एवं असहजता पर शांति प्रदान करती हैं।  

संत पापा ने कहा, "वे पीड़ा पर आशा की विजय, एकाकी से समुदाय, क्रांति पर शांति, उदासी एवं नफरत पर आनन्द एवं सुन्दरता, अस्थायी पर स्थायी और मृत्यु पर जीवन को प्रस्तुत करती हैं।  

हमारे समय के महत्वपूर्ण मूद्दे में माता मरियम को शामिल करना

संत पापा जॉन पौल द्वितीय अपने इरादे में पक्के थे कि मरियाशास्त्र को पहचाना जाए और ईशशास्त्रीय प्रशिक्षण एवं संवाद में शामिल किया जाए, ताकि वे हमारे समय के महत्वपूर्ण सवालों में अपनी उचित भूमिका निभा सकें।

मरियाशास्त्र एवं ईश वचन का ईशशास्त्र

अंततः संत पापा फ्राँसिस ने संत पापा बेनेडिक्ट 16वें की मरियम के प्रति श्रद्धा पर प्रकाश डाला, जिन्होंने विशेषज्ञों को मरियाशास्त्र एवं ईश वचन के ईशशास्त्र के बीच संबंध की खोज करने का आग्रह किया था।  

संत पापा ने संदेश में कहा कि वास्तव में, परमधर्मपीठीय मरियाई अकादमी ने मरियाशास्त्र के विचारों एवं अपने समर्थन के साथ, विश्वव्यापी कलीसिया की शिक्षा का साथ दिया है।      

अंत में, उन्होंने कहा कि "ये प्रतिबद्धताएँ स्पष्ट साक्षी हैं कि संस्कृतियों के बीच वार्ता एवं भ्रातृत्व तथा शांति को पोषित करने हेतु मरियाशास्त्र की उपस्थिति आवश्यक है।"

05 December 2019, 15:58