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बैंककॉक में काथलिक पुरोहितों एवं धर्मबहनों के साथ सन्त पापा फ्राँसिस, 22.11.2019 बैंककॉक में काथलिक पुरोहितों एवं धर्मबहनों के साथ सन्त पापा फ्राँसिस, 22.11.2019 

शोषण एवं हिंसा को थाय समाज से उखाड़ फेंकने का आग्रह

सेन्ट पीटर्स पल्ली के गिरजाघर में सन्त पापा प्राँसिस ने थाय काथलिक पुरोहितों, धर्मसमाजियों एवं धर्मसंघियों को आशीर्वाद दिया तथा उन विश्वासियों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की जिन्होंने अतीत में "निष्ठा और दैनिक प्रतिबद्धता की मूक शहादत" अर्पित की थी।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

बैंककॉक, शुक्रवार, 22 नवम्बर 2019 (रॉयटर्स, वाटिकन रेडियो): बौद्ध बहुल थाय समाज से महिलाओं और बच्चों के शोषण को उखाड़ फेंकने के आग्रह साथ सन्त पापा फ्राँसिस ने अपनी थायलैण्ड यात्रा का दूसरा दिन समाप्त किया। बैंककॉक के राष्ट्रीय स्टेडियम में लगभग 60,000 काथलिक विश्वासियों के लिये ख्रीस्तयाग अर्पण के अवसर पर प्रवचन करते हुए उन्होंने राष्ट्र में कुख्यात कथित यौन पर्यटन और उससे जुड़ी दासता, हिंसा एवं दुराचार की कड़े शब्दों में निन्दा की।

सार्वभौमिक काथलिक कलीसिया के परमधर्मगुरु सन्त पापा फ्राँसिस 19 से 26 नवम्बर तक थायलैण्ड तथा जापान की सात दिवसीय प्रेरितिक यात्रा पर हैं। यात्रा के प्रथम तीन दिन थायलैण्ड में व्यतीत कर शनिवार 23 नवम्बर को वे थायलैण्ड से जापान के लिये प्रस्थान करेंगे। थायलैण्ड तथा जापान में सन्त पापा फ्राँसिस की यह पहली तथा इटली से बाहर उनकी 32 वीं विदेश यात्रा है।

यौन शोषण, मानव तस्करी के उन्मूलन का आग्रह

महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध यौन दुराचार और शोषण की निन्दा करने के साथ-साथ सन्त पापा ने बैंककॉक में अन्तरधार्मिक सम्वाद तथा आप्रवासियों एवं शरणार्थियों की समस्या के प्रति उत्कंठा व्यक्त की। उन्होंने कहा, "मैं उन बच्चों और महिलाओं के बारे में सोच रहा हूँ, जो वेश्यावृत्ति और मानव तस्करी के शिकार हैं तथा मानव मर्यादा से वंचित कर दिये गये हैं।" ग़ौरतलब है कि थायलैण्ड में प्रतिवर्ष लगभग 35 लाख पर्यटकों का आगमन होता है। यौन शोषण और मानव तस्करी के उन्मूलन को लिये थाय सरकार ने कई कदम उठायें हैं किन्तु मसाज पार्लर्स एवं गो-गो बार्स के नाम पर यौन शोषण होता रहा है।   

शरणार्थियों एवं आप्रवासियों की व्यथा के प्रति भी सन्त पापा ने ध्यान आकर्षित कराया जो प्रायः शोषण एवं मानव तसकरी का शिकार बनते हैं। थायलैण्ड एशिया का सर्वाधिक विशाल शरणार्थी शिविर है, जहाँ केवल म्यानमार से ही लगभग एक लाख शरणार्थी शरण पा रहे हैं। हाल ही में मुस्लिम रोहिंगिया संकट के उपरान्त म्यानमार के हज़ारों लोग थायलैण्ड में आ बसे हैं, जो प्रायः मानव तस्करी का शिकार बनते हैं।

काथलिक शहीदों को श्रद्धान्जलि

शुक्रवार को थायलैण्ड की प्रेरितिक यात्रा के दूसरे चरण में सन्त पापा फ्राँसिस ने थायलैण्ड के उन काथलिकों के प्रति श्रद्धान्जलि अर्पित की जो अपने विश्वास के ख़ातिर मौत के घाट उतार दिये गये थे। बौद्ध बहुल राष्ट्र थायलैण्ड में काथलिक धर्मानुयायी आबादी का केवल एक प्रतिशत हैं, जो आज थाय संस्कृति के साथ बिलकुल घुल-मिल गये हैं। इनसे सन्त पापा ने अनुरोध किया कि ख्रीस्तीय धर्म को वे विदेशी धर्म न मानें अपितु सुसमाचार के सन्देश से प्रेरणा पाकर थाय समाज को न्याय और शांति से परिपूर्ण समाज बनायें।

बैंककॉक शहर के परिसर में स्थित वत रोमन नामक काथलिक क्षेत्र की भेंट के अवसर पर सन्त पापा ने थायलैण्ड के पुरोहित निकोलस किटबामरुंग की समाधि पर श्रद्धा अर्पित की। सन् 1944 ई. में फादर निकोलस का निधन हो गया था। थायलैण्ड के एक बौद्ध परिवार में जन्में निकोलस ने बौद्ध धर्म का परित्याग कर काथलिक धर्म का आलिंगन कर लिया था। पश्चिमी सरकार विरोधी काल में गिरजाघर के घण्टे बजाने के लिये फादर निकोलस को गिरफ्तार कर लिया गया था। 15 वर्ष जेल में रहने के उपरान्त फादर तपेदिक रोग से पीड़ित हो गये थे तथा वहीं उनका निधन हो गया था। थाय काथलिक कलीसिया में इन्हें शहीद माना जाता है।   

शहीद पुरोहित निकोलस किटबामरुंग के समाधि स्थल पर निर्मित सेन्ट पीटर्स पल्ली के गिरजाघर में सन्त पापा प्राँसिस ने थाय काथलिक पुरोहितों, धर्मसमाजियों एवं धर्मसंघियों को आशीर्वाद दिया तथा उन विश्वासियों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की जिन्होंने अतीत में "निष्ठा और दैनिक प्रतिबद्धता की मूक शहादत" अर्पित की थी।   

सन् 1940 ई. में तीन किशोरियों सहित सात काथलिक विश्वासी थायलैण्ड के नाखोन फानोम प्रान्त में थाय पुलिस द्वारा मार डाले गये थे। सन्त पापा जॉन पौल द्वितीय द्वारा ये शहीद घोषित किये गये थे। इसी प्रकार, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान काथलिकों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था।

22 November 2019, 11:18