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संत पेत्रुस महागिरजाघर में मिस्सा चढ़ाते हुए संत पापा फ्राँसिस संत पेत्रुस महागिरजाघर में मिस्सा चढ़ाते हुए संत पापा फ्राँसिस  (Vatican Media)

पुनरुत्थान जीवन का उद्देश्य और प्रयोजन है, संत पापा फ्राँसिस

काथलिक कलीसिया नवम्बर महीने में सभी मृतकों के लिए प्रार्थना करने का विशेष अवसर देती है। सोमवार 4 नवम्बर को संत पापा ने इस वर्ष के दौरान मृत सभी कार्डिनलों और धर्माध्यक्षों के लिए पवित्र मिस्सा बलिदान चढ़ाया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 4 नवम्बर, 2019 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 4 नवंबर को सुबह 11.30 बजे वाटिकन के संत पेत्रुस महागिरजाघर में इस वर्ष के दौरान निधन हुए विश्व के सभी कार्डिनलों और धर्माध्यक्षों की आत्माओं की अनंत शाति के लिए पवित्र मिस्सा समारोह का अनुष्ठान किया।

पुनरुत्थान

संत पापा ने अपने प्रवचन में कहा कि आज के पाठ हमें याद दिलाते हैं कि हमारा जन्म मरने के लिए नहीं अपितु जी उठने के लिए हुआ है। संत पौलुस फिलिप्पियों के नाम पत्र 3:20 में कहते हैं कि “हमारा स्वदेश स्वर्ग है।” संत योहन के सुसमाचार 6:40 में येसु कहते हैं,“सबों को अंतिम दिन मैं पुनर्जीवित कर दूँगा।”

संत पापा ने कहा कि येसु हमारी मदद हेतु आते हैं। सुसमाचार कहता है कि “जो मेरे पास आता है, मैं उसे कभी नहीं ठुकराऊँगा।” (योहन, 6:37) येसु हमें अपने पास बुलाते हैं (मत्ती11:28) “मेरे पास आओ, मैं तुम्हें विश्राम दूँगा।” येसु हमें मृत्यु और हर प्रकार के भय से बाहर निकालेंगे। हमें येसु के पास सच्चे दिल और मन से जाने की जरुरत है। अपने दैनिक जीवन में अपने कामों को प्रभु की प्रेरणा द्वारा करने की जरुरत है। हमें प्रभु से बातें करने के लिए अपना समय निकालने की जरुरत है।   

संत पापा ने कहा कि येसु का कथन विघटनकारी है, “जो मेरे पास आता है मैं उसे कभी नहीं ठुकराऊँगा,” मानो ऐसा लगता है कि जो ख्रीस्तीय उसके पास नहीं जाता उसके लिए निष्कासन पूर्वाभास है। जो लोग मानते हैं कि कोई बीच का रास्ता नहीं है: कोई भी येसु का नहीं हो सकता, जो अपने आप को येसु की ओर नहीं ले जाता। जो येसु के साथ रहता है, वह येसु के साथ बाहर निकलता है।

निकास

संत पापा ने कहा कि जीवन एक निकास है: माँ के गर्भ से प्रकाश में आने के लिए, बचपन से किशोरावस्था में प्रवेश करने के लिए, किशोरावस्था से वयस्क जीवन तक और इस दुनिया को छोड़ने तक। आज, हम अपने कार्डिनलों और धर्माध्यक्षों के लिए प्रार्थना कर रहे हैं, जो इस जीवन से बाहर निकलकर पुनर्जीवित प्रभु से मिलने के लिए आगे बढ़ गये हैं। हम सबसे महत्वपूर्ण और सबसे कठिन निकास को नहीं भूल सकते हैं, जो अन्य सभी को निकासों को अर्थ देता है: ‘स्वयं से निकलना’। अपने आप से बाहर निकलकर ही हम उस द्वार को खोलते हैं जो प्रभु की ओर ले जाता है। हम प्रभु से अपने आप से बाहर निकलने और येसु जो जीवन हैं, उनके पास जाने हेतु कृपा मांगें।   

खुद से बाहर निकलें

संत पापा ने पहले पाठ (2 मकाबी 12.45) में किये गये पुनरुत्थान का जिक्र किया, “उन लोगों के लिए शानदार इनाम आरक्षित है जो धर्मनिष्ठा की भावनाओं के साथ मौत की नींद सो जाते हैं।” संत पापा ने कहा कि दूसरों के प्रति प्रेम अनंत काल के दरवाजे खोलती है। जरूरतमंदों की सेवा करने के लिए उन्हें स्वर्ग तक पहुँचना है। जैसा कि संत पौलुस भी हमें याद दिलाता है, "प्रेम का कभी अंत नहीं होगा।" (1कुरिं, 13: 8)। प्रेम वह पुल है जो पृथ्वी को स्वर्ग से जोड़ता है। संत पापा ने खुद की जाँच करने को कहा, कि क्या हम इस पुल पर आगे बढ़ रहे हैं? क्या हम दूसरों की मदद करते हैं? क्या हम दूसरों के दुःख में सहभागी होते हैं? क्या हम उनके लिए प्रार्थना करते हैं जिनके बारे दूसरे नहीं सोचते हैं? यह मात्र दूसरों की मदद करना नहीं है, परंतु जीवन और पुनरुत्थान का सवाल है। संत पापा ने इस जीवन की राह में अपने आप से बाहर निकल कर प्रभु के साथ आगे बढ़ने हेतु कृपा मांगने के लिए सभी को प्रेरित किया।

जीवन का लक्ष्य

अंत में, पुनरुत्थान के मद्देनजर संत पापा ने संत इग्नासियुस के आध्यात्मिक अभ्यासों में से एक सुझाव को प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि, एक महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले, आप अपने आप को ईश्वर के सामने अपने जीवन के अंतिम क्षणों की कल्पना करें। इस परिप्रेक्ष्य में सामना किया गया हर जीवन विकल्प अच्छी तरह से उन्मुख है, क्योंकि यह पुनरुत्थान के करीब है, जो जीवन का अर्थ और उद्देश्य है। चूंकि प्रस्थान की गणना लक्ष्य से की जाती है, चूंकि बुवाई फसल द्वारा आंकी जाती है, इसलिए जीवन को उसके अंत से अच्छी तरह से आंका जा सकता है। यह, वास्तविकता को प्रभु की आँखों से देखने हेतु एक उपयोगी अभ्यास हो सकता है।

संत पापा ने अंत में कहा, “दुनिया की कई आवाजों के बीच जहाँ हमारे अस्तित्व की भावना खो जाती है, आइए हम येसु की इच्छा के अनुरूप जीयें। आज हम इस भांति जीयें, मानो हम पुनरुत्थान की सुबह को जी रहे हों।”

04 November 2019, 16:40