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वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पियेत्रो परोलिन वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पियेत्रो परोलिन 

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आदर्श

संत पापा फ्रांसिस ने बृहस्पतिवार को पदार्थ जो ओजोन परत को क्षीण करते हैं उसपर मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की 31वीं सभा के प्रतिभागियों को संदेश भेजा। उनके संदेश को वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पियेत्रो परोलिन ने प्रस्तुत किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 7 नवम्बर 2019 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने ओजोन परत की रक्षा पर मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की 31वीं सभा के प्रतिभागियों को संदेश दिया।

पदार्थ जो ओजोन परत को क्षीण करते हैं इसपर मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की 31वीं सभा के प्रतिभागियों से संत पापा ने कहा कि यह प्रोटोकॉल, ओजोन परत के संरक्षण के लिए अपने संशोधनों और वियेना सम्मेलन के साथ मिलकर न केवल पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में, बल्कि अभिन्न मानव विकास को बढ़ावा देने के अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए भी एक मॉडल का प्रतिनिधित्व करता है।

ओजोन परत के संरक्षण के लिए समर्पित

22 मार्च 1985 को वियेना में हस्ताक्षर के लिए ओजोन परत के संरक्षण के लिए समर्पित पहला कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लगभग पैंतीस वर्ष बीत चुके हैं। यह संयुक्त राष्ट्र प्रणाली का पहला सम्मेलन था ताकि राष्ट्रों की ओर से सार्वभौमिक समर्थन हासिल किया जा सके, जिसमें आज 197 देश शामिल हैं।

इन 35 सालों ने सकारात्मक फल उत्पन्न किये हैं। वास्तव में, कई वैज्ञानिक अध्ययन किये गये हैं जिनमें से नवीनतम अध्ययन ओजोन परत के धीरे-धीरे क्षीण होने पर की गयी है। इस संबंध में 35 वर्षों में जो सीख मिली है उसके आधार पर संत पापा ने तीन बातें रखीं।

विभिन्न क्षेत्रों के बीच सहयोग

पहला, इस बात पर जोर देने और सराहना करने की आवश्यकता है कि किस तरह प्रशासन, वैज्ञानिक समुदाय, राजनीतिक जगत, आर्थिक और औद्योगिक नेताओं और नागरिक समाज के व्यापक और फलदायी सहयोग से सृष्टि की रक्षा एवं मानव विकास को प्रोत्साहन मिला है।

इस सहयोग ने दिखलाया है कि हम किस तरह महत्वपूर्ण परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। एक निश्चित अर्थ में, अंतरराष्ट्रीय ओजोन व्यवस्था यह प्रदर्शित करता है कि हमें तकनीकी को सीमित करने और उसका नियंत्रण करने की स्वतंत्रता की आवश्यकता है। इसे दूसरे प्रकार की प्रगति की सेवा में लगाया जा सकता है, जो अधिक स्वस्थ, अधिक मानवीय, अधिक सामाजिक, अधिक अभिन्न हो।

संत पापा ने कहा कि हम सार्वजनिक संसाधनों के खिलाफ सांस्कृतिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। यहाँ एक ईमानदारी एवं फलप्रद बातचीत की आवश्यकता है जो विभिन्न आवश्यकताओं को सुन सके एवं निःस्वार्थ, एकात्मता तथा रचनात्मकता की भावना से प्रेरित, ग्रह के वर्तमान एवं भविष्य के निर्माण के लिए समर्पित हो। 

सांस्कृतिक चुनौतियाँ

दूसरी विन्दू पर संत पापा ने कहा कि सांस्कृतिक चुनौतियों का सामना केवल तकनीकी के आधार पर नहीं किया जा सकता, जिसको समस्या के हल का एकमात्र तरीका के रूप में जिक्र किया गया है। यह, वास्तव में चीजों के बीच संबंधों के रहस्यमय नेटवर्क को देखने में असमर्थ साबित होता है और इसलिए कभी-कभी एक समस्या का समाधान दूसरी समस्या को जन्म देती है। 2016 में, मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल में एक नया संशोधन, किगली संशोधन को अपनाने की आवश्यकता ने यह साबित किया था।

इस संशोधन का उद्देश्य उन पदार्थों को प्रतिबंधित करना है, जो स्वयं में, ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने में योगदान नहीं करते हैं, लेकिन जो वायुमंडल की गर्मी को प्रभावित करते हैं और जिनका प्रयोग ओजोन परत के लिए हानिकारक पदार्थों के रूप में बढ़ जाता है।

संत पापा ने कहा कि इस संबंध में, मैं परमधरमपीठ द्वारा किगली संशोधन का पालन करने के इरादे की घोषणा करने पर खुश हूँ। इस कार्य के साथ, परमधर्मपीठ उन सभी राष्ट्रों को अपने सामान्य घर की देखभाल के लिए नैतिक समर्थन देना जारी रखना चाहता है।

सब कुछ जुड़ा हुआ

तीसरी सीख के बारे बतलाते हुए संत पापा ने कहा कि हमारे आमघर की देखभाल को यह एहसास करना चाहिए कि सब कुछ जुड़ा हुआ है। यह ओजोन समस्या और ग्लोबल वार्मिंग की स्थिति के बीच एक प्रकार का सेतु का काम करता है, इस प्रकार उनकी परस्पर क्रिया को उजागर करता है। हमारे निर्णयों के विभिन्न अंतर्संबंधों और उनके परिणामी प्रभावों के बारे सावधानीपूर्वक विचार में जटिलता के कई स्तर शामिल हैं। हम उस ऐतिहासिक क्षण में जी रहे हैं, जो उन चुनौतियों से प्रभावित हैं, जो आमहित की ओर निर्देशित संस्कृति के निर्माण के लिए अभी तक प्रेरणादायक हैं।

एक दूरदर्शी दृष्टि

यह एक दूरदर्शी दृष्टि को अपनाने की मांग करता है ताकि मानव परिवार के सभी सदस्यों के लिए, चाहे वह स्थान या समय से दूर अथवा नजदीक हो, अभिन्न विकास को बढ़ावा देने के लिए सबसे प्रभावी हो सके। यह दूरदर्शी दृष्टि शिक्षा एवं संस्कृति केंद्रों में आकार लेता है जहाँ जागृति उत्पन्न की जाती है और व्यक्ति राजनीति, विज्ञान और आर्थिक जिम्मेदारियों के लिए प्रशिक्षित किये जाते हैं।

संत पापा ने प्रतिभागियों से कहा कि मैं अपनी प्रार्थनापूर्ण आशा व्यक्त करता हूँ कि अंतरराष्ट्रीय ओजोन व्यवस्था, साथ ही हमारे सामान्य घर की देखभाल पर वैश्विक समुदाय की अन्य सराहनीय पहल, जो जटिल और चुनौतीपूर्ण है किन्तु हमेशा प्रेरणादायक पथ पर जारी रह सकें।

07 November 2019, 16:51