खोज

Vatican News
आमदर्शन समारोह के दौरान धर्मशिक्षा देते संत पापा फ्राँसिस आमदर्शन समारोह के दौरान धर्मशिक्षा देते संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

विवाहित दम्पति और लोकधर्मी विश्वास के आदर्श ˸ आमदर्शन समारोह में संत पाप

संत पापा फ्राँसिस ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर वाटिकन के संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में एवं बारिश के कारण पौल षष्ठम सभागार में एकत्रित हज़ारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों से “प्रेरित चरित” पर अपनी धर्मशिक्षा माला को आगे बढ़ाते हुए सम्बोधित किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 13 नवम्बर 2019 (रेई): प्रेरित चरित बतलाता है कि पौलुस एक अथक सुसमाचार प्रचारक, एथेंस में ठहरने के बाद आतिथ्य सत्कार की याद करता किन्तु अपने ठहरने के फलों पर भी गौर करता है, जैसे कि देयोनिसियुस एवं दमारिस का मन-परिवर्तन, और वह दुनिया में सुसमाचार की अपनी दौड़ को जारी रखता है। इस मिशनरी की यात्रा का नया पड़ाव कोरिंथ है जो अखैया के रोमी प्रांत की राजधानी है, एक व्यापार केंद्र तथा महानगर जहाँ दो महत्वपूर्ण बंदरगाह हैं।

अतिथि सत्कार

प्रेरित चरित के अध्याय 18 में हम पढ़ते हैं कि पौलुस की भेंट एक विवाहित दम्पति आक्विला और प्रिसिल्ला से होती है। वे इटली से आये थे, क्योंकि क्लौदियुस ने यह आदेश निकला था कि सब यहूदी रोम से चले जायें। (प्रे.च 18, 2). यह दम्पति ईश्वर पर पूर्ण विश्वास करता था तथा दूसरों के प्रति उदार था। उन लोगों के लिए जगह दे सकता था जो उनके समान विदेश में रह रहे थे। इस संवेदनशीलता ने उन्हें अतिथि सत्कार की ख्रीस्तीय कला का अभ्यास करने हेतु खुलने के लिए प्रेरित किया। (रोम 12: 13; इब्रा 13.2) और उन्होंने पौलुस के लिए अपना द्वार खोला। इस प्रकार उन्होंने न केवल सुसमाचार प्रचारक का स्वागत किया किन्तु उनके साथ येसु के सुसमाचार, को भी स्वीकार किया, जिसको उन्होंने अपने साथ लाया था, जो उन लोगों की मुक्ति हेतु ईश्वर का सामर्थ्य है जो उन पर विश्वास करते हैं। (रोम 1:16) उसी समय से उनका घर जीवित वचन की खुशबू से सराबोर हो गया और उनके हृदय को सजीव बना दिया। (इब्रा. 4:12)

अक्वीला एवं प्रिसिल्ला ने अपने व्यवसाय में भी पौलुस को शामिल किया, जिसमें वे तम्बू बनाने का काम करते थे। पौलुस शारीरिक श्रम को बहुत अधिक महत्व देते थे। वे इसे ख्रीस्तीय साक्ष्य का सौभाग्यपूर्ण स्थल मानते हैं। ( 1कोर. 4:12),  साथ ही साथ, दूसरों को भार दिये बिना खुद अपने लिए प्रबंध करने का सही रास्ता मानते थे।  

 (1थेस. 2: 9; 2 थेस 3: 8). ओरिजेन कहेंगे कि पौलुस "पृथ्वी के तम्बू निर्माण से स्वर्ग के तम्बू निर्माण की ओर बढ़ते हैं"... सभी लोगों को मुक्ति का संदेश सुनाने। (उपदेश संख्या 17,4) अक्वीला एवं प्रिसिल्ला के घर में यही हुआ, जहाँ तम्बू बनाया जाता था अब प्रेरित पौलुस वहाँ कोरिंथियों के लिए ईश्वर का तम्बू बनाने की योजना बनाते हैं और इस तरह कोरिंथ की कलीसिया की शुरूआत होती है।  (1कोर. 3:10).

अत्याचार

कोरिंथ में अक्वीला एवं फ्रिसिल्ला अपना द्वार न केवल प्रेरित पौलुस के लिए खोलते बल्कि ख्रीस्त में सभी भाइयों और बहनों के लिए भी खोलते हैं। घर में एकत्रित समुदाय को पौलुस सम्बोधित करते हैं (1कोर. 16,19), जो एक घरेलू कलीसिया बन जाती है। जहाँ ईश्वर के वचन को सुना और ख्रीस्तयाग अर्पित का जा सकता है।

कोरिंथ में डेढ़ साल बीताने के बाद पौलुस अक्वीला एवं फ्रिसिला के साथ शहर छोड़ एफेसुस चले गये। वहाँ भी उनका घर धर्मशिक्षा का स्थान बन गया। (प्रे.च 18:26) अंततः यह दम्पति रोम लौटता है। उनके प्रति अपना आभार प्रकट करते हुए पौलुस रोमियों को लिखे पत्र में कहते हैं, "ईसा मसीह में अपने सहयोगी प्रिसिल्ला और आक्विला को नमस्कार, जिन्होंने मेरे प्राण बचाने के लिए अपना सिर दाँव पर रख दिया। मैं ही नहीं, बल्कि गैर-यहूदियों की सब कलीसियाएं उनका आभार मानती हैं।" (16,3-4)

वैवाहिक जीवन के आदर्श

पौलुस के कई सहयोगियों में से अक्वीला और प्रिसिल्ला वैवाहिक जीवन के आदर्श हैं जो पूरे ख्रीस्तीय समुदाय की सेवा में जिम्मेदार पूर्वक समर्पित थे और हमें कई लोक धर्मियों के विश्वास और सुसमाचार प्रचार के लिए समर्पण की याद दिलाते हैं जिनके माध्यम से ख्रीस्तीय धर्म हमारे पास पहुँचा है। लोगों की धरती में जड़ जमाने और मजबूत होकर विकसित होने में इन परिवारों, दम्पतियों, ख्रीस्तीय समुदायों और लोकधर्मियों का समर्पण आवश्यक था जिन्होंने विश्वास को बढ़ने के लिए जगह दी।

हम पिता से प्रार्थना करें जिन्होंने दम्पतियों को जीवन के सच्चे मूर्तिकार बनने के लिए चुना ताकि सभी ख्रीस्तीय दम्पतियों को पवित्र आत्मा प्रदान कर सकें, अक्विला एवं प्रिसिल्ला के आदर्शों पर चलकर, ख्रीस्त एवं अपने भाई बहनों के लिए अपने हृदय एवं घरों के द्वारा को खोलना सीख सकें तथा एकतामय जीवन व्यतीत करते हुए विश्वास, आशा और प्रेम के जीवन पंथ को अपना सकें।  

संत पापा का अभिवादन

इतना कहने के बाद संत पापा ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की और विश्व के विभिन्न देशों से आये सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासियों का अभिवादन किया, खासकर, इंगलैंड, डेनमार्क, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया एवं अमरीका के तीर्थयात्रियों को। तत्पश्चात् उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति एवं परिवार को येसु ख्रीस्त के आनन्द एवं शांति की शुभकामनाएँ देते हुए उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

13 November 2019, 14:39