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कार्डिनल अयूसो˸ पोप एवं बौद्ध महागुरू के बीच मुलाकात प्रतीकात्मक

अंतरधार्मिक वार्ता को प्रोत्साहन देने हेतु गठित परमधर्मपीठीय समिति के अध्यक्ष कार्डिनल मिगवेल एंजेल अयूसो गिक्सोत ने बैंकॉक में बौद्ध महागुरू के साथ संत पापा फ्राँसिस की मुलाकात पर टिप्पणी की।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

कार्डिनल ने कहा कि बौद्ध और काथलिक परम्परा के बीच संवाद का पहला चिन्ह 50 वर्षों पहले 17वें बौद्ध महागुरू द्वारा वाटिकन में संत पापा पौल षष्ठम से मुलाकात में दिखाई दिया था।

आपसी सम्मान

कार्डिनल मिगवेल एंजेल अयूसो गिक्सोत जो संत पापा फ्राँसिस और बौद्ध महागुरू के बीच मुलाकात के दौरान उपस्थित थे। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि मुलाकात में उन्होंने एक-दूसरे की एवं एक-दूसरे की परम्पराओं के प्रति सम्मान की सराहना की।

प्रतीकात्मक क्षण

कार्डिनल ने कहा कि यह प्रतीकात्मक थी कि संत पापा फ्राँसिस ने इस बात को रेखांकित किया कि कलीसिया की उपस्थिति, साक्ष्य एवं सेवा में है और बौद्ध महागुरू किस तरह उसे पहचानते हैं। उन्होंने कहा कि यह भी उतना ही प्रतीकात्मक है कि बौद्ध महागुरू ने अपने आसन पर बैठने की अपेक्षा मंदिर के द्वार पर संत पापा फ्राँसिस की प्रतिक्षा की, जैसा कि उनके उत्तराधिकारी ने संत पापा जॉन पौल द्वितीय का स्वागत सन् 1984 में की थी।     

पूर्व के लिए एक वरदान

कार्डिनल ने बतलाया कि संत पापा ने बौद्ध महाधर्मगुरू के लिए उपहार भेंट किया, जिसमें अबु धाबी में संयुक्त घोषणा पत्र "विश्व शांति एवं सह-अस्तित्व के लिए मानवीय बंधुत्व" की एक प्रति भी थी। घोषणा पत्र पर संत पापा फ्राँसिस एवं अल अजहर के ग्रैंड ईमाम ने इस साल फरवरी माह में हस्ताक्षर किये थे।   

कार्डिनल अयूसो के अनुसार उपहारों के बीच अबू धाबी घोषणा पत्र प्रदान किया जाना विश्व में शांति एवं सह-अस्तित्व पर मानव बंधुत्व के संदेश को मध्यपूर्व से एशिया की ओर फैलाने पर जोर देना है।

21 November 2019, 16:40