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बैंकॉक के संत लुईस अस्पताल में संदेश देते संत पापा बैंकॉक के संत लुईस अस्पताल में संदेश देते संत पापा  (ANSA)

संत लुईस अस्पताल में संत पापा का दौरा और उनका संदेश

संत पापा फ्राँसिस ने थाईलैंड की प्रेरितिक यात्रा में 21 नवम्बर को बैंकॉक स्थित संत लुईस अस्पताल का दौरा किया। संत लुईस अस्पताल की स्थापना 1898 में सियाम प्रेरितिक विकर के महाधर्माध्यक्ष लुईस वेई ने की थी।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

बैंकॉक, बृहस्पतिवार, 20 नवम्बर 19 (रेई)˸ बृहस्पतिवार को अस्पताल के करीब 700 कर्मचारियों को सम्बोधित करते हुए संत पापा ने कहा, "मैं आपसे मुलाकात करने का अवसर पाकर खुश हूँ। इस मूल्यवान सेवा को अपनी नजरों से देखना मेरे लिए एक कृपा है जिसको कलीसिया थाई लोगों को प्रदान कर रही हैं, विशेषकर, आवश्यकता में पड़े लोगों को।"   

"उबी कारितास, देयूस इबी एस्त"

अस्पताल के आदर्शवाक्य पर प्रकाश डालते हुए संत पापा ने कहा कि यह मुख्य रूप से परोपकार का कार्य है जिसमें हम ख्रीस्तीय न केवल यह दिखाने के लिए बुलाये जाते हैं कि हम मिशनरी शिष्य हैं बल्कि इसमें हमारी तथा हमारी संस्था की शिष्यता की निष्ठा की परख होती है।

कर्मचारयों से उन्होंने कहा, "आप स्वास्थ्य के क्षेत्र में मिशनरी शिष्य हैं, जो हरेक व्यक्ति में ईश्वर को पाते हैं, विशेषकर, बुजूर्गों, युवाओं और कमजोर लोगों में। इस तरह देख पाने के द्वारा आप दया के एक महान कार्य को पूरा करते हैं और स्वास्थ्य देखभाल के प्रति आपका समर्पण चिकित्सक के सराहनीय एवं सरल कार्य के परे जाता है।"

मानव जीवन को स्वीकृति

संत पापा ने कहा कि "यह मानव जीवन का स्वागत और आलिंगन करना है। जब इसे अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में पहुँचाया जाता है, तब प्रत्येक मानव व्यक्ति की प्रतिष्ठा के लिए सम्मान एवं प्रेम से उत्पन्न करुणा द्वारा उनकी चिकित्सा की जानी चाहिए।" चंगाई कार्य को एक शक्तिशाली मलहम के रूप में देखा जाना चाहिए जो हर परिस्थिति में व्यक्ति की प्रतिष्ठा की रक्षा करता और एक ऐसे नजर से देखता है जो उसे प्रतिष्ठा एवं समर्थन प्रदान करता।    

संत पापा ने अस्पताल के कर्मचारियों को सम्बोधित करते हुए गौर किया कि अस्पताल का कार्य भारी और थकानदेह है। उन्होंने कहा कि यह बतलाता है कि स्वास्थ्य देखभाल के मिशन में न केवल रोगी बल्कि वहाँ के कर्मचारियों की भी चिंता की जानी है और उनके मिशन में सहयोग प्राप्त करने का एहसास दिलाना है।  

येसु हमारी दुर्बलता में हमारे करीब

संत पापा ने कहा कि हम प्रत्येक जानते हैं कि बीमारी जो सवाल करती है वह गहराई तक जाती है। इससे हमारी पहली प्रतिक्रिया विरोध, घबराहट और निराशा होती है किन्तु येसु के दुःखभोग में अपना दुःख मिलाने से हम हमारी दुर्बलताओं एवं घावों में उनके सामीप्य की शक्ति को पहचान पायेंगे।    

कर्मचारियों के साथ मुलाकात के अंत में, संत पापा ने दुःखों को बांटने एवं उनका साथ देने के चिन्ह स्वरूप, अस्पताल के रोगियों एवं विकलांग लोगों के साथ व्यक्तिगत मुलाकात की।

 

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बैंकॉक में संत लुईस अस्पताल में संत पापा का दौरा
21 November 2019, 14:43