खोज

Vatican News
संत पेत्रुस महागिरजाघर के सामने अमाजोन सिनॉड में भाग लेने वाला एक आदिवासी संत पेत्रुस महागिरजाघर के सामने अमाजोन सिनॉड में भाग लेने वाला एक आदिवासी  (AFP or licensors)

लोकधर्मियों के कारिज्म की सराहना, याजकवाद से दूर

अमाजोन पर धर्माध्यक्षीय धर्मसभा की 10वीं बैठक में 14 अक्टूबर को, संत पापा फ्राँसिस के साथ 177 धर्माध्यक्षों और अन्य सदस्यों ने भाग लिया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 15 अक्तूबर 2019 (रेई)˸ सभा में सिनॉडालिटी के मापदंडों के प्रकाश में कलीसिया के मिशन पर पुनःविचार किया गया ताकि कलीसिया ईश वचन के द्वारा अधिक से अधिक निर्मित हो और जिसे अमाजोन क्षेत्र की कलीसिया की चुनौती के रूप में देखा जा सके। इसी विषय पर कई हस्ताक्षेप प्रस्तुत किये गये।

ईश वचन

सभा में कहा गया कि ईश वचन एक सक्रिय एवं करुणावान उपस्थिति है। यह शिक्षाप्रद एवं नबीकीय, निर्माणात्मक एवं क्रियात्मक है। यह अभिन्न पारिस्थितिकी की चुनौती को रेखांकित करता है और सामाजिक, संस्कृतिक एवं राजनीतिक विकास एवं नवीन मानवता का माध्यम बन सकता है। ईश वचन के नये मिशनरी जिसमें महिलाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए, बशर्ते कि वे समकालीन चुनौतियों के लिए नई प्रतिक्रियाएँ दे सकें। अतः कलीसिया को चाहिए कि वह मिशनरी भावना में लोकधर्मियों को प्रशिक्षित करने हेतु निवेश करे। जिन्हें यह मालूम हो कि अमाजोन के हर क्षेत्र में किस तरह सुसमाचार का प्रचार किया जाए। लोकधर्मियों के प्रशिक्षण के साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि आदिवासी लोगों को भी धर्मसमाजी जीवन एवं अभिषिक्त पुरोहित के रूप में बुलाहट के लिए प्रेरित किया जाए।

लोकधर्मी एवं महिलाओं की भूमिका

सभागार में यह भी कहा गया कि लोकधर्मियों की क्षमताओं को बेहतर रूप से व्यक्त किया जाए तथा कलीसिया में उनके कार्यों में सराहा जाए क्योंकि लोकधर्मियों के कारण ही कलीसिया आगे बढ़ रही है और याजकवाद से दूर हो रही है। एक हस्ताक्षेप में वीरी प्रोबाती एवं संस्कारों के अनुष्ठान के संबंध में महिलाओं के लिए भी खुलेपन पर विशेष रूप से सुझाव दिया गया। कुछ लोगों ने यह भी सुझाव रखा कि महिलाओं को अभिषेक के बिना उन संस्कारों का अनुष्ठान करने में शामिल किया जाए जिनका अनुष्ठान याजकों के बिना भी संभव है। ताकि पूरे पान-अमाजोन क्षेत्र में महिलाओं की प्रतिष्ठा एवं समानता को गारंटी दिया जा सके। इन कार्यों में मुख्य रूप से ईश वचन समारोह अथवा सामाजिक उदारता कार्यक्रम आदि शामिल किये जा सकते हैं।     

वीरी प्रोबाती

सभा में कहा गया कि "वीरी प्रोबाती पुरोहितों" से पहले "वीरी प्रोबाती उपयाजकों" पर विचार किया जाए। इस तरह वीरी प्रोबाती पुरोहित, वीरी प्रोबाती स्थायी उपयाजकों से चुने जा सकते हैं। अतः स्थायी उपयाजक पवित्र पुरोहिताई के संस्कार के लिए विवाहित व्यक्ति के शामिल किये जाने की भावी सम्भावना के लिए एक उपयुक्त “प्रयोगशाला" बन सकता है।

नाबालिगों एवं लाचार वयस्कों की देखभाल

अमाजोन में नाबालिगों एवं वयस्कों की देखभाल के संबंध में, बाल यौन शोषण के रोग और अन्य तरह के यौन दुराचार से बचने के लिए कलीसिया को सजग और साहसी बनने की जरूरत है। इस बात पर जोर दिया गया कि सबसे बड़ी चुनौती है पारदर्शिता एवं जिम्मेदारी की ताकि इन अपराधों को दूर किया जा सके।  

युवाओं के यौन शोषण की विषयवस्तु पर भी बारम्बार गौर किया गया। एक प्रतिभागी ने कहा कि अपराधी नेटवर्क बच्चों से उनके बचपन छीन लेते हैं तथा उन्हें अंग तस्करी के शिकार बना देते हैं। एक आँकड़ा यह बताता है कि स्थिति कितनी गंभीर है कि 2018 में केवल ब्राजील में 62 हजार बलात्कार दर्ज किये गये थे। यह अमाजोन क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा आँकड़ा है।   

इन सभी के मूल में है गंभीर आर्थिक असामनता तथा कार्रवाई करने में सरकार की बड़ी लापरवाही, जिसके कारण स्थानीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भयावह अपराध हो रहे हैं। अतः इसके लिए अधिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता है और धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों एवं धर्मसमाजियों को भी भाग लेने की जरूरत है।  

मानव तस्करी के खिलाफ संघर्ष जिसमें बच्चों एवं महिलाओं की तस्करी अधिक की जाती है सिनॉड में इस पर भी ध्यान दिया गया। कहा गया कि यह दुनिया का सबसे अमानवीय कृत्यों में से एक है।

समग्र मानव विकास को बढ़ावा देने हेतु गठित परमधर्मपीठीय परिषद के माध्यम से प्रस्ताव रखा गया कि मानव तस्करी के मुद्दे पर बृहद कम्पनियों को अंतरराष्ट्रीय नीतियों के अनुपालन के लिए बाध्य किया जाए तथा इस तरह के अपराधों के लिए काम करने हेतु विशेष प्रेरितिक आयोग गठन किये जाएँ।

बुलाहट एवं युवाओं के लिए प्रेरितिक कार्य

दूसरे हस्तक्षेपों में बुलाहट को जागृत करने के लिए प्रेरितिक कार्य के महत्व पर प्रकाश डाला गया जिसे कहा गया कि सुसमाचार प्रचार के कार्य से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए। इसके अलावा सभी प्रकार के सुसमाचार प्रचार के कार्यों में युवाओं की प्रेरिताई को भी साथ लेकर चलना है जो एक बुलावा है और साथ ही साथ, ख्रीस्त के साथ व्यक्तिगत मुलाकात का प्रस्ताव भी। सभा के प्रतिभागियों को स्मरण दिलाया गया कि जो युवा ख्रीस्त का अनुसरण करना चाहते हैं उन्हें पवित्र एवं समर्पित जीवन के साक्ष्य द्वारा पर्याप्त प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। इसके लिए पुरोहितों को अमाजोन क्षेत्र की आवश्यकता को पूरी तरह समझना होगा। प्रशिक्षण न केवल शैक्षणिक बल्कि मिशनरी भावना एवं एक गड़ेरिये के हृदय से प्रेरित होना चाहिए।  

जल ˸ प्राथमिक संसाधन

अभिन्न पारिस्थितिकी के लिए प्रचारकों के प्रशिक्षण को रेखांकित किया गया, विशेषकर, जल की देखभाल एवं रक्षा के लिए, जो जीवन का स्रोत एवं प्रमुख संसाधन है। विचार अभिव्यक्ति में कहा गया कि जल से संबंधित बीमारियों के कारण हर दिन हजारों बच्चे मर रहे हैं। एक प्रतिभागी ने संत पापा फ्राँसिस के कथन का स्मरण दिलाया कि अगर अगला विश्व युद्ध होगा तो यह पानी के कारण होगा। अतः यह आवश्यक है कि आमघर की देखभाल की आवश्यकता के प्रति जागरूकता बढ़ायी जाए तथा सृष्टि के साथ समझौता किया जाए। पर्यावरणीय बदलाव लाने के लिए आधुनिक जीवन शैली के नैतिक आयाम पर भी नजर डालने की जरूरत है जो बहुत अधिक टेक्नोक्रेटिक हो चुका है जिसका अंतिम लक्ष्य सब कुछ में लाभ अर्जित करना हो गया है।  

संचार की चुनौतियाँ

संचार के संबंध में इस बात को पुष्ट किया गया कि संचार मीडिया के द्वारा हमें सभी संस्कृतियों एवं भाषाओं के द्वारा संचार करने के लिए खुला होना चाहिए ताकि अमाजोन के लोगों को सहयोग दिया जा सके। अतः कलीसिया प्रायोजित मीडिया स्थानीय ज्ञान को मजबूत करने का स्थान हो जिसको आदिवासी संचारकों को प्रशिक्षित करने के द्वारा किया जा सकता है।  

सिनॉड धर्माचार्यों के द्वारा अन्य विषयों पर किये गये चिंतन में आदिवासी लोगों की रक्षा करना भी था। जिसको शिक्षा एवं सामाजिक विकास के लक्ष्य पर छोटी परियोजनाओं द्वारा किये जा सकते हैं, क्योंकि उन्हें बहुधा समाज के हाशिये पर रखा जाता है। आदिवासी लोगों को "अक्षम" नहीं समझा जाना चाहिए बल्कि उन्हें सशक्त किया जाना, उन्हें सुना, समझा जाना और उनका स्वागत किया जाना चाहिए। इस विषय पर, न्याय एवं शांति के लिए गठित परमधर्मपीठीय आयोग एवं मानव अधिकार को प्रोत्साहन देने हेतु गठित समिति के बीच सहयोग को निमंत्रण दिया गया।  

संत पापा फ्राँसिस का चिंतन

सभा के अंत में संत पापा फ्राँसिस ने विभिन्न विषयों पर चिंतन करते हुए उन विषयों पर प्रकाश डाला जिन्होंने उन्हें बहुत अधिक प्रभावित किया है।

15 October 2019, 16:35