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देवदूत प्रार्थना के उपरांत आशीष देते संत पापा देवदूत प्रार्थना के उपरांत आशीष देते संत पापा  (AFP or licensors)

देवदूत प्रार्थना, अमाजोन सिनॉड, प्रभु पद-दलितों की पुकार सुनता

वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 27 अक्टूबर को, अमाजोन पर धर्माध्यक्षीय धर्मसभा के समापन के दिन संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया, देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार, 28 अक्तूबर 2019 (रेई)˸ संत पेत्रुस महागिरजाघर में आज सुबह ख्रीस्तयाग अर्पित किया गया उसके द्वारा पान अमाजोन क्षेत्र पर विशेष धर्माध्यक्षीय धर्मसभा का समापन हुआ। पहला पाठ जो प्रवक्ता ग्रंथ से लिया गया है इस यात्रा की आरम्भिक विन्दु की याद दिलाती है। "वह दरिद्र के साथ अन्याय नहीं करता और पद-दलित की पुकार सुनता है। जो सारे हृदय से प्रभु की सेवा करता है, उसकी सुनवाई होती है और उसकी पुकार मेघों को चीर कर ईश्वर तक पहुँचती हैं।" (प्रवक्ता 35,16,20)

गरीबों की पुकार सुनना

संत पापा ने कहा, "गरीबों की पुकार, पृथ्वी की पुकार के साथ अमाजोन से हमारे पास पहुँची है। इन तीन सप्ताहों के बाद हम नहीं सुनने का बहाना नहीं कर सकते। सिनॉड के बाहर और भीतर, गरीबों और अनेक लोगों के साथ पुरोहितों, युवाओं एवं वैज्ञानिकों ने अपील की है कि हम उदासीन न रहें। हमने इस कहावत को कई बार सुना है, "बाद में बहुत देर हो जायेगी।" यह कहावत एक नारा बनकर नहीं रह सकता।  

एक साथ आगे बढ़ना

सिनॉड क्या था? जैसा कि इसका शाब्दिक अर्थ है, एक साथ चलना था, प्रभु से प्राप्त सांत्वना द्वारा साहस के साथ आगे बढ़ना था। हम एक-दूसरे की आँखों में नजर डालते और एक-दूसरे को सुनते हुए, ईमानदारी से, कठिनाइयों को छिपाये बिना, सेवा के लिए एक साथ चलने की सुन्दरता का अनुभव करते हुए आगे बढ़े।

संत पौलुस द्वारा तिमथी को लिखे पत्र से लिए गये पाठ पर चिंतन करते हुए संत पापा ने कहा कि दूसरे पाठ में संत पौलुस अपने जीवन के अंतिम समय में हमें प्रोत्साहित करते हैं हालांकि वे जानते हैं कि उन्हें ऊँचा उठाया जाएगा, वे कहते हैं, "मैं प्रभु को अर्पित किया जा रहा हूँ। मेरे चले जाने का समय आ गया है।"  (2 तिम. 4,6), वे लिखते हैं, "परन्तु प्रभु ने मेरी सहायता की और मुझे बल प्रदान किया, जिससे मैं सुसमाचार का प्रचार कर सकूँ और सभी राष्ट्र उसे सुन सकें। मैं सिंह के मुँह से बच निकला।" (पद. 17) संत पौलुस की यही अंतिम अभिलाषा थी, अपने आप के लिए अथवा अपनों के लिए कुछ नहीं, बल्कि सुसमाचार के लिए ताकि सभी लोगों तक उसका प्रचार किया जा सके। यही पहले आता है और सबसे अधिक मायने रखता है। संत पापा ने कहा कि हम में से कई अनेक बार अपने आप से पूछा होगा कि मेरे जीवन के लिए क्या अच्छा है। आज हम अपने आप से पूछें, सुसमाचार के लिए मैं कौन-सी अच्छी चीज कर सकता हूँ?

नये रास्तों की खोज

सिनॉड में हमने सुसमाचार की घोषणा करने के लिए नये रास्तों को खोलने की इच्छा से एक साथ यही सवाल किया। सबसे पहले हमने भी आज के पाठ में चुंगी जमा करने वाले की तरह अनुभव किया। हमने अपने आपको प्रभु के सामने रखने की आवश्यकता महसूस की ताकि उन्हें अपने और कलीसिया के केंद्र में रख सकें क्योंकि वही घोषणा कर सकता है जो जीता है। येसु और सुसमाचार के लिए जीने हेतु हमें अपने आप से बाहर निकलने की जरूरत है। जब हम अपने आरामदायक समुद्री तटों को त्यागकर गहरे जल में प्रवेश करने का साहस करते हैं, विचारधारा के दलदल में नहीं बल्कि एक खुले समुद्र में जहाँ पवित्र आत्मा हमें जाल डालने को कहते हैं।

अमाजोन की रानी मरियम

आगे की यात्रा के लिए हम धन्य कुँवारी मरियम से प्रार्थना करें, जिन्हें अमाजोन की रानी के रूप में सम्मान और स्नेह प्रदान किया जाता है। वे उसपर विजय पाने वाली नहीं बल्कि संस्कृति के अनुकूल विनम्रता एवं साहस के साथ अपने बच्चों एवं उपेक्षितों की संरक्षिका बन गयी तथा हमेशा लोगों की संस्कृति के अनुसार चली। ऐसा कोई आदर्श अथवा शुद्ध संस्कृति नहीं है जो दूसरों को शुद्ध करता। केवल सुसमाचार है जो शुद्ध है और जो संस्कृति के अनुकूल है। मरियम जिन्होंने नाजरेथ के गरीब घर में येसु की देखभाल की, हम उन्हें आमघर के सबसे गरीब बच्चों को उन्हें सौंप देते हैं।  

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थन का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

28 October 2019, 14:25