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अमेज़न धर्मसभा की शुरुआत करते हुए संत पापा फ्राँसिस अमेज़न धर्मसभा की शुरुआत करते हुए संत पापा फ्राँसिस  (AFP or licensors)

अमाजोन धर्मसभा संत पापा के मन और हृदय में

संत पापा फ्राँसिस ने अमाज़ोन धर्मसभा की शुरुआत अमाजोन के कई भाई-बहनों को याद करते हुए किया जो भारी क्रूस ढो रहे हैं और कलीसिया के प्यार के सुसमाचार द्वारा अपनी मुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हमें अमाजोन के लोगों को समझने और उनकी सेवा करने पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 07 अक्टूबर 2019 (रेई) : सोमवार 7 अक्टूबर को वाटिकन में अमाजोन धर्मसभा के पहले दिन संत पापा ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और इस धर्मसभा की तैयारी के दौरान पुएरतो मालदोनादो से लेकर आज तक के सभी कार्यों के लिए हृदय से धन्यवाद दिया।

संत पापा ने अपना संदेश अमाजोन धर्मसभा के चार आयामों:प्रेरितिक आयाम, सांस्कृतिक आयाम, सामाजिक आयाम और पारिस्थितिक आयाम पर केंद्रित किया।

धर्मसभा का प्रेरितिक आयाम

संत पापा ने कहा कि पहला प्रेरितिक आयाम बहत ही महत्वपूर्ण है जिसमें सब कुछ शामिल है। हमें एक ख्रीस्तीय हृदय के साथ अमाजोन की वास्तविकता को देखने की  और प्रेरितों के मनोभाव से इस वास्तविकता को समझने की जरुरत है क्योंकि वे हमेशा पिछले विकल्प से प्रतिबंधित होते हैं। अमाजोन के लोगों का अपना विवेक, दैनिक अनुभव और प्राकृतिक ज्ञान है। हमें उनकी संस्कृति, इतिहास और जीवन शैली का आदर करना चाहिए। जब हम वैचारिक उपनिवेशों के लिए विदेशी मनोभाव से उनसे सम्पर्क करते हैं तो उन लोगों की विचारधारा को नष्ट करते हैं। हम भारत के डी नोबिली, चीन के रिच्ची और अन्यों की याद करें जिनकी समरूपता केंद्रीयतन ने लोगों की संस्कृति प्रमाणिकता को उभरने नहीं दिया। इसलिए जब हम लोगों की वास्तविकता के करीब जाते हैं तो हमें उनके जीवन को विकसित करने का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।

संत पापा ने सुसमाचार प्रचार हेतु मिशनरियों के कठिन कार्यों की प्रशंसा की जिन्होंने पवित्र आत्मा की प्रेरणा से अपना कार्य सम्पन्न किया।  संत पापा ने कहा कि हमें सुसमाचार प्रचार और धर्मपरिवर्तन के बीच भ्रमित नहीं होना चाहिए।  

वैचारिक उपनिवेश

संत पापा फ्राँसिस ने वैचारिक उपनिवेशवाद की चेतावनी दी जो लोगों की विशेषताओं को कम या नष्ट कर देती है। उन्होंने कहा, "विचारधारा हमें स्वीकार किए बिना, बौद्धिक रूप से समझने के अपने प्रयास में अतिशयोक्ति की ओर ले जाती है। हम श्रेणिवद्ध करने के लिए या "वाद" के लिए वास्तविकता को कम करते हैं। ये एक तरह से ऐसे नारे हैं जिसके कारण उन लोगों के प्रति हम पूर्वधारणा के साथ संपर्क में आते हैं।

संत पापा ने "सभ्यता और बर्बरता" का उदाहरण दिया जो लोगों को योग्य बनाने और हमारे बीच एक दूरी डालकर "विभाजित करने और विनाश करने का काम करता है।

पंख बनाम बिरेटास

संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि वे रविवार को संत पेत्रुस महागिरजाघर में धर्मसभा के उद्घाटन मिस्सा में चढ़ावा ले जाने वाले आदिवासी के बारे में की गई "अपमानजनक टिप्पणियों को सुनकर दुखी थे।" टिप्पणी उन पंखों के बारे में थी जिसे आदिवासी ने अपने सिर पर लगाई थी।

संत पापा ने उन्हें चुनौती दी, "मुझे बताइये कि वाटिकन विभागों में कुछ अधिकारियों द्वारा इस्तेमाल किए गए बिरेटास (तीन कोनों वाली टोपी) और आदिवासी द्वारा सिर पर पंख लगाने के बीच क्या अंतर है?"

व्यावहारिक बनाम अनुकरणीय

संत पापा फ्राँसिस ने "शुद्ध रूप से व्यावहारिक उपायों का प्रस्ताव" देने की चेतावनी दी, जबकि हमें इसके अनुकरण के बारे में भी सोचना चाहिए, एक परिप्रेक्ष्य "जो लोगों की वास्तविकता से पैदा हुआ है"।

संत पापा ने कहा, "हम यहां सामाजिक विकास के कार्यक्रमों का आविष्कार करने नहीं आए हैं, जिसका उद्देश्य संस्कृतियों को संग्रहालय में रखना है। हम यहां, लोगों की सेवा हेतु चिंतन करने के लिए और उन्हें समझने के लिए एकत्रित हुए हैं।"

पवित्र आत्मा धर्मसभा के नायक

संत पापा ने कहा "एक धर्मसभा संसद नहीं है", "खुद की शक्ति को या विवेक को प्रदर्शित का यह स्थान नहीं है या "जिसके पास बहुमत है।" एक धर्मसभा पवित्र आत्मा की प्रेरणा और मार्गदर्शन में एक साथ आगे बढ़ता है। पवित्र आत्मा धर्मसभा के नायक हैं। उसे "हमारे बीच, हमारे साथ, हमारे माध्यम से व्यक्त करने की आवश्यकता है।

विनम्रता और विनोदी भावना

अंत में, संत पापा फ्राँसिस ने प्रतिभागियों से "चिंतन करने, संवाद करने, विनम्रता के साथ सुनने... और साहस के साथ बोलने" का आग्रह किया। धर्मसभा में भाग लेना, न केवल कमरे में एक स्थान पर कब्जा करना है बल्कि धर्मसभा की हर प्रक्रिया में अपना योगदान देना है।

उन्होंने कहा कि हमें सम्मानजनक होने की जरूरत है और हमारा संवाद विवेकपूर्ण हो, परस्पर विरोधी संदेश बनाने के लिए या धर्मसभा प्रक्रिया को खराब करने के लिए नहीं। धर्मसभा में गंभीर मसलों पर विचार करते हुए भी हम अपने विनोदी स्वभाव को न छोड़ें।

07 October 2019, 16:39