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संत पापा फ्राँसिस नये कार्डिनलों के साथ संत पापा फ्राँसिस नये कार्डिनलों के साथ 

नए कार्डिनलों को संत पापा: मसीह का साक्ष्य करुणा के साथ दें

संत पापा फ्राँसिस ने कंसिस्ट्री समारोह के दौरान 13 नए कार्डिनलों को कार्डिनल मंडल में शामिल किया और ईश्वर की करुणा के बारे में जागरूक होने के महत्व पर चिंतन किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 07 अक्टूबर 2019 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 5 अक्टूबर की शाम को संत पेत्रुस महागिरजाघर में कार्डिनल मंडल के सदस्यों और पांच महाद्वीपों के प्रतिनिधिमंडल के सामने 13 नये कार्डिनलों को कार्डिनल मंडल में शामिल किया। कनसिस्ट्री समारोह के दौरान संत पापा ने अपना प्रवचन ‘करुणा’ शब्द पर केंद्रित किया।

येसु की करुणा

संत पापा ने कहा कि हम जितना अधिक सुसमाचार पढ़ेंगे और चिंतन करेंगे हम येसु की करुणा की महत्ता को पायेंगे। गरीब और दुखियों के प्रति येसु की करुणा एक सामयिक, भावनात्मक मात्र नहीं है, लेकिन यह उनके दिल का मनोभाव है।

येसु लोगों को पापों से मुक्त करने हेतु पिता ईश्वर की इच्छा को पूरा करने इस धरती पर आये। पापों के कारण ईश्वर और मनुष्यों के बीच जो खाई थी उसे पाटने आये। उन्होंने हमारे बीमार शरीर का स्पर्श किया।

येसु "बिना किसी उम्मीद के, निष्कासितों की तलाश में निकल जाते हैं।" पिता ईश्वर की करुणा हमेशा येसु के हृदय में विराजमान थी। गरीबों, बीमारों और हाशिये पर जाने वालों के प्रति करुणा येसु को अपने पिता से मिली थी।

करुणा का अभाव

संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि उनके लोगों के लिए ईश्वर का प्यार "करुणा से सराबोर" है, जबकि, "दुःख की बात यह है कि मानव में अक्सर करुणा का अभाव हो जाता है"। उदाहरण देते हुए संत पापा ने समझाया कि येसु के शिष्यों में भी अक्सर करुणा की कमी दिखाई पड़ती है, जब भीड़ को खाना खिलाने की समस्या का सामना करना पड़ा, तो शिष्यों ने उन्हें खुद इसके बारे में चिंता करने के लिए कहा। संत पापा ने कहा, "यह हम इंसानों के बीच एक सामान्य रवैया है, हमेशा न्यायोचित होता है, कई बार वे संहिताबद्ध भी हो जाते हैं और संस्थागत अवहेलना को जन्म देते हैं… जो करुणा की कमी वाले ढ़ांचे को उत्पन्न करती है।”

करुणा का भाव

संत पापा फ्राँसिस ने कार्डिनल मंडल के सदस्यों और नये कार्डिनलों को संबोधित करते हुए पूछा, "ईश्वर हम प्रत्येक को अपनी करुणा में समाहित किये हुए हैं। ईश्वर की इस करुणा के बारे में क्या हम जागरूक हैं? हमारे लिए ईश्वर की करुणा को क्या हम महसूस करते हैं? "जब तक मुझे नहीं लगता कि मैं ईश्वर की अनुकंपा का उद्देश्य हूं, मैं उनके प्यार को समझ नहीं सकता।" "अगर मुझे यह महसूस नहीं होता है, तो मैं इसे कैसे साझा कर सकता हूँ, कैसे मसीह का साक्ष्य करुणा के साथ दे पाऊँगा?"

करुणा दिखाना

संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि हमारी प्रेरिताई के प्रति ईमानदार रहने की क्षमता इस जागरूकता पर निर्भर करती है कि अपने प्रभु के सुसमाचार प्रचार हेतु “अपने रक्त को बहाने के लिए भी तत्पर हैं, जैसा कि आपके वस्त्र के लाल रंग से संकेत मिलता है। मसीह की करुणा के प्रति हमारी जागरूकता दूसरों के प्रति करुणा दिखाने में हमें सक्षम बनाता हैं। इसके बिना, कोई भी वफादार नहीं हो सकता है।

अपने प्रवचन के अंत में संत पापा ने एक दयालु हृदय की कृपा के लिए प्रार्थना की। “हम सभी उस मसीह के गवाह बन सकें जिसने हमें चुना, हमें अभिषिक्त किया और हम सभी को उद्धार का सुसमाचार प्रचार करने के लिए भेजा है।"

07 October 2019, 16:56